KATNI : चार दिन के मासूम को गोद में उठाए भटकती रही महिला तो तड़पती कोरोना वॉरियर शिक्षिका भी हुई ड्यूटी के दौरान ब्रेन हेमरेज का शिकार

कोरोना काल में मध्यप्रदेश में दूसरी बीमारियों से पीड़ितों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मंगलवार को कटनी के जिला अस्पताल के बाहर एक महिला अपने चार दिन के मासूम को लिए भटकती रही तो उज्जैन के अस्पताल में वैक्सीनेशन ड्यूटी के दौरान ब्रेन हेमरेज का शिकार शिक्षिका तड़पती रही।

वैक्सीनेशन ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ी, ब्रेन हेमरेज का शिकार हुई

उज्जैन वैक्सीनेशन की टीम में कई दिनों से अपनी सेवा दे रही कोरोना वॉरियर शिक्षिका नजमा ब्रेन हेमरेज का शिकार हो गई। वह बीते पांच दिन से कोरोना अस्पताल माधवनगर में भर्ती थी। उसे न तो इलाज मिल पा रहा है और न कोई अन्य अस्पताल भर्ती करने को तैयार है। मंगलवार को जैसे ही खबर मीडिया को मिली उसे तत्काल सिविल अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। नजमा की हालत बेहद नाजुक है। सिविल अस्पताल का एक वीडियो सामने आया है जिसमे नजमा तड़पते दिखाई दे रही है। लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। नजमा को देख रहे डॉ दीपक शर्मा ने कहा कि सिविल अस्पताल में न्यूरो सर्जन नहीं है और नजमा की हालत खराब हो रही है। उनका ऑक्सीजन लेवल भी लगातार गिर रहा है। संभवतः उन्हें कोरोना के लक्षण भी है और जल्द ही उन्हें अन्य अस्पताल में इलाज के लिए लेकर जाना चाहिए।

अब कोई पूछने वाला नहीं

नलिया बाखल स्थित कन्या मावि की शिक्षिका नजमा पति रमजान की छत्री चौक डिस्पेंसरी में वैक्सीनेशन ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ी। पति रमजान खान के अनुसार डॉ. सोनाली अग्रवाल का इलाज कराया। कोरोना टेस्ट भी कराया। दो दिन बाद उनके सिर में तेज दर्द हुआ। कोरोना की शंका के चलते माधवनगर अस्पताल में भर्ती किया। इसके बाद एमआरआई करवाई तो पता चला कि ब्रेन हेमरेज हो गया। हालांकि कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ गई। डॉक्टरों ने बताया ब्रेन हेमरेज है। गुरुवार से वह बेड पर बेसुध है।

CMHO को पता ही नहीं

नजमा को लेकर जब CMHO महावीर खंडेलवाल कहा कि इस मामले में मुझे जानकारी नहीं है। ये मामला सिविल सर्जन के क्षेत्र अधिकार का है लेकिन नजमा को देख रहे सिविल अस्पताल के डॉ दीपक शर्मा ने माना कि ब्रेन हेमरेज जैसी बीमारी का इलाज सिविल अस्पताल में नहीं हो सकता है। अस्पताल में न्यूरो सर्जन नहीं है।

नूरी खान ने पहुंचकर धरना दिया

कांग्रेस प्रवक्ता नूरी खान सिविल अस्पताल नजमा से मिलने पहुंची। नजमा बेसुध थी और लगातार शरीर में झटके आ रहे थे, जिसके कारण नजमा से बात नहीं कर सकी। नूरी खान ने आरोप लगाया कि सरकार की ड्यूटी निभाते हुए नजमा को ब्रेन हेमरेज हुआ है। सरकार ने उसे यहां अकेला छोड़ दिया जबकि अस्पताल में इलाज का अभाव है। जब तक उसे निजी अच्छे अस्पताल में भर्ती नहीं कराया जाता मैं सिविल अस्पताल के बाहर धरना दूंगी।

एक हाथ में बच्चा, दूसरे हाथ में बॉटल पकड़कर जिला अस्पताल के बाहर खड़ी रही महिला

कटनी जिला अस्पताल के बाहर एक हाथ में बच्चा और दूसरे हाथ में बच्चे को सीरिंज द्वारा दी जा रही लिक्विड दवा से भरी बॉटल पकड़े हुए एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। वीडियो में महिला व बच्चे को लेकर आया एंबुलेंस चालक बता रहा है कि वह बच्चे को कटनी जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लेकर आया था। इसके लिए ओपीडी पर्ची भी कटवा ली थी, लेकिन जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में उसे भर्ती नहीं किया गया। इस वजह से महिला अपने बच्चे को लेकर बाहर आ गई और जबलपुर मेडिकल कॉलेज जाने की बात कहने लगी।

वायरल हुए वीडियो में एंबुलेंस चालक ने बताया कि महिला के बच्चे का स्वास्थ्य खराब है। बच्चे को उमरिया जिले से मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया था, लेकिन उन्हें लगा कि मेडिकल कॉलेज काफी बड़ी जगह है और कोरोना भी फैला है तो बच्चे को जिला अस्पताल कटनी में भर्ती कराकर इलाज कराते हैं। एंबुलेंस चालक बच्चे को लेकर जिला अस्पताल कटनी आ गया। यहां पर उसके द्वारा बच्चे को भर्ती करने के लिए ओपीडी पर्ची भी कटवाई गई। लेकिन जब भर्ती करने का समय आया तो बच्चा वार्ड में भर्ती नहीं किया गया। महिला बच्चे को लेकर जिला अस्पताल के बाहर आ गई और मेडिकल कॉलेज जाने की बात कहने लगी। एंबुलेंस चालक का कहना था कि जब भर्ती नहीं करना था तो पर्ची क्यों काटी गई। आरएमओ सर से भी बात की गई। मैंने कहा कि भर्ती नहीं करना है तो लिखित रुप से दें, लेकिन किसी ने लिखित नहीं दिया।

चार दिन के मासूम का हो गया था ऑक्सीजन लेवल कम

कटनी जिले की बरही तहसील निवासी द्रौपदी साहू अपने चार दिन के बच्चे का इलाज जिला अस्पताल उमरिया में करा रही थी। बच्चे का ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण डॉक्टर ने उमरिया जिला अस्पताल से जबलपुर मेडिकल कॉलेज रैफर किया था। महिला व उसके पित बच्चे को 108 एंबुलेंस से जबलपुर ले जा रहे थे। इस बीच बच्चे के माता-पिता ने एंबुलेंस में मौजूद मेडिकल टेक्नीशियन नीरज गौतम से कहा कि वे लोग जबलपुर नहीं जाना चाहते। वहां पर उनके कोई परिचित नहीं है और उन्हें परेशानी होगी। इसलिए उन्हें कटनी जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए। कटनी जिले में उनके रिश्तेदार भी हैं तो सहयोग भी मिलता रहेगा। इसके बाद कटनी जिला अस्पताल में भर्ती होने के लिए वैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए नीरज गौतम कटनी जिला अस्पताल पहुंचा। यहां पर बच्चों के गहन चिकित्सा यूनिट में भर्ती करने के लिए उसके द्वारा पर्ची कटवाई गई। लेकिन गहन चिकित्सा यूनिट में मौजूद स्टाफ नर्स द्वारा बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया गया। मायूस परिवार वाले जबलपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना हो गए।

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