MP : भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद नंद कुमार सिंह चौहान का कोरोना से निधन , CM ने ट्वीट कर जताया दुख

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भोपाल। खंडवा से बीजेपी सांसद नंदकुमार सिंह चौहान का आज निधन हो गया। दिल्ली के मेदांता में आज सुबह अंतिम सांस ली। बेटे हर्षवर्धन सिंह ने निधन की पुष्टि की है। निधन की खबर से बीजेपी में शोक की लहर दौड़ गई।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह समेत सभी आला नेताओं ने निधन पर दुख व्यक्त किया है। प्रदेश वीडी शर्मा, संगठन मंत्री, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने नंदकुमार सिंह चैहान के निधन को अपूरणीय क्षति बाताया है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर याद किया हैं।

लोकप्रिय जननेता नंदू भैया, हम सबको छोड़कर चले गये। हमारे सब प्रयास विफल हुए।

सीएम शिवराज ने लिखा- लोकप्रिय जननेता नंदू भैया, हम सबको छोड़कर चले गये, हमारे सब प्रयास विफल हुए। नंदू भैया के रूप में एक आदर्श कार्यकर्ता, कुशल संगठक, समर्पित जननेता को खो दिया, मैं व्यथित हूं। नंदू भैया का जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नंदू भैया ने अपना सर्वोत्कृष्ट योगदान दिया। नंदू भैया की पार्थिव देह आज उनके गृह ग्राम पहुंचेगी,कल हम सब उन्हें विदाई देंगे। मैं उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं।

नंदकुमार सिंह चौहान का राजनीतिक सफर

नंदकुमार सिंह चौहान का जन्म 8 सितंबर 1952 को शाहपुर में हुआ था, वो फिलहाल खंडवा से बीजेपी सांसद थे, सन 1978-80 और 1983-87 तक बुरहानपुर जिले के शाहपुर से नगर पालिका के अध्यक्ष रहे थे। इसके बाद 1985-96 तक लगातार 2 बार भाजपा के टिकट पर विजयी होकर मध्यप्रदेश विधानसभा के बुरहानपुर क्षेत्र से विधायक रहे थे।

सन 1996 में 11वें लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें खंडवा क्षेत्र से सांसद उम्मीदवार बनाया था, जिसमे वें विजयी हुए थें लेकिन उनका कार्यकाल 1996-97 तक ही रहा क्योंकि तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने अपना त्यागपत्र दे दिया था। जिसके बाद 1998 के उपचुनाव में वो दूसरी बार खंडवा क्षेत्र से विजयी हुए थे।

यह कार्यकाल भी 1998-99 तक ही रहा जिसका मुख्य कारण वाजपेयी सरकार के समर्थक पार्टी का समर्थन वापस लेना था। सन् 1999 में 13वीं लोकसभा उपचुनाव में फिर से भाजपा ने खंडवा क्षेत्र से इन्हें उम्मीदवार बनाया जिसमें भी वे तीसरी बार विजयी हुए। जिसमें इनका कार्यकाल 2004 तक पूरा 5 साल चला।

इसके बाद सन् 2004 मे 14वीं लोकसभा चुनाव मे वह चौथी बार फिर से खंडवा क्षेत्र से सांसद का चुनाव जीत कर विजयी हुए। फिर सन् 2009 के 15वी लोकसभा चुनाव मे उन्हें फिर से खंडवा क्षेत्र से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया लेकिन इस बार वे कांग्रेस प्रत्याशी अरूण यादव से चुनाव हार गए थे। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें मध्यप्रदेश संगठन की जिम्मेदारी सौंप दी।

सन 2013 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव मे उन्हें हटाकर नरेंद्र सिंह तोमर को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था। जिसके बाद उन्हें 16वीं लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें पुन: खंडवा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और वो विजयी रहे। वहीं उन्हें मध्यप्रदेश भाजपा की कमान भी दे दी गई। सन् 2018 में उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से अपना इस्तीफा दे दिया था।

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