इनके जज्बे को सलाम/ शहडोल मेडिकल कॉलेज में अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा की मां आईसीयू में, पत्नी घर पर आइसोलेशन फिर भी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को संभालने में जुटे

शहडोल .कोरोना के कहर के बीच प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। ऐसे ही अधिकारी हैं शहडोल मेडिकल कॉलेज में अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा। अर्पित 18 अप्रैल से प्रशासनिक दृष्टिकोण से व्यवस्था देख रहे हैं। खास बात है कि तमाम घरेलू मुश्किलों को किनारे कर वह अपने काम में लगे हुए हैँ। असल में, उनकी मां संक्रमित होने के बाद शहडोल मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में एडमिट हैँ। वहीं, पत्नी भी संक्रमित हो गई हैं। वह घर में आइसोलेट हैं।

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18 अप्रैल को शहडोल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ऑक्सीजन का प्रेशर कम होने से करीब एक दर्जन मरीजों की जान चली गई थी। अस्पताल में बेहतर प्रबंधन के साथ ही गुस्साए परिजनों को शांत करवाने की बारी आई, तो अर्पित हर मोर्चे पर डटे रहे।

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अर्पित बताते हैं, शहडोल मेडिकल कॉलेज में भर्ती हर मरीज को वे अपने परिजनों की तरह की देखते हैं। मरीजों के दर्ज का अहसास उन्हें भी है। उनका कहना है, अस्पताल में आदिवासी अंचल में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज में उम्मीद की रोशनी लेकर आती है। ऐसे में हमारी जवाबदारी है, इस संस्थान के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। यहां भर्ती हर मरीज को लेकर उनमें मन में अहसास अपनों की तरह ही है।

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सेवा का रास्ता चुना, अपनाई सरकारी नौकरी

आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग और आईआईएम कोलकाता से प्रबंधन की शिक्षा लेने वाले आईएएस अर्पित वर्मा ने निजी कंपनी में वेतन का बड़ा पैकेज छोड़कर सेवा का रास्ता अपनाया। उनका कहना है, कोविड-19 संक्रमण का यह चुनौती भरा समय है। ऐसे में जरूरी है, ज्यादा से ज्यादा लोगोंं की परेशानी कम की जाए, उनकी जिंदगी बचाई जाए।

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