कोरोना के नए स्ट्रैन : वायरस फेफड़ों को तेजी से कर रहें संक्रमित; बाहर से शरीर फिट, भीतर वायरस कर देता है फेफड़ों को खोखला

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केस एक : पूर्वी क्षेत्र के एक थाना प्रभारी रोज कसरत करते हैं। उम्र 42 साल। बुखार आया तो जांच कराई, पाजीविट रिपोर्ट आने पर चेस्ट स्कैन कराया तो फेफड़ों में 40 फीसद संक्रमण मिला, जबकि उन्हें सांस लेने में ज्यादा दिक्कत नहीं थी।

केस दो : बख्तावर राम नगर निवासी एक इंजीनियर को सांस लेने में दिक्कत हुई। उससे पहले वे तीन दिन से होम आइसोलेट होकर उपचार करा रहे थे। चेस्ट स्कैन में 35 फीसद संक्रमण आया तो निजी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। अब आक्सीजन लगाई जा रही है।

केस तीन : राऊ निवासी 40 साल के किसान कोरोना से संक्रमित हो गए। तीन दिन तक तबीयत सामान्य रही, लेकिन चौथे दिन सीना भारी होने लगा। चेस्ट स्कैन में संक्रमण 40 फीसद से ज्यादा हो गया। भंवरकुआ क्षेत्र के एक छोटे नर्सिंग होम में भर्ती किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।

ये कुछ ऐसे केस हैं जो कोरोना के नए स्ट्रैन के संक्रमितों के शरीर पर दबे पांव होने वाले असर को बता रहे है। रोगी बाहर से फिट दिखते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर वायरस फेफड़ों को क्षतिग्रस्त कर देता है। इस बार वायरस फेफड़ों को इतनी तेजी से संक्रमित कर रहा है कि मरीज को संभलने का मौका ही नहीं मिल रहा। फेफड़े खराब होने के लक्षण भी संक्रमित जल्दी महसूस नहीं कर पा रहे है। बोलते समय दम भरने या चलते समय सांसे फूलने के बाद डाक्टर जब चेस्ट स्कैन करवा रहे है तब पता चल रहा है फेफड़े 20 से 40 फीसद तक संक्रमित हो चुके है।

कोविड मरीजों का इलाज करने वाले डा. अशोक सेठिया का कहना है वायरस के इस असर को 'हैप्पी हाइपोक्सिया' कहा जाता है, यानी उनके शरीर में कोई तकलीफ नहीं होती, लेकिन आक्सीजन की कमी शुरू हो जाती है। आक्सीजन का सैचुरेशन 95 रहता है। आक्सीजन की कमी जांचने के लिए छह मिनट पैदल चलाने के पहले और बाद में आक्सीमीटर से आक्सीजन का स्तर देखना चाहिए। पैदल चलने के बाद पांच पाइंट से ज्यादा कमी नजर आ रही है तो यह न्यूमोनिया का संकेत है। इसके बाद डाक्टर की सलाह से चेस्ट स्कैन कराना चाहिए।

भूख नहीं लगती थी

20 फीसद आक्सीजन होने के बाद ठीक हो चुके उषा नगर निवासी युवक ने कहा संक्रमण का पता चलने के बाद उन्होंने कुछ स्वजनों की सलाह पर खुद ही चेस्ट स्कैन कराया तो 20 फीसद संक्रमण का पता चला। एमआइजी क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति शनिवार को अरबिंदो अस्पताल में भर्ती हुए। चार दिन पहले वे पाजीटिव पाए गए थे। डाक्टर ने गोलियां देकर घर पर ही आराम करने के लिए कहा था। एक अन्य चिकित्सक रिश्तेदर की सलाह पर चेस्ट स्कैन कराया तो संक्रमण 35 फीसद निकला। वे बताते है कि इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि फेफड़े इतने संक्रमित हो चुके है, क्योकि न बातचीत करने में कोई परेशानी है और न चलने फिरने में।

इन बातों का ध्यान रखें

कोविड रिपोर्ट पाजीटिव आने के तत्काल बाद मन से सिटी स्कैन न कराए। डाक्टर की सलाह लें। एक-दो दिन रुककर जांच कराने से फेफड़ों में संक्रमण की सही स्थिति पता चलती है। कई बार शुरूआत में संक्रमण कम रहता है और रोगी चेस्ट स्कैन करा कर निश्चित हो जाते है कि उन्हें कम संक्रमण है।

होम आइसोलेट भी है तो कमरे में चलना-फिरना जारी रखे, ताकि फेफड़ों पर दबाव पड़ने से कई बार दम फूलने, सांस में परेशानी होने से संकेत मिल जाते है कि फेफड़ों में कुछ गड़बड़ है।

हालत सामान्य लगे, तब भी दिन में पांच बार आक्सीजन का स्तर जरुर नापे। संक्रमण के पांच दिन तक आक्सीजन स्तर पर नजर रखे।

फेफड़े ज्यादा जल्दी संक्रमित हो रहे है

कोरोना का नए स्ट्रैन में वायरस फेफड़ों को तेजी से संक्रमित कर रहे है, लेकिन सही समय पर इलाज से संक्रमण कम भी हो रहा है। 60 से 70 फीसद तक संक्रमित फेफड़ों वाले रोगी ठीक भी हो रहे है।

डा. रवि दोशी, अरविंदो अस्पताल


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