छतरपुर : मामा का अत्याचार : शर्मनाक पुलिस; महिला की डिलेवरी कराने जा रहे पति और भाई पर पुलिस ने बरसाए डंडे

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छतरपुर .जिला प्रशासन के आदेश पर कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए इन दिनों का छतरपुर जिले में कोरोना कर्फ्यू लगाया गया है। जिसमें बीमार लोगों का इलाज कराने, खरीदी केंद्र व विभिन्न विभागों में कार्य करने वालों सहित बस व ट्रेन के माध्यम से आने और जाने वालों को छूट दी गई है।

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लेकिन प्रशासन और पुलिस अपने ही आदेश का पालन नहीं कर रहा है। गुरुवार के साथ ही शुक्रवार को लोगों द्वारा सटीक जानकारी देने के बाद भी प्रशासन ने लोगों पर लाठियां बरसाते हुए मुर्गा बनाया। पुलिस और प्रशासन ने शुक्रवार की शाम छत्रसाल चौराहा पर चैकिंग अभियान लगाते हुए कोरोना कर्फ्यू के दौरान बिना कारण के शहर की सड़कों पर घूम रहे लोगों पर कार्रवाई करते हुए लाठियां बरसाई और कुछ समय के लिए चौराहा पर मुर्गा बनाकर सजा दी। इस दौरान रामपुरा गांव का युवक अपनी गर्भवती पत्नी सीमा सेन को डॉ गायत्री नामदेव को पर्चा दिखाकर जिला अस्पताल की ओर जा रहा था।

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इस दौरान छत्रसाल चौराहा पर छतरपुर नायब तहसीलदार अंजू लोधी महिला पुलिस के साथ चैकिंग कर रही थी। नायब तहसीलदार के कहने पर पुलिस ने बाइक पर सवार होकर अस्पताल की ओर जा रहे महिला के पति और उसके भाई को रोका और पूछताछ की। इस दौरान युवक ने डॉक्टर द्वारा दिए गए पर्चे को दिखाया, पर अधिकारी नहीं माने और लाठियां चला दी। इसके बाद दोनों युवकों को चौराहा पर कुछ समय के लिए मुर्गा बनाया गया। जब एसपी सचिन शर्मा को इस बात की जानकारी लगी तब उन्होंने दोनों युवकों को वहां से जाने दिया।

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इसी प्रकार शुक्रवार की शाम किशोरी अहिरवार, जानकी यादव और महेंद्र प्रजापति सागर रोड पर पूरे दिन मजदूरी करने के बाद छत्रसाल चौराहा से होते हुए पन्ना रोड की ओर अपने घर जा रहे थे। इस दौरान चौराहा पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इनकों रोका और लाठियां चलाते हुए मुर्गा बना दिया। इस दौरान यह मजदूर काम से घर की ओर लौटने की बात बताते रहे, पर किसी ने भी इन मजदूरों की बात नहीं सुनी। इसी तरह गुरुवार को पुलिस के अधिकारियों ने बैंक कर्मियों के वाहन को रोकते हुए मुर्गा बनाते हुए सजा दी। यदि पुलिस व प्रशासन के अधिकारी ही आम लोगों के साथ इस प्रकार का बर्ताव करेंगे तो पीड़ित न्याय के लिए किसके पास जाएंगे।

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