MP : चोरी छिपे शादी करने पर बड़ा एक्शन : प्रदेश में 5 मई के बाद शादी करने वालों को मैरिज सर्टिफिकेट नहीं, पढ़ ले ये काम की खबर

मध्यप्रदेश के उज्जैन में 5 मई के बाद शादी करने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। एक महिला सरपंच की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। उसने अपनी दो बेटियों की शादी लॉकडाउन में कराई थी। उसके पति पर FIR दर्ज की गई है। सरपंच पद से उसे हटाने की तैयारी चल रही है।

जिले में 5 मई के बाद हुई 200 शादियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ये शादियां कोरोना के बढ़ते संक्रमण को राेकने के लिए विवाह समारोह समेत अन्य सामूहिक आयोजनों पर रोक लगाने के बाद की गई हैं। दरअसल कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किए हैं कि पांच मई के बाद किए गए विवाहों के पंजीयन नहीं होंगे। यदि गलती से पंजीयन जारी हो भी गए तो ऐसे पंजीयनों को निरस्त किया जाएगा। अभी भी उज्जैन समेत प्रदेश में शादियों पर प्रतिबंध लगा है।

पांच मई के बाद जिले में 200 से अधिक शादी के आयोजन का अनुमान लगाया गया है। प्रशासन का मानना है कि प्रतिबंध के बाद भी लोगों ने चोरी-छिपे शादी की है, इसलिए कानूनी रूपी से मान्यता नहीं दिया जा सकता। इस संबंध में कलेक्टर आशीष सिंह ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रशासन द्वारा पांच मई से धारा 144 के तहत विवाह पर रोक लगा दी गई थी।

महिला सरपंच पर भी दर्ज होगी FIR

उज्जैन की रुनिजा की सरपंच मधु बैरागी ने 13 मई को अपनी दो बेटियों की शादी की है। इस मामले में सरपंच के पति कमल दास बैरागी पर एफआईआर दर्ज की गई है। मामला कलेक्टर आशीष सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने सरपंच मधु पर FIR करके सरपंची से हटाने की कार्रवाई के लिए कहा है।

अनुमति निरस्त, फिर भी की शादियां

कलेक्टर ने कहा, पूर्व में दी गई विवाह की सभी अनुमतियों को भी निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद भी चुपचाप विवाह आयोजित किए गए हैं। यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आया है। ऐसे सभी विवाह के पंजीयन नहीं करने के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों को आदेश दिया गया है। आदेश में साफ कर दिया गया है कि 5 मई के बाद के विवाह यदि गलती से पंजीकृत हो गए हैं तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

… और एक गांव ऐसा भी, जिसने रोक दी शादियां

उज्जैन शहर से 15 किलोमीटर दूर ताजपुर। केंद्र में होने से इसके आसपास के 7 गांव के लोग यहां रोजमर्रा की खरीदी के लिए आते हैं। इलाज भी यहीं करवाते हैं। एक महीने पहले अचानक हालात बदल गए। लोग संक्रमित होने लगे। स्पष्ट वजह पता नहीं चल रही थी। बार-बार खोजने पर पता चला कि गांव के लोग या तो शहर जाते हैं या आसपास के ग्रामीण यहां आते हैं।

ऐसे में तय हुआ कि अब लोग शादियों में नहीं जाएंगे, शादियों का आयोजन नहीं होगा। मृत्युभोज से भी दूरी बनाई। रहवासियों का कहना है कि उस वक्त तक करीब 30 लोग संक्रमित हो गए थे। फिर एक सख्त निर्णय लिया कि गांव के रास्ते ही बंद कर दिए जाएं। शादियां बंद थी तो टेंट वाले से कनात मंगवाई और मुख्य रास्तों पर लगवा दी। सरपंच सीमा कुंवर के अनुसार इस काम में पूरे गांव के युवाओं के साथ अन्य लोगों ने भी सहयोग किया। उज्जैन जिले में...लोगों को समझाइश दी कि वे मास्क पहनें। जब तक बहुत जरूरी न हो घर से बाहर न निकलें। उन्होंने भी वैसे ही किया। एक महीने बाद आखिर हालत नियंत्रण में हैं। खांसी, सर्दी, बुखार वाले लोग होम क्वारेंटाइन हैं। वे उसी तरह नियमों का पालन कर रहे हैं जैसे शहरों में हो रहा है।

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