MP : सतना शहर के बहुचर्चित "सिकंदर रेप केस की" फरियादी की रहस्यमयी मौत?

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सतना। प्रदेश में लव जेहाद कानून का आधार बनने बाला मामला, नाबालिक से रेप और ब्लेमेलिंग का मामला! रेप कांड की पीड़िता व मुख्य गवाह की संदिग्ध मौत, चार मई को सतना स्थित निवास पर हुई मौत बताई जा रही है,परिजनों ने किया गुपचुप तरीके से गांव में अंतिम संस्कार ?

मौत का रहस्य गहराया जमानत पर वाहर आ चुका  आरोपी सिकंदर उर्फ समीर उर्फ अतीक अहमद! पूर्व में पुलिस से परिजनों ने सिकंदर के भाई द्वारा जान से मारने और धमकाने की कर चुके थे शिकायत!

पुलिस इस मामले में साध रखी चुप्पी,11 सितंबर 2020 को कोलगवां थाने में दर्ज हुया था मामला,वहीं न्यायालय में चल रहा है ! क्या सिकन्दर का परिवार सच मे इतना सक्षम था कि पांच महीने में नहीं लग सका था, गंभीर मामले चार्ज! 

पीड़िता की हो चुकी है गवाही,रहस्मयी मौत पर खड़े हो रहे बड़े सवाल!

किसके साथ गई थी दिल्ली युवती,तवियत खराब हुई तो किस डॉक्टर का चला उपचार,मौत के बाद पुलिस को क्यों नही दी गई सूचना, सवालों के घेरे में पूरा मामला!

पिछले वर्ष के सितम्बर के महीने में प्रदेशभर में माहौल गरमा देने वाले बहुचर्चित सिकंदर रेप केस की फरियादी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। इधर कांग्रेस नेता सिकंदर जमानत पर बाहर आया और उधर 10 के अंदर ही नाबालिग पीड़िता की मौत हो जाने को लेकर संदेह और सवालों का घेरा तो बढ़ा ही है चर्चाओं का बाजार एक बार फिर गर्म हो गया है। बहरहाल पुलिस ने मामले में संज्ञान लिया है और मौत का पूरा माजरा समझने की कोशिश शुरू कर दी है।

 गत वर्ष सतना शहर के बहुचर्चित सिकंदर रेप केस की मुख्य फरियादी और पीड़िता की मौत हो गई है। परिजनों से सूत्रों को मिली जानकारी के मुताबिक नई बस्ती निवासी पीड़िता की गत 4 मई को अचानक मौत हो गई। उसके परिजन शव लेकर सतना से गोविंदगढ़ के पास सेमरिया स्थित गांव चले गए और वहीं उसका अंतिम संस्कार क्रिया कर्म कर आये। पीड़िता बहुचर्चित केस में मुख्य गवाह थी ,बावजूद इसके उसकी मौत की सूचना थाना पुलिस को नहीं दी गई। जब परिजन गांव से क्रिया-कर्म कर वापस लौट आये तब यह मामला अन्य लोगों के संज्ञान में आया,तो क्या रसूखदार विरोधियों का इतना दबाब था या कोई और बात..!

महज इत्तेफाक तो नही,पीड़िता के गायब होने के बाद 25 अप्रैल को  सिकंदर का बाहर आना, क्या सलाखों के पीछे ही रच दी गई थी साजिश ?

इधर 24 अप्रैल को पीड़िता घर से गायब हुई और उधर इसी तारीख को इस बहुचर्चित रेप केस के मुख्य आरोपी सिकंदर उर्फ समीर खान उर्फ अतीक मंसूरी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। सिकंदर 25 अप्रैल को जमानत पर रिहा हो कर जेल से बाहर आ गया। 

गौरतलब है कि गत वर्ष सितम्बर में चर्चा में है ये मामला,शहर में साइबर कैफे चलाने वाले कांग्रेस नेता "समीर खान"उर्फ "सिकंदर" उर्फ "मो.अतीक मंसूरी" पर नई बस्ती निवासी एक नाबालिग़ लड़की के साथ दुष्कृत्य किये जाने का आरोप लगा था। लव जिहाद से जुड़े इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद शहर में प्ले बॉय की छवि रखने वाले सिकंदर की जालसाजी ,सूदखोरी और अश्लील वीडियो क्लिप्स के कारोबार से जुड़े कई राज भी फाश हुए थे। पुलिस ने सिकंदर को गिरफ्तार किया था और उसके बैंक खाते-लॉकर सील कर दिए थे। नजीराबाद में उसकी ऐशगाह माना जाने वाला उसका फार्म हाउस वगैरह भी सरकारी बुलडोजर के पंजो तले रौंद कर धराशायी कर दिया गया था।

मृतका को मिली थी जान से मार देने की धमकी

प्ले-बॉय बन कर शहर की लड़कियों और महिलाओं की इज्जत से ख़िलवाड़ करने के संगीन आरोपों से घिरे सिकंदर के नाबालिग से बलात्कार के मामले में फंसने के बाद पीड़िता और उसके परिजनों को धमकियां मिली थीं। पीड़िता के पिता ने इस संबंध में लिखित शिकायत भी पुलिस अधीक्षक को सौंपी थी। शिकायत में पीड़िता के पिता ने आरोपी सिकंदर के कांग्रेसी पार्षद भाई मो रईस पर राजीनामा करने का दबाव बनाने और केस वापस न लेने पर पूरे परिवार को जान से मार देने की धमकी देने का आरोप लगाया था। उसने एसपी को बताया था कि रईस ने उसे यह कहते हुए धमकाया है कि उसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने पांच महीने बाद भी चार्ज भी नहीं लगने दिया है।

ऐसा क्या था,कि एम्बुलेंस आने के पहले ही तोड़ दिया दम..क्या है इस मामले में खेला ?

सूत्रों ने बताया कि पीड़िता गत 24 अप्रैल को घर से अचानक कहीं चली गई थी ,जिस कारण उसके मोबाइल पर भी घर वालों का संपर्क नहीं हो पा रहा था। इसकी जानकारी पीड़िता के पिता ने बजरंग दल के एक पदाधिकारी को दी थी जिन्होंने सिकंदर रेप केस की जांच कर रही ,महिला पुलिस अफसर को पीड़िता के घर से गायब होने की जानकारी भी दी थी। दो दिन बाद पीड़िता की घर वालों से फोन पर बात हुई! जिसमे उसने बताया कि वह अपनी सहेली के साथ दिल्ली चली आई है। उसके दिल्ली में होने की जानकारी होने के बाद परिजनों ने पुलिस को अपडेट कराना जरुरी नहीं समझा और इसी बीच 4 दिन बाद वह वापस लौट आई। जब वह लौटी तो उसकी तबियत ठीक नहीं थी। वह सर्दी जुकाम और बुखार से पीड़ित थी। मां ने इलाज के लिए डॉक्टर के पास चलने को कहा तो उसने मना कर दिया लेकिन बाद में खुद ही डॉक्टर के पास गई और दवाएं ले आई। गत 4 मई को उसकी तबियत बिगड़ी तो पिता ऑटो-एम्बुलेंस लेने चले गए लेकिन जब तक वह लौटते तब तक पीड़िता ने घर पर दम तोड़ दिया था! परिजन शव लेकर गृह ग्राम चले गए। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पीड़िता की मौत की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी गई जबकि परिजन भी जानते थे, कि वह बहुचर्चित मामले की मुख्य गवाह-फरियादी है।

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