INDORE CORONA UPDATE : इंदौर में गंभीर मरीजों का इलाज घर पर, बढ़ा मौत का आंकड़ा

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इंदौर। केस- 1 : व्यासखेड़ी में रहने वाले युवक जीवन चौधरी को कोरोना हो गया। भाई उसे लेकर शहर के अस्पतालों में भटका, कहीं इलाज नहीं मिला। थक हारकर घर लौट गया। दो दिन बाद उसकी मौत हो गई।

केस- 2 : कुमेडी के आक्सीजन प्लांट पर देवास से दोपहिया वाहन पर धर्मेंद्र वर्मा सिलिंडर लेने आए थे। उन्होंने बताया पिताजी को कोरोना हो गया है। सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं है। निजी अस्पताल में इलाज के लिए पैसा नहीं है, न ही कोई भर्ती कर रहा है। हम तो घर पर ही इलाज कर रहे हैं। पिताजी को सांस लेने में तकलीफ आ रही है, इसलिए घर पर ही आक्सीजन देंगे।

केस-3 : स्कीम-54 में रहने वाली साधना शुक्ला ने बताया उनके पति को कोरोना संक्रमण हो गया था। एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराने पहुंचे तो गेट पर ही एक कर्मचारी ने लिस्ट में नाम लिख लिया और कहा अभी बेड खाली नहीं है। जैसे ही खाली होगा आपके पास फोन आ जाएगा। तब तक घर पर ही रोगी को रखें।

ये तो कुछ उदाहरण हैं। ऐसे हजारों लोग हैं, जिनके परिवार में कोरोना संक्रमण के कारण स्वजन की स्थिति गंभीर है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए अस्पतालों में आक्सीजन बेड या आइसीयू नहीं मिल रहे हैं। मजबूरी में वे घर पर रहकर ही इलाज करा रहे हैं। शहर में 70 से ज्यादा अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों का इलाज हो रहा है। कई छोटे नर्सिंग होम में कोरोना पेशेंट भर्ती किए जा रहे हैं, लेकिन 95 प्रतिशत आक्सीजन बेड और आइसीयू बेड भरे हुए हैं। घरों पर इलाज करा रहे गंभीर मरीजों के लिए स्वजन जैसे-तैसे आक्सीजन की व्यवस्था तो कर रहे हैं, लेकिन संक्रमण कम करने के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

घरों में हो रही ज्यादातर मौतें : शहर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने के बाद मौतों का सिलसिला भी बढ़ गया है। बीते 20 दिनों में शहर के मुक्तिधामों में 500 से ज्यादा शव अंत्येष्टि के लिए आ चुके हैं। हालांकि, बाहरी जिलों से इलाज के लिए आने वाले लोगों की अंत्येष्टि भी इन दिनों शहर में हो रही है। इस कारण भी आंकड़ा बढ़ा है, लेकिन बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण कोरोना संदिग्धों की मौत भी घरों पर हो रही है और ऐसी मौतें सरकारी रिकार्ड में भी शामिल नहीं हो रही है।

पोर्टल पर जानकारी अस्पतालों में खाली बिस्तरों की जानकारी हम सार्थक पोर्टल पर दे रहे हैं। कंट्रोल रूम में भी इसकी जानकारी लगातार दी जा रही है। 

डा. अमित मालाकार, जिला नोडल अधिकारी

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