MP : इंदौर में 97 साल की बुजुर्ग दादी ने कोरोना को हराया : 80% तक लंग्स में इंफेक्शन था, 13 दिन बाद कोरोना से जंग जीत कर जन्मदिन पर घर पहुंचीं

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इंदौर। लगातार निगेटिव खबरों के बीच यह खबर आपको सुकून दे सकती है। इंदौर में 97 साल बुजुर्ग दादी शांतिबाई दुबे कोरोना को हरा कर घर लौटी हैं। उनके लंग्स में करीब 80% तक इंफेक्शन हो गया था। फिर भी डॉक्टरों ने और उन्होंने हार नहीं मानी। दृढ़ इच्छाशक्ति और बेहतर इलाज की बदौलत वह रामनवमी यानि बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटीं। खास है, शांतिबाई का जन्म 1925 में रामनवमी के दिन हुआ था। अपने जन्मदिन के मौके पर उन्हें नया जीवन मिला।

उज्जैन की रहने वाली शांतिबाई दुबे (97) को कोरोना संक्रमण के कारण लंग्स में इंफेक्शन 80 प्रतिशत तक बढ़ गया था। उन्हें 8 अप्रैल को इंदौर के इंडेक्स मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया। बेहतर उपचार और मानसिक बल के दम पर शांतिबाई दुबे ने कोरोना को परास्त कर दिखाया।

शांतिबाई दुबे की नातिन पूजा दीक्षित ने बताया, 4 अप्रैल को नानी का ब्लड प्रेशर बढ़ा। उन्हें उज्जैन में अस्पताल में भर्ती करवाया था। हालात में सुधार नहीं होने पर 7 अप्रैल को कोविड टेस्ट करवाया। उसी दिन सिटी स्कैन करवाया, तो फेफड़ों में 80 प्रतिशत तक संक्रमण निकला। इसके बाद वहां से इंदौर ले जाने की सलाह दी।

पिछले वर्ष भी जीती थी बुजुर्गों ने जंग

101 साल के बुजुर्ग संक्रमित पाए गए थे। संभवत: वे देश में सबसे उम्रदराज थे, जो कोरोना से संक्रमित हुए थे। बुजुर्ग लॉकडाउन में घर पर ही रहे। बावजूद वे संक्रमित कैसे हुए, यह पता नहीं चल पाया था। पेट दर्द की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जांच करवाने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। परिवार के बाकी 17 सदस्यों को घर पर ही क्वारैंटाइन किया गया था। कुछ दिनों बाद 101 साल की महिला ने भी कोरोना को मात दी थी।

95 साल की दादी ने कोरोना से जंग जीती

95 वर्षीय बुजुर्ग ने इस उम्र में कोरोना को हरा दिया था। 11 दिन चले इलाज के बाद वे स्वस्थ होकर अब घर में हैं। नेहरू नगर निवासी पोता बहू दीपा बताती हैं, परदादी के दूसरे नंबर के बेटे व मेरे ससुर की 2 अप्रैल को पसलियों में दर्द हुआ, तो अस्पताल ले गए। एक्स-रे में फेफड़ों में कफ निकला, तो दूसरे अस्पताल जाने के लिए कहा गया था।

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