SAGAR : मरीज की मौत के बाद पाॅजिटिव-निगेटिव के खेल से फैला रहा डर : खौफ ऐसा कि बेटा भी भूला फर्ज, पिता की अस्थियां ले जाने से इनकार

 

SAGAR : मरीज की मौत के बाद पाॅजिटिव-निगेटिव के खेल से फैला रहा डर : खौफ ऐसा कि बेटा भी भूला फर्ज, पिता की अस्थियां ले जाने से इनकार

कोरोना त्रासदी का असर अस्पतालों के बाद अब मुक्तिधामों पर दिखाई देने लगा है। मौत के बाद प्रशासन और बीएमसी अस्पताल प्रबंधन द्वारा रिपोर्ट के पॉजिटव और निगेटिव को लेकर चल रही आंकड़ेबाजी की हकीकत मुक्तिधामों में साफ दिखाई दे जाती है। शहर में शायद ही कोई ऐसा श्मशान (मुक्तिधाम) बाकी है, जहां प्रतिदिन पार्थिव देह नहीं आ रही हो। डर का आलम यह है कि कुछ लोग तो अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी अस्थियां तक लेने नहीं पहुंचे।

शहर के सबसे बड़े नरयावली नाका मुक्तिधाम में शुक्रवार सुबह 10 से 11.30 बजे के बीच 3 कोरोना पॉजिटिव और 5 सामान्य लोगों के पार्थिव देह लाई गई। इस मुक्तिधाम में कोरोना मरीजों की मौत के बाद विद्युत शवदाह गृह से उनका अंतिम संस्कार किया जाता है। शुक्रवार सुबह से ही एक के बाद एक शवों को लाने का सिलसिला चलता रहा। विद्युत शवदाह गृह में 1 शव के अंतिम संस्कार में 90 मिनट से ज्यादा का समय लगने के कारण मजबूरन 2 कोविड मरीजों के शवों को नगर निगम ने लकड़ी से अंतिम संस्कार कराया।

15 दिन में 69 लोगों का अंतिम संस्कार

नरयावली नाका मुक्तिधाम में रोजाना औसतन 10 से 14 लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जबकि शुक्रवार (16 अप्रैल) को सुबह से शाम तक 6 पॉजिटव और 7 सामान्य लोगों के पार्थिव देह मुक्तिधाम पहुंची। 1 अप्रैल से 16 अप्रैल तक 82 लोगों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। जबकि मार्च 2021 में 85 शव 30 दिनों में लाए गए।

बेटे और कर्मचारी के बीच इस तरह हुई बात

मुक्तिधाम में देख-रेख करने वाले कर्मचारी रिंकू ने फोन लगाकर अस्थियां ले जाने को कहा तो जवाब आया- मैं नहीं आ सकता

कर्मचारी : शाहगढ़ से बोले रहे हैं आप अस्थियां उठाने नहीं आए?

व्यक्ति : नहीं उठाने नहीं आ रहा।

कर्मचारी : साहब कारण क्या है?

व्यक्ति :जो हमारे साथ आए थे वो शाहगढ़ चले गए, उनकी तबीयत खराब है।

कर्मचारी : कोविड के शव आ रहे हैं, जब तक आप अस्थियां नहीं उठाएंगे? तब तक हम शवों का अंतिम संस्कार नहीं कर नहीं कर पाएंगे।

व्यक्ति : हम सुबह आए थे, थोड़ी सी अस्थियां ले गए?

कर्मचारी : अगर आप आए थे तो हम कर्मचारी दे देते। आप सारी अस्थियां उठा ले जाते। अब इसका क्या करें?

व्यक्ति :आप अपने हिसाब से देख लें, मैं नहीं आ पाऊंगा।

कर्मचारी : पहले हम सूचना देते हैं कि आपके पिताजी हैं अस्थियां पड़ी हुई हैं उठा ले जाए? इसलिए फोन किया।

व्यक्ति : भैया जो भी व्यवस्था बने करवा लें आप।


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