REWA : कोरोना महामारी में स्कूले बंद, फिर भी 12 माह के भ्रमण भत्ता के नाम पर 25 लाख का घोटाला : CEO ने जारी की नोटिस : पढ़िए पूरा मामला

       

जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) रीवा में जनशिक्षकों के नाम पर 25 लाख रूपये के घोटाले का मामला सामने आया हैं। यह तब हुआ जब कोविड-19 महामारी में स्कूले बन्द थी और जनशिक्षक अपने घरो में बैठे हुये थे। लेकिन 12 माह के भ्रमण भत्ता के नाम पर घोटाला किया गया। 

कोविड-19 महामारी के कारण लाॅकडाउन होने से प्रदेश सहित रीवा जिले में भी मार्च 2020 से स्कूले लगातार बन्द हैं। जिसके कारण विद्यालयों में मध्यान भोजन कार्यक्रम भी बन्द पडा हुआ हैं। लेकिन शासन ने वैकल्पिक व्यवस्था बनाते हुये व्यवस्था दी कि खाद्यान वितरण का दायित्व स्वसहायता समूह एवं शाला प्रबंधन समितियों के सौपा गया। इस वितरण कार्य में जनशिक्षकों को कोई भी दाईत्व नही दिया गया लेकिन जिला परियोजना समन्वयक संजय सक्सेना ने बीआरसीसी से साँठ-गाँठ कर भ्रमण भत्ता के नाम पर 25 लाख का घोटाला कर डाला। 



सीईओ को हुई जानकारी तो नोटिस जारी

इस पूरे प्रकारण कि जानकारी मिलते ही सीईओ जिला पंचायत स्पप्रिल वानखेडे ने कार्यवाही के लिसे नोटिस जारी कर जबाब मागां है। नोटिस में  माह अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक कुल 12 माहों का जनशिक्षकों को भ्रमण भत्ता जारी किये जाने हेतु राशि रूपये 2492000.00 की स्वीकृति हेतु प्रस्तावित किया गया, जबकि माह मार्च 2020 से शालाएं कोविड -19 महामारी के कारण लाकडाउन होने से पूर्ण रूप से बंद हो गई थी । तत्पश्चात पूंछे जाने पर आपके द्वारा पुनः अप्रैल 2020 , मई 2020 एवं जून 2020 को छोड़कर संशोधन करते हुए   जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक कुल 09 माहों का जनशिक्षकों को भ्रमण भत्ता जारी किये जाने हेतु राशि रूपये 1885000.00 की स्वीकृति हेतु प्रस्तावित किया गया । जो राशि रुपये 607000.00 का अधिक आवंटन जनपद शिक्षा केन्द्रों में प्रदाय किये जाने का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है । 

अतः कोविड -19 महामारी के शालाएं बंद होने के बाद भी नियम विरुद्ध प्रस्ताव प्रस्तुत कर भ्रमण भत्ता की राशि का आवंटन जनपद शिक्षा केन्द्रों में प्रदाय किये जाने का प्रयास किया गया है । उक्त के संबंध में कार्यालयीन पत्र क्र . 173 दिनांक 24.03.2021 द्वारा विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक जनपद शिक्षा केन्द्र समस्त को कारण बाताओ सूचना पत्र जारी किया गया था । विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक जनपद शिक्षा केन्द्र समस्त द्वारा प्रस्तुत जबाव का  अवलोकन किये जाने पर पाया गया कि सभी जवाव कार्यालय में समान रूप से तैयार कराकर प्रस्तुत किये गये हैं . उनमें किसी प्रकार की भिन्नता नहीं है । विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक के जबाव में संलग्न जिला पंचायत रीवा का पत्र क्र . 6839 / एमडीएम / जि 0 पं 0 / 2020 दिनांक 19.05.2020 के अनुसार खाद्यान्न वितरण का दायित्व स्वसहायता समूहों एवं शाला प्रबंधन समितियों को सौंपा गया था , जनशिक्षक को नहीं । 

इस तरह विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक द्वारा प्रस्तुत उत्तर समाधानकारक नहीं पाया जाता है । इस संबंध में आपके द्वारा प्रस्तुत नस्ती के पृष्ठ क्र . 35 में जबाव के संबंध में किसी भी प्रकार की अनुसंशा भी प्रस्तावित नहीं की गई है , जिससे आपके द्वारा पदीय दायित्वों के निर्वहन में बरती गई घोर लापरवाही एवं उदासीनता की पुष्टि होती है । अतएव आपके द्वारा बरती गई लापरवाही एवं उदासीनता के लिए क्यों न मप्र सिविल सेवा ( वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील ) नियम 1965 के नियम 09 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी की ओर प्रेषित किया जावे । आप जारी कारण बाताओ सूचना पत्र का जाबाव 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत करें । निर्धारित अवधि में समाधानकारक जबाव प्रस्तुत न होने पर आपके विरूद्ध प्रस्तावित कार्यवाही की जावेगी, जिसके लिए आप व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।

DPC रीवा संजय सक्सेना एपीसी एन सिंह के हाथों की कठपुतली बने 

जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केंद्र रीवा के पद पर राज्य स्तर से नियुक्त किए गए संजय सक्सेना से शिक्षा विभाग को ढेर सारी उम्मीदें थी किन्तु यह सारी उम्मीदें अब धरी की धरी रह गई। बताया गया है कि DPC रीवा संजय सक्सेना अपने कार्यालय में पदस्थ एपीसी एन सिंह के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं हालांकि एन. सिंह की प्रतिनियुक्ति वर्षों पूर्व समाप्त हो चुकी है किंतु उन्हें मूल पद स्थापना के लिए ना मुक्त किया जाना भी अपने आप में संदेह को जन्म देता है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लॉकडाउन के चलते अकादमिक गतिविधियाँ तो वैसे ही ठप्प हैं। रूटीन वर्क जिसमें छोटे-मोटे चलने वाले निर्माण तथा रिपेयरिंग के काम एवं कार्यालय स्थापना संबंधी काम भी सामान्य रूप से नहीं हो रहे हैं।

बताया गया हैं कि नए डीपीसी संजय सक्सेना को कार्यालय के कार्यो में उतने रुचि नहीं है जितनी प्रदर्शन करने और प्रदर्शन के बहाने छिपे एजेंडे को साधने की है। ऐसी भी जानकारी है कि पिछले 6 महीने में निर्माण कार्य की प्रगति को लेकर कलेक्टर ने भी नाराजगी जताई हैं।

विकासखंड स्तर पर स्थापित आधार केंद्रों में केंद्रीकृत खरीदी के लग चुके हैं आरोप

जिले के 9 जनपद शिक्षा केंद्रों में स्थापित किए जाने वाले आधार केंद्र मे विकासखंड स्तर पर राशि जारी कर सेटअप बनाया जाना था जिसको डीपीसी द्वारा फाइल में गोलमाल कर केंद्रीकृत तरीके से भारी कमीशन बाजी कर निपटाया गया। डीपीसी के उक्त कृत्य की शिकायत तत्कालीन  सहायक परियोजना समन्वयक वित्त पुष्पराज सिंह ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं कलेक्टर से की थी लेकिन मामले को डीपीसी द्वारा दबा दिया गया।

कलेक्टर द्वारा प्रेषित पत्रों को प्रस्तुत ही नहीं करते डीपीसी

अपनी पदस्थापना से लेकर अभी तक कम से कम तीन ऐसे गंभीर मामले हैं जिन पर कलेक्टर कार्यालय से डीपीसी को प्रकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था लेकिन डीपीसी ने अपनी चालाकियो के कारण प्रकरणों को कलेक्टर तक प्रस्तुत ही नहीं किया और अपने स्तर पर भारी लेनदेन कर रफा-दफा कर लिया। इसी तरह कमिश्नर कार्यालय से आए पत्रों और कुछ अन्य प्रकरणों में डीपीसी द्वारा किए गए कृतियों की खबरें पूर्व मे ही समाचार पत्रों में छप चुकी हैं।

आखिर कब तक चलेगा यह

शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर इतनी संजीदा और गंभीर कलेक्टर होने के बावजूद डीपीसी कि ये चालाकी और छुपा एजेंडा संभवतः इसलिए चल रहा है कि शालाये बंद थी और लॉकडाउन होने के कारण डीपीसी की प्रवृति और कार्यालय में रुचि ना लेना कलेक्टर की नजरों से ओझल होता रहा है।

मार्च में किया निरीक्षण और मई में जारी कर रहे नोटिस

अपने छुपे एजेंडे की प्रतिपूर्ति लॉकडाउन में ना हो पाने के कारण डीपीसी से इस कदर भूखे हो गए हैं की लॉकडाउन के समय गंगेव विकास खंड में मार्च में कुछ शालाओं का निरीक्षण किया था जिस पर अभी तक उम्मीद लगाए बैठे रहे और अचानक शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया। ऐसा तब जबकि शालाऐ बंद थी और मोहल्ला क्लास और डीजिलेप के माध्यम से शिक्षक अपना कार्य कर रहे थे, डीपीसी यहीं नहीं रुके उन्होंने विकासखंड स्रोत समन्वयक को भी लगे हाथ लपेटे में लेने का प्रयास किया है और पहली ही नोटिस में सीधे पद से पृथक करने की धमकी दे डाली है। 

डीपीसी के उक्त सभी कृत्यों को लेकर शिक्षक संगठनों ने रोष 

डीपीसी के उक्त सभी कृत्यों को लेकर शिक्षक संगठनों ने रोष व्यक्त किया है और जल्द ही मामले को कलेक्टर तक ले जाने की बात कही है। 

कार्य अनुमति में रखे गए दर्जन से ज्यादा सीएसी, बीएसी

इतना ही नही श्री सक्सेना ने पदभार ग्रहण करते ही दर्जन से भी ज्यादा जन शिक्षकों को कार्य अनुमति के आधार पर जन शिक्षक बना दिया जिनमें से कई ऐसे जन शिक्षक हैं जिनके विद्यालय का स्वयं पठन-पाठन ठप हो गया। 1 वर्ष पूर्व जन शिक्षकों की काउंसलिंग हो चुकी है उनके आधार पर नई पदस्थापना की जानी चाहिए थी किंतु मनमानी तौर पर भारी भरकम राशि लेते हुए मनचाहे व्यक्तियों को सीएससी बनाया। बरहाल डीपीसी सक्सेना की कार्यप्रणाली इन दिनों संदेह के दायरे में है। अब इस पर क्या कार्यवाही की जाती है वक्त का इंतजार है।

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