REWA : प्रदेश में लगातार हो रहे भीषण हादसे : घटनाओं के बाद भी सचेत नहीं हो रहा प्रशासन

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रीवा। प्रतिबंध के बावजूद शहर के रिहायशी इलाकों में न सिर्फ बारूद का भंडारण है बल्कि पटाखा की भारी-भरकम खेप शहर में बिक्री करने के लिए पहुंचने के साथ ही भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पटाखा की दुकानें संचालित हो रही हैं।

ऐसे इलाकों में पटाखा दुकान का संचालन स्वयं प्रशासन की स्वीकृति पर शायद हो रहा है। जबकि इस तरह की लापरवाही से कभी भी इंदौर एवं बालाघाट जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति शहर में हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो बड़े स्तर पर जानमाल की हानि से इंकार नहीं किया जा सकता। ज्ञात हो कि बालाघाट की एक पटाखा फैक्ट्री में आग लगने व विस्फोट होने से दो दर्जन लोगों की मौत हो गई है। तो वहीं इसके पूर्व इंदौर के पटाखा दुकान में आग भड़कने से 7 लोग जिंदा जलकर मर गए थे। प्रदेश में लगातार हो रहे भीषण हादसे के बाद भी जिला प्रशासन उक्त समस्या को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है।

कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

सिटी कोतवाली पुलिस ने गत दिनों पटाखा दुकान संचालित करने वाले व्यापारियों के यहां जांच करने के लिए अभियान चलाया था, लेकिन यह अभियान पुलिस की खानापूर्ति ही नजर आ रही है। यही वजह है कि व्यापारी अपना व्यापार उक्त स्थानों पर धड़ल्ले से संचालित कर रहे हैं। जिस तरह से जांच हुई और फिर दुकानें यथावत संचालित हो रही हैं उससे पुलिस और व्यापारियों के बीच आपसी सांठगांठ के आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं कि पुलिस जांच के नाम पर खानापूर्ति करके पटाखा व्यापारियों से शायद समझौता कर लिया है। व्यापारियों द्वारा दुकान सहित गोदाम में बारूद की बड़ी खेप स्टाक किए हुए है। लेकिन कार्रवाई न होने के चलते पूरा मामला सामने नहीं आ पा रहा है। जब भी कार्रवाई होती है वह खानापूर्ति तक ही पुलिस और प्रशासन की सीमित रह जाती है।

ऐसी होनी चाहिए व्यवस्था

पटाखा दुकान अथवा भंडारण वाले स्थान में आग बुझाने की सभी व्यवस्था होनी चाहिए। इसमें फायर सिलेंडर, पानी की पर्याप्त व्यवस्था, रेत आदि होना अनिवार्य है। वहीं भंडार गृह में दो दरवाजे एवं लाइट दुरस्त होनी चाहिए। जिससे कभी भी शार्टसर्किट न हो। लेकिन पटाखा दुकानों में आग बुझाने के कोई संयंत्र व्यापारी नहीं रखे हैं। किसी भी घटना में लोगों को बचाने के इंतजाम भी व्यापारियों के पास नहीं हैं। मिली जानकारी में पटाखा का भंडारण रानीगंज, गुड़हाई बाजार, घोघर में तीन ऐसे स्थान हैं जहां वर्षो से व्यापारी पटाखा का भंडारण करने के साथ ही व्यापार भी कर रहे हैं। जिस स्थान पर दुकान व भंडारण है वह शहर का सकरा का स्थान होने के कारण किसी भी तरह की घटना होने पर फायर बिग्रेड भी सरलता से पहुंच पाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि घटना होती है तो बालाघाट और इंदौर जैसे हालात शहर में भी निर्मित हो सकते हैं।

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