REWA : देश ​के लिए नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए थे पिता; बेटे ने चाचा के घर फांसी लगाकर किया सुसाइड : जानिए पूरा मामला

रीवा। जिले के गढ़ थाना अंतर्गत क्योंटी गांव निवासी 2006 में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान के बेटे ने डिप्रेशन में आकर बीते दिन सुसाइड कर लिया है। हालांकि परिजन अनुकंपा नियुक्त न मिलने पर आत्महत्या का कारण बताया है। वहीं लालगांव चौकी पुलिस बुरी आदतों के कारण आत्महत्या का मामला बता रही है। ग्रामीणों की सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने युवक के शव का फंदा से उतार कर पीएम के लिए सिरमौर अस्पताल भेजा था। जहां परिजनों की मौजूदगी में पीएम उपरांत शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

2006 में पिता हुए थे शहीद

बता दें कि वर्ष 2006 में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान उमेश शुक्ला का परिवार पहले गांव में रहता था। लेकिन बेटा-बेटी की पढ़ाई के लिए मां इंदौर चली गई। परिजनों का कहना है कि वह कुछ समय से हताश था कि पिता की मौत के बाद परिवार में किसी सदस्य को नौकरी नहीं मिली। तो अब आगे का खर्च कैसे चलेगा। इसको लेकर वह चर्चा कर रहा था। हालांकि मां को सीआरपीएफ की ओर से पेंशन मिल रही थी। जिससे घर का खर्चा चल रहा था। वहीं मध्यप्रदेश सरकार की ओर से रीवा में हाउसिंग बोर्ड का मकान भी दे दिया गया था। अनुकंपा नियुक्ती की शिकायत पर एमपी सरकार का कहना था कि शहीद की नौकरी केन्द्र सरकार के अधीन थी और वे शहीद छत्तीसगढ़ में हुए थे। इसलिए राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अभिषेक की अनुकंपा नियुक्त का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ में पेंडिग था। क्योंकि अनुकंपा नियुक्त के लिए 10वीं पास जरूरी होता है। जबकि अभिषेक 10वीं पास नहीं हो पाया। इसलिए इसका मामला पेंडिग होता चला गया।

क्या है मामला

लालगांव चौकी प्रभारी उप​ निरीक्षक संजीव शर्मा ने बताया कि अभिषेक शुक्ला पिता स्वर्गीय उमेश प्रसाद शुक्ला 22 वर्ष निवासी क्योंटी एक सप्ताह पहले इंदौर से गांव आया था। जहां उसने 16 अप्रैल को अपने चाचा के घर में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। ग्रामीणों की सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से उतार कर पीएम के लिए सिरमौर अस्पताल की मर्चुरी में रखाया था। दूसरे दिन जब मां और बहन इंदौर से सिरमौर पहुंची तो पीएम कराने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि वह अपनी मां और बहन के साथ चार पांच साल से इंदौर में रहकर पढ़ाई करता था। लेकिन अभिषेक का पढ़ाई की ओर ध्यान नहीं रहा। जबकि बहन पढ़ने में होनहार थी। ऐसे में मां बेटे और बेटी को इंदौर में साथ में रखकर पढ़ाई के लिए लगातार प्रेरित करती रही। पर अभिषेक उम्र के साथ लापरवाह होता गया। जो एक सप्ताह पहले गांव चला आया और बुरी आदतों के चलते पैसा खत्म हो गया। जिससे वह डिप्रेशन में आकर खुदकुशी कर ली।

श्रद्धा सम्मान निधि नहीं मिली आज तक

शहीद की पत्नी सरोज शुक्ला अपने भाई रामउजागर पाण्डेय के साथ बीते कई वर्षों से न्याय के लिए जगह-जगह भटक रहीं है। सरकार की तकनीकी लापरवाही की वजह से अब तक उक्त परिवार को श्रद्धा सम्मान निधि एवं अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिला था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब होती जा रही थी। कुछ समय पहले ही मध्यप्रदेश सरकार ने रीवा में एक आवास जरूर दिया है, शेष सुविधाएं छत्तीसगढ़ सरकार से लेने की बात कही है। शहीद का परिवार मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार के साथ केन्द्र सरकार के फेर में उलझा हुआ है। हर कोई अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए परिवार को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेज रहा है।

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