REWA : मंत्री के रिश्तेदार बताने वाले पूर्व DEO आर.एन.पटेल कब होगे निलंबित : 70 लाख के घोटाले से शिक्षा विभाग में मचा है हड़कंप

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  • 70 लाख के घोटाले में संलिप्त सहायक अध्यापक को अब तक नहीं किया गया निलंबित, एफआईआर हो चुका है दर्ज

  • पूर्व में हुयें करोड़ो रूपये के खरीदी घोटाला "सुपर 151 योजना" की जांच अभी भी है पेंडिग

  • शैक्षणिक गुणवत्ता उन्नयन केन्द्र के माध्यम से होना था वितरित, पूर्व डीईओ आरएन पटेल के पास था प्रभार

रीवा। अनुदान प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के एरियर में 70 लाख के घोटाले में मुख्य भूमिका निभाने वाले सहायक अध्यापक विजय तिवारी नाम सामने आया है। आनन-फानन में उक्त सहायक अध्यापक के नाम सिविल लाइन थाना में धारा 420 का एफआईआर तो दर्ज कर दिया गया हैं किंतु अभी तक निलंबन नहीं किया गया। आखिर इस मेहरबानी की वजह क्या है। क्योंकि लेखापाल अशोक शर्मा एवं अनुदान शाखा प्रभारी अखिलेश तिवारी को पूर्व में ही कलेक्टर द्वारा निलँबित किया जा चुका है। 

बताया गया है कि घोटाले में संलिप्त सहायक अध्यापक विगत 15 वर्षों से अध्ययन अध्यापन कार्य छोड़ डीईओ कार्यालय में ही अपने रिश्तेदार अशोक शर्मा के साथ अटैच रहें। जिसे संकुल प्राचार्य ने भी स्कूल ना आने की खुली छूट दे रखी थी, क्योंकि डीईओ एवं कार्यालय के लिपिकों का प्राचार्य के ऊपर दबाव था।  

उक्त सहायक अध्यापक ने ही अपने सगे संबंधियों के खाते में 70 लाख की राशि का बंदरबांट किया था। बावजूद इसके अभी तक निलंबन ना किया जाना प्रशासनिक कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

वहीं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी आर.एन. पटेल को भी बचाने में पूरे आला अधिकारी लगे हुए है। मात्र रीवा डीईओ के पद से हटाकर खानापूर्ति कर दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व डीईओ आर.एन. पटेल के सगे साले बृजेश पटेल पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निज सचिव रहे हैं उन्हीं की कृपा से इन्हे रीवा डीईओ बनाया गया था, और भाजपा के शासनकाल में भी उनके रिश्तेदार उच्च राजनीतिक पद पर पदस्थ है, यहां तक कि वर्तमान भाजपा सरकार में एक मंत्री के रिश्तेदार भी बताते हैं। 

यही कारण है कि अभी तक डीईओ के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्यवाही प्रस्तावित नहीं की गई जबकि सारी राशि का इन्होंने अपने हस्ताक्षर से ही भुगतान किया है। वही मामले की परत खुलते ही घोटाले की भेजी गई राशि जमा कराने की फिराक की जा रही। नियमानुसार प्रथम दृष्टया दोषी पूर्व डीईओ रामनरेश पटेल, विजय तिवारी तथा जिनके-जिनके खाते में राशि भेजी गई है सभी के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना आवश्यक है। अब देखना यह है कि कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने पर इन दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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