MP : सावधान रहें... क्योंकि अस्पताल ही नहीं मुक्तिधाम में भी करना पड़ रहा इंतजार

इंदौर। कोरोना के कारण शहर में हालात कितने बिगड़ चुके हैं, इसका अनुमान आप इसी से लगा सकते हैं कि इन दिनों शहर के अस्पतालों में ही नहीं, बल्कि मुक्तिधामों में भी लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। बीमारी से जंग हारे लोगों के शवों की अंत्येष्टि करने के लिए मुक्तिधाम पर भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। मुक्तिधाम में तैनात कर्मचारी इनका हिसाब रखते-रखते परेशान हैं। फरवरी के मुकाबले मार्च में डेढ़ गुना से ज्यादा शव मुक्तिधाम पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या उनकी है जिनका किसी न किसी अस्पताल में कोरोना का इलाज चल रहा था। इसके बावजूद ये मौतें स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोजाना देर रात जारी किए जाने वाले मेडिकल बुलेटिन में शामिल नहीं हैं। मुक्तिधाम के कर्मचारी भी मानते हैं कि पिछले 15 दिनों से शवों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। नईदुनिया ने शहर के मुक्तिधामों का जायजा लिया तो इस बात की पुष्टि हुई कि मात्र अस्पताल ही नहीं, इन दिनों मुक्तिधाम में भी इंतजार करना मजबूरी है।

15 दिन से बिगड़े हैं हालात

रामबाग और पंचकुइया मुक्तिधाम दोनों जगह तैनात कर्मचारी मानते हैं कि 15 दिन से हालात बिगड़ गए हैं। पंचकुइया मुक्तिधाम पर तैनात सदाशिव बताते हैं कि सामान्य दिनों में 7-8 शव आते हैं, लेकिन इन दिनों 15-20 शव रोजाना पहुंच रहे हैं। रोजाना 5-6 संक्रमितों का अंतिम संस्कार भी हो रहा है। लगभग ऐसे ही हालात रामबाग मुक्तिधाम के भी हैं। यहां तैनात गणेश गौड़ के अनुसार पिछले आठ दिनों से अचानक शवों की संख्या बढ़ गई है। दो-तीन कोरोना संक्रमितों के शव रोज पहुंच रहे हैं।

मेघदूत मुक्तिधाम : 188 में से 48 की मौत कोरोना से

शहर के पूर्वी क्षेत्र स्थित मेघदूत मुक्तिधाम में फरवरी के मुकाबले दाह संस्कार के लिए आए शव का आंकड़ा अचानक बढ़ गया है। फरवरी में जहां 135 शव दाह संस्कार के लिए आए थे, वहीं मार्च में यह संख्या 188 हो गई है। दाह संस्कार के लिए फरवरी में आए शवों में पांच की मौत का कारण कोरोना बना था जबकि मार्च में 48 की मौत कोरोना से हुई है। मुक्तिधाम के रजिस्टर में मार्च की तरह जनवरी में कोरोना से मरने वालों की संख्या चौंकाने वाली है। जनवरी में भी 181 दाह संस्कार के लिए आए शवों में 27 कोरोना पाजिटिव थे।

मालवा मिल श्मशान घाट : फरवरी में 140 तो मार्च में 201 शव लाए गए

शहर के श्रमिक क्षेत्र में स्थित मालवा मिल श्मशान घाट में पिछले 15 दिनों में शवों की संख्या में इजाफा हो गया है। यहां फरवरी में दाह संस्कार के लिए 140 तो मार्च में 201 शव लाए गए। मार्च में दाह संस्कार के लिए लाए गए शवों में कोरोना मरीजों की संख्या 19 है। श्मशान घाट के कार्यों से जुड़े लोगों की मानें तो उनका कहना है कि आम दिनों में चार-पांच शव दाह संस्कार के लिए आते हैं, लेकिन पिछले 15 दिनों में यह 7 से 10 के बीच हो गई है।

फरीदाबाग कब्रस्तान खजराना : फरवरी के मुकाबले मार्च में बढ़ा मौतों का आंकड़ा

शहर में कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में पिछले साल फरीदाबाग कब्रस्तान में शवों को बड़ी संख्या में दफनाने के लिए लाया गया था। इस कब्रस्तान में मार्च माह में एक-दो मरने वालों को हर दिन सुपर्दे खाक करने लाया जा रहा है। मार्च में यहां 32 शवों को दफनाया गया। इनमें कोई भी मौत कोरोना से नहीं बताई गई। हालांकि रजिस्टर्ड में दो मौतें निमोनिया से होना दर्ज हैं। फरवरी में 19 शवों को दफनाया गया। फरवरी और मार्च के आंकड़ों में मरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी स्पष्ट हो रही है।

जूनी इंदौर मुक्तिधाम : महीनेभर में दोगुने पहुंचे शव

संक्रमण बढ़ने के साथ ही कोरोना से मौतें होने लगी है। जूनी इंदौर मुक्तिधाम में 55 शवों का फरवरी में अंतिम संस्कार किया गया। महीनेभर में यह आंकड़ा दोगुना पार पहुंच गया। 31 मार्च तक कुल 116 शवों का दाह संस्कार हुआ, जिसमें मुक्तिधाम के रजिस्ट्रर में अकेले कोरोना से मरने वालों की संख्या 22 दर्ज की गई है। शमशान की व्यवस्था देख रहे बबलू का कहना है कि फरवरी के भीतर कोरोना से मरने वालों का भी अंतिम संस्कार हुआ है। मगर मुक्तिधाम के रजिस्ट्रर में आंकड़ों को अलग से दर्शाया नहीं गया है। वैसे पांच से छह मौते हो सकती है, क्योंकि फरवरी माह में स्वजन ने मरने वाले व्यक्ति की मौत का कारण में कोरोना का जिक्र बहुत कम किया है। अस्पताल से सीधे शव नहीं आए थे, जबकि मार्च में कोरोना से मरने वालों को पूरी सुरक्षा के साथ अंतिम संस्कार के लिए लाया जा रहा है। इसके लिए इनकी पहचान आसानी से हो रही है।

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