REWA : रीवा मेडिकल अस्पताल में कोरोना मरीजों से दुर्व्यवहार: अस्पताल से दो भाइयों को भगाया : पढ़िए पूरा मामला


रीवा मेडिकल अस्पताल में कोरोना संक्रमित दो भाइयों के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। मरीजों को रामनगर से रीवा मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन यहां इलाज तो मिला नहीं, बल्कि दुर्व्यवहार कर भगा दिया गया। रात भर भूख से तड़पते पीड़ित बस में सवार होकर पुन: रामनगर पहुंचे। यहां बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें एक स्वास्थ्यकर्मी ने बाइक पर बैठाकर दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया।

मामले की जानकारी बीएमओ रामनगर को लगी, तो उन्होंने कलेक्टर और प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल से शिकायत की। उन्होंने एसएस मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनोज इंदुलकर को बताया। इसके बाद उन्हें दोबारा रेफर करने की बात कही गई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर मरीजों को दोबारा मेडिकल अस्पताल भेजा गया। वापस रीवा मेडिकल अस्पताल आने के बाद भी शाम 7 बजे तक मरीजों को भर्ती नहीं किया गया।

असल में, सतना जिले के रामनगर ब्लॉक में रहने वाले एक परिवार के चार लोग संक्रमित हैं। सभी सदस्य होम क्वारंटाइन थे। मंगलवार दोपहर दो भाइयों की तबियत खराब हो गई। उन्हें रामनगर के कोविड सेंटर में भर्ती कराया गया। शाम तक सुधार नहीं हुआ, तो बीएमओ के निर्देश पर रीवा मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया। जहां एंबुलेंस के चालक ने भर्ती की प्रक्रिया कराई। इसके बाद पूरी रात गुजरने के बाद भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया। किसी भी स्वास्थ्यकर्मी और अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। वे भूखे प्यासे तड़पते रहे। ऊपर से मेडिकल स्टाफ ने कहा कि सड़क पर पड़े मिले थे। इनको वापस भगाओ।

अस्पताल से बस स्टैंड पैदल, फिर बस में लिफ्ट लेकर रामनगर पहुंचे

कोरोना संक्रमितों का आरोप है, करीब 14 घंटे तड़पने के बाद जब रामनगर के अस्पताल पहुंचे, तो जान में जान आई। हमको अब यहीं भर्ती रहना है। भले ही मर जाएं, अब रीवा नहीं जाएंगे। क्योंकि पूरी रात न भोजन और मिला न पानी। इलाज के नाम पर जलील कर भगा दिया गया। मेडिकल कॉलेज से बस स्टैंड तक पैदल और फिर यात्री बस में लिफ्ट लेकर रीवा से गोविंदगढ बाया जिगना होकर पुन: रामनगर पहुंचे। जहां एक स्वास्थ्यकर्मी ने दोनों को सड़क से उठाकर बाइक में बैठाया। फिर पुन: रामनगर में भर्ती कराया।

प्रशासन के दावों की खुद डॉक्टरों ने खोली पोल

दावा किया जा रहा है, रामनगर बीएमओ को जब मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने सीएमएचओ, कलेक्टर समेत प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल को अवगत कराया। कहा- मेडिकल कॉलेज अकेले रीवा के लिए नहीं है, बल्कि सतना के लिए आईसीयू से लेकर वेंटीलेटर तक आरक्षित हैं। बावजूद रीवा के चिकित्सकों ने रेफर मरीज का इलाज नहीं किया। ऊपर से दुर्व्यवहार कर भगा दिए, जबकि उनकी यह ड्यूटी है। उनको जनता के इलाज के लिए ही रखा गया है। ​ऐसे में प्रभारी मंत्री और कलेक्टर ने डीन से बात कर पुन: रेफर कराया है।

इलाज नहीं मिला तो और सीरियस

कोरोना संक्रमित मरीज जब रामनगर से रेफर हुए थे, तो 88 ऑक्सीजन लेवल था, लेकिन रीवा से वापस लौटने पर 70-75 SPO2 हो गया था। डॉक्टरों का कहना है, अगर कुछ देर और ऑक्सीजन न मिलती, तो जान भी जा सकती थी। ऐसे में संक्रमित मरीजों को देवराजनगर अस्पताल का एक कर्मचारी सड़क पर पड़े देखा। अस्पताल में भर्ती कराकर ऑक्सीजन दिया, तो स्थिति ठीक हुई।

दो बार रेफर फिर भी नहीं मिला इलाज

कोरोना संक्रमित मरीजों ने मीडिया को बताया, हम लोग पहले ऐसे संक्रमित हैं, जिनको एक अस्पताल में दो बार ​रेफर किया गया है। बावजूद चिकित्सकों का वही रवैया है। दोबारा फिर वे लोग इलाज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में रामनगर अस्पताल में ही मर जाते, तो अच्छा था। वहां ऑक्सीजन से लेकर अन्य सभी सुविधाएं मिल रही थीं। यहां तो डॉक्टर ही मार डालेंगे।

सतना के हिस्से के 70 बेड रिजर्व

बता दें कि ये स्थिति तब है, जब रीवा मेडिकल कॉलेज में सतना के हिस्से के 70 बेड रिजर्व हैं। सतना के हिस्से के वेंटिलेटर, हाई फ्लो आदि रीवा मेडिकल कॉलेज ने तो ले ली, लेकिन इलाज करने से इनकार कर रहे हैं।

सतना जिला अस्पताल में मची चीख पुकार

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम है, दोपहर में सतना जिला अस्पताल में मरीज के परिजन चीख पुकार रहे हैं। कई लोग रो-रोकर अपनी बात रख रहे थे। फिर भी अस्पताल के जिम्मेदार उपचार नहीं कर रहे थे।

मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता

रीवा के सीएमएचओ डॉ. एमएल गुप्ता ने बताया कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा मामला था, तो सतना के सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार अवधिया बोल देते, तो एडमिट करा दिया जाता। ये तो नाॅर्मल प्रक्रिया है। वहीं, प्रभारी मंत्री और कलेक्टर से फोन पर जानकारी की बात पर बोले कि हमारे पास कल से आज तक किसी का फोन नहीं आया।

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