प्रदेश सरकार ब्लैक फंगल इंफेक्शन के इलाज के लिए अमेरिका के डॉक्टरों से लेगी सलाह, मंत्री सारंग करेंगे एक्सपर्ट से चर्चा

(Black fungal infection) भोपाल। कोरोना को हरा कर ठीक होने वाले मरीजों के लिए ब्लैक फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया है। प्रदेश में ब्लैक फंगल इंफेक्शन के सक्रिय मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसे लेकर अब सरकार इसे रोकने के लिए अमेरिकी डॉक्टर से सलाह लेगी। इसे लेकर बुधवार को हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों की टीम के साथ चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमेरिकी विशेषज्ञों से चर्चा करेंगे। ब्लैक फंगल इंफेक्शन से पीड़ित कुछ मरीजोें की सर्जरी कर इंन्फेक्टेड अंगों को निकालना पड़ा है।

क्या है ब्लैक फंगस?

ये एक फंगल डिसीज है, जो म्यूकर माइकोसिस नाम के फंगल से होता है। ये ज्यादातर उन लोगों को होता है, जिन्हें पहले से कोई बीमारी हो या वो ऐसी मेडिसिन ले रहे हों, जो बॉडी की इम्युनिटी को कम करती हों या शरीर की दूसरी बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करती हों। ये शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।

ये शरीर में कैसे पहुंचता है और इसका असर

ज्यादातर सांस के जरिए वातावरण में मौजूद फंगल शरीर में पहुंचते हैं। अगर शरीर में किसी तरह का घाव है या शरीर कहीं जल गया, तो वहां से भी ये इंफेक्शन शरीर में फैल सकता है। अगर इसे शुरुआती दौर में ही डिटेक्ट नहीं किया जाता, तो आंखों की रोशनी जा सकती है। या फिर शरीर के जिस हिस्से में ये फंगल फैला है, शरीर का वो हिस्सा सड़ सकता है।

ब्लैक फंगल कहां पाया जाता है?

ये गंभीर, लेकिन रेयर इंफेक्शन है। ये फंगल वातावरण में कहीं भी रह सकता है। खासतौर पर जमीन और सड़ने वाले ऑर्गेनिक मैटर्स में। जैसे पत्तियों, सड़ी लड़कियों और कम्पोस्ट खाद में ब्लैक फंगल पाया जाता है।

इसके लक्षण क्या हैं?

शरीर के किस हिस्से में इंफेक्शन है, उस पर इस बीमारी के लक्षण निर्भर करते हैं। चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना, जो तेजी से गंभीर हो जाते हैं।

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