MP : 80 प्रतिशत संक्रमित थे फेफड़े फिर भी 82 वर्ष आयु की लालू बाई ने दी कोरोना को मात बोली - डॉक्टरों की बात मानो, मास्क पहनो

मुरैना(अंबाह) कोरोना ने जहां नवयुवकों तक को नहीं छोड़ा हैं। वहीं एक मामला लालू बाई का सामने आया है। जिनकी उम्र 82 वर्ष है। उनके फेफड़े 80 प्रतिशत तक संक्रमित हो चुके थे। जब अस्पताल में भर्ती किया तो ऑक्सीजन लेवल 75 रह गया था। उसके बावजूद उन्होंने मुरैना जिला चिकित्सालय में लगातार 14 दिन तक रहकर कोरोना सं जंग जीत ली। लालू बाई घर आकर लोगों को नसीहत देते हुए कहती हैं, कि डॉक्टरों की बात मानो, मास्क पहनो, भगवान सब ठीक कर देगा। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने भीषण त्रासदी मचाई हुई है। हर तरफ हाहाकार मचा है। कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। 

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इस बीच क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक 82 साल की एक बुजुर्ग दादी ने मुरैना के सरकारी अस्पताल में रहकर कोरोना को मात दी है। दरअसल, यह मामला नगर की शिवहरे कॉलोनी का है। कोरोना से लड़ाई के बीच यहां से एक राहत भरी खबर सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार अंबाह नगर की लालू बाई पत्नी बदन सिंह अपने नाती आरक्षक हरेंद्र सिंह तोमर के यहां उज्जैन गई हुई थी। उसी दौरान 24 अप्रैल को उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। इसके बाद उनकी जांच कराई गई।

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जांच में वह कोरोना पॉजिटिव आई। तीस अप्रैल को इलाज लेते-लेते उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई। जिसके बाद घरवालों के तमाम प्रयासों के बावजूद भी उन्हें उज्जैन और उसके बाद गवालियर में कहीं भी ऑक्सीजन बैड नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने उन्हें मुरैना के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच के दौरान उनके फेफड़े अस्सी प्रतिशत संक्रमित थे और ऑक्सीजन लेवल 75 था। नाजुक स्थिति में मुरैना जिला अस्पताल के चिकित्सक योगेश तिवारी एवं राघवेंद्र यादव की देखरेख में उनका इलाज हुआ। लगातार 14 दिन जिला अस्पताल में रहने के बाद, अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई और घर भी आ गई है।

लोगों के सामने पेश किया उदाहरण

लालू बाई ने संयम और नियम का पालन करते हुए चिकित्सकों द्वारा बताए गए उपचार को लेते हुए न सिर्फ कोरोना को मात दी है, बल्कि उदाहरण भी पेश किया है। कोरोना से 82 साल की उम्र में लड़ाई जीतने वाली बुजुर्ग दादी अपनी जुबान से लोगों को समझाते हुए कहती हैं, कि डॉक्टरों की बात मानो, मास्क पहनो, भगवान सब ठीक कर देगा।

दादी ने नहीं हारी हिम्मत

दादी के नाती हरेन्द्र सिंह तोमर का कहना है, कि बढ़ती उम्र के बावजूद भी दादी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी मजबूत ताकत से हम सबको लगातार हौसला दिया।

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