REWA : कैदी की हुई मौत; चिकित्सकों ने कोरोना संक्रमित बताकर शव देने से किया इनकार, घंटो मचा बवाल : स्वजनों का आरोप ....

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा। पांच दिन पूर्व केंद्रीय जेल ले जाये गये बंदी माथुरा साकेत निवासी गोरगांव थाना रायपुर कर्चुलियान की गुरूवार को मौत हो गई। अस्पताल शव लेने पहुंचे स्वजन उस समय भड़क गये, जब उन्हें शव देने से पुलिस ने इंकार कर दिया। स्वजनों द्वारा किए जा रहे तालाबंदी की सूचना जैसे ही पुलिस अधीक्षक रीवा को लगी उन्होंने अस्पताल परिसर में और ज्यादा बल भेज दिया। लगातार दी जा रही समझाइश के बाद तकरीबन 2 घंटे बाद स्वजन मानने को तैयार हुई। जिसके पास शव के अंतिम संस्कार के लिए नगर निगम को सूचना दी गई।

अस्पताल गेट पर किया तालाबंदी

मृतक के स्वजनों ने अस्पताल गेट पर तालाबंदी करके शव की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुचे अधिकारियों ने समझाइस दी कि कोरोना गाइड लाइन के तहत शव का अंतिम संस्कार प्रशासन द्वारा करवाया जायेगा और शव को प्रशासन के लोग ले गये।

मारपीट के आरोप में किया गया था गिरफ्तार

बताया जा रहा है कि मारपीट के आरोप में मथुरा को रायपुर कर्चुलियान थाना की पुलिस ने 24 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। उसे 25 अप्रैल को केन्द्रीय जेल भेजा और जेल में तबियत खराब होने के बाद उसकी मौत हो गई।

आरोप पर एक नजर

स्वजनों का आरोप है कि पुलिस तथा जेल प्रशासन ने उसके साथ बेदम मारपीट की है। जिसके चलते वह दम तोड़ दिया। मृतक परिवार पक्ष के अधिवक्ता ने पूरे मामले में संदेह व्यक्त करते हुए मजिस्ट्रेयिल जांच की मांग भी की है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि जब मथुरा साकेत को रायपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था उस समय मथुरा की कोरोना वायरस की जांच कराई गई थी। जो कि नेगेटिव पाई गई थी अब मौत हो जाने के बाद पुलिस कोरोनावायरस से मौत बता रही है जो की जांच का विषय है।

जेल प्रशासन पर यह भी आरोप

मृतक मथुरा साकेत के भाई राम भरोसे ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय जेल रीवा में जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 5000 रुपये महीने जेल प्रबंधन को देने पड़ते हैं। अगर वह नहीं देता है तो उसके साथ में केवल मारपीट की जाती है बल्कि जेल के अंदर उससे काम कराया जाता है मथुरा साकेत की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर से लिहाजा वह पैसे नहीं दे सका जिसके कारण उसके साथ मारपीट की गई और उसकी मौत हो गई है। यह पूछे जाने पर कि रुपये कौन लेता है तो उन्होंने बताया कि जिन कैदियों को आजीवन कारावास की सजा पड़ चुकी है वह बैरिक का ठेका ले लेते हैं उनके द्वारा वसूली की जाती है अधिकतर जेल के अंदर काले कलर का कुर्ता एवं सफेद पजामा पहन कर ड्यूटी करते हैं साथ ही उन्हें लंबरदार के नाम से पुकारा जाता है।


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