MP : शिवराज कैबिनेट में बड़ा फैसला : प्रदेश में 1 मई से 18 वर्ष के ऊपर के लोगों का नि:शुल्क लगेगी वैक्सीन

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भोपाल। शिवराज कैबिनेट ने फैसला लिया है, 1 मई से 18 वर्ष के ऊपर के लोगों का टीकाकरण निशुल्क किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडवा, शिवपुरी, उज्जैन और सिवनी जिलों में ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो गया है। जबलपुर का ऑक्सीजन प्लांट के आज से शुरू होने की संभावना है। यहां इंस्टाॅलेशन का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा रतलाम, मंदसौर और मुरैना जिले में प्लांट एक दो दिन में शुरू होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने कहा, मध्यप्रदेश में मजदूर को काम देने की व्यवस्था की गई है। उनको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। वर्तमान में मनरेगा में 21 लाख मजदूरों को काम दिया जा चुका है। उन्हें मप्र से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। उन्हें सरकार 3 माह का मुफ्त राशन उपलब्ध करा रही है।

मध्यप्रदेश में कोरोना के 13 हजार से ज्यादा नए केस मिले हैं। इसी के साथ प्रदेश में अब एक्टिव केस की संख्या भी 82 हजार से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में सरकार अब कुछ और सख्त कदम उठा सकती है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। उधर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद भी सीएम हाउस पहुंचे। दोनों नेताओं की मुख्यमंत्री के साथ बैठक की।

सरकार के सूत्रों का कहना है, प्रदेश में संक्रमण दर 24% पहुंच गई है। अप्रैल महीने के 20 दिनों में 774 मौतें हो चुकी हैं। यही वजह है कि सरकार अब ज्यादा सख्ती करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है, बैठक में मंत्रियों से उन शहरों में टोटल लॉकडाउन लगाने पर चर्चा कर सकते हैं, जहां संक्रमण की रफ्तार बढ़ती जा रही है।

बता दें, एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लॉकडाउन अंतिम विकल्प है, लेकिन मध्यप्रदेश में अगले चार दिन में एक्टिव केस 1 लाख होने का अनुमान है, ऐसे में सरकार अब सख्त निर्णय ले सकती है। दरअसल, प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी हो रही है।

इससे पहले मंगलवार को नई गाइडलाइन जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि आवश्यक सेवाएं देने वाले कार्यालयों को छोड़कर केंद्र और राज्य के सभी दफ्तरों में 10% कर्मचारी ही उपस्थित रहेंगे। यह नियम IT, BPO और मोबाइल कंपनियों के ऑफिस में भी लागू किया गया है। इससे पहले 12 अप्रैल के आदेश के मुताबिक सरकारी कार्यालयों में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की उपस्थिति 25% की गई थी।

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