MP : ससुर ने बढ़ाया रिश्ते का मान : बीमार बहू को किडनी देकर बचाई जान

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मुरैना। विश्व किडनी दिवस पर चंबल के मुरैना से रिश्तों का मान बढ़ाने वाली सुखद खबर आई। एक ससुर ने बीमार बहू की जान बचाने के लिए किडनी दान की। दिल्ली में बुधवार रात सफल ऑपरेशन के बाद दोनों ही स्वस्थ हैं। कोख में ही बालिकाओं की हत्या एवं ससुराल में बहुओं को प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं के बीच चंबल के मुरैना में इस पहल की खूब प्रशंसा हो रही है।

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मुरैना निवासी और वर्तमान में ग्वालियर के मुरार में रह रहे 59 वर्षीय शिवराम गौड़ की बहू शीलम उर्फ शीलू उम्र 35 वर्ष की छह माह पहले तबीयत बिगड़ी और चेकअप के बाद पता लगा कि शीलू की दोनों किडनी खराब हो चुकी हैंं। दिल्ली के अस्पताल में लगातार इलाज और सप्ताह में एक बार दिल्ली में डायलिसिस चली, लेकिन शीलू की हालत नहीं सुधरी। एक सप्ताह पहले डॉक्टरों ने बताया कि शीलू की दोनों किडनी 70 फीसद से ज्यादा फेल हो चुकी है, अब जान बचानी है तो कम से कम एक किडनी बदलनी पड़ेगी। सेना से रिटायर हुए शीलू के ससुर शिवराम बिना झिझक के खुशी-खुशी अपनी एक किडनी देने के लिए आगे आए और बुधवार रात किडनी ट्रांसप्लांट का सफल ऑपरेशन दिल्ली में हुआ। शिवराम और उनकी बहू शालू की जान डाक्टरों ने खतरे से बाहर बताई है।

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माता-पिता आए आगे पर शुगर ने रोक दिया: शीलू की बेहद नाजुक हालत और जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट की बात सुनकर शीलू के ससुर से पहले उसके पिता रिटायर प्रिंसीपल रामदीन गौड़ और मां मुन्नीबाई भी आगे आए। डाक्टरों ने कहा कि एक किडनी से शीलू की जान बच जाएगी और माता-पिता ने अपनी एक-एक किडनी बेटी को दान करने की इच्छा जता दी। इसके बाद दोनों के चेकअप हुए तो दोनों को हाई शुगर की बीमारी निकली। यह देख डाक्टरों ने शीलू के पिता व मां की किडनी लेने से इंकार कर दिया।

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मेरी बेटी और बहू सब यही है: अस्पताल में भर्ती शिवराम गौड़ का कहना है कि मेरी कोई बेटी नहीं हैं। करीब 10 साल पहले शीलू मेरे घर की बहू बनकर आई, तभी से इसे अपनी बेटी माना। मुझ पर तो पिता व ससुर दोनों का धर्म निभाने का जिम्मा था, कोई पिता अपनी बेटी की जान खतरे में कैसे देख सकता है। मेरे शरीर का अंग मेरी बेटी की जान बचा पाया, इससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए।

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हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता विश्व किडनी दिवसः विश्व किडनी दिवस हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय सोसायटी ऑफ नेफरोलॉजी (आइएसएन) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन (आइएफकेएफ) ने इसकी शुरुआत की थी। बताते हैं कि दुनियाभर के हर 10 में से 1 व्यक्ति को किडनी से संबंधित कोई न कोई परेशानी है और पूरे विश्व में 85 करोड़ से ज्यादा लोग किडनी रोगों की चपेट में हैं। इसी भयावहता से बचने, किडनी रोग के प्रति जागरूकता फैलाने व रोगियों को सुगम इलाज मुहैया हो इस उद्देश्य से यह दिन मनाया जाता है।


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