REWA : मानवता की मिशाल / कोरोना संकट में रीवा सांसद ने होम आइसोलेशन के 700 रोगियों के घर जाकर दिया संबल

रीवा जिले में कोरोना संक्रमण को रोकने तथा कोरोना पीड़ितों की सहायता के लिये जनप्रतिनिधियों ने खुलकर सहयोग किया है। प्रशासन के प्रयासों में हर कदम पर जनप्रतिनिधियों का पूरा सहयोग मिल रहा है। जिले के विधायकों के सहयोग से 170 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर मशीनें लगाई गई हैं। जिले के सांसद जनार्दन मिश्र ने कोरोना संकट के समय होम आइसोलेशन रोगियों के घर-घर जाकर उन्हें तथा उनके परिवारजनों को सांत्वना एवं संबल देने की मानवीय पहल की है। सांसद ने 700 से अधिक रोगियों के घरों में जाकर उनसे घर के बाहर से ही हालचाल जानने का प्रयास किया। जरूरतमंद परिवारों को सांसद ने दवायें, भोजन, अनाज, फल, सब्जी, दूध तथा अन्य अति आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करायी हैं। सांसद की इस पहल से कोरोना पीड़ित परिवारों को नया संबल मिला है।

रीवा नगर निगम क्षेत्र के होम आइसोलेशन में उपचार करा रहे रोगियों की उपचार व्यवस्था की निगरानी के लिये कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने प्रत्येक वार्ड में जिला स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया है। इन अधिकारियों द्वारा उनके वार्ड में होम आइसोलेशन में रह रहे रोगियों को दवा वितरण तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये प्रतिदिन सम्पर्क करके जानकारी ली जाती है। सांसद ने शहर के अधिकांश वार्डों के नोडल अधिकारियों के साथ कोरोना संक्रमित व्यक्ति के घर जाकर संपर्क किया। इस संबंध में सांसद ने बताया कि कोरोना संकट के कारण कई परिवारों ने तमाम सुविधाओं के बावजूद भोजन तथा दवाओं की आपूर्ति करने वाला कोई व्यक्ति नहीं है। इन परिवारों को नोडल अधिकारियों तथा नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा फल, सब्जी, दूध, भोजन एवं दवायें प्रदान की जा रही हैं। नोडल अधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं नगर निगम के कर्मचारी होम आइसोलेशन के रोगियों की बहुत अच्छी सेवा कर रहे हैं।

सांसद ने बताया कि कोरोना की घातक बीमारी से लोगों में भय व्याप्त है। जिस रोगी में सामान्य लक्षण है उससे भी घर परिवार के लोग डरते हैं। होम आइसोलेशन में भी रोगी को अकेलापन महसूस होता है। जब नोडल अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति होम आइसोलेशन के रोगियों से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क करता है तो रोगी को आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था के साथ बहुत बड़ा मानसिक सहारा भी मिलता है। रीवा जिले में रोगियों के उपचार के लिये पर्याप्त बेड, ऑक्सीजन, दवायें तथा डॉक्टर उपलब्ध हैं। मैंने होम आइसोलेशन के सभी रोगियों को इस बात के लिये आश्वस्त किया कि उनके उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है। लगभग 700 रोगियों से संपर्क के बाद केवल चार रोगियों को ही अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता हुई। अधिकांश रोगी होम आइसोलेशन में ही भले चंगे हो गये हैं।

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