MP : कोरोना संक्रमण से गर्भवती महिलाएं हो रही संक्रमित, शिशुओं को आक्सीजन मिलने में हो रही मुश्किल, जा रही जाने

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इंदौर। कोरोना का नया स्टेन इस बार अजन्मे शिशुओं के लिए भी आफत बन रहा है। पहली लहर में संक्रमित महिलाओं से जन्मे शिशुओं का कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा था, लेकिन दूसरी लहर में कई गंभीर केसों में कोरोना गर्भ में पल रहे शिशुओं तक सांसे पहुंचाने में भी रुकावट बन रहा है और परिवार के सामने मां या बच्चे में से किसी एक को बचाने का विकल्प चुनना पड़ रहा है। दूसरी लहर में गर्भवती भी ज्यादा संक्रमित हुई है।

पिछले साल अप्रैल से लेकर जनवरी तक 90 मरीज अस्पताल में एडमिट हुए थे, लेकिन पिछले 60 दिनों में अस्पताल में 81 एडमिशन हुए। कुछ महिलाओं की मौत भी इलाज के दौरान हो गई। 48 की डिलेवरी हुई और बच्चे भी स्वस्थ्य हुए हैं, लेकिन जिन महिलाओं में संक्रमण अधिक था और गर्भ भी पांच-छह माह का था, उन्हें ज्यादा परेशानी हुई। 10 महिलाओं की जान तो गर्भपात कर बचाई गई।

पेट में पल रहा शिशु मां पर ही आश्रि‍त रहता है। आक्सीजन भी उसे मां से ही मिलती है। कोरोना संक्रमण फेफड़ों में जाने के बाद कई गर्भवती महिलाओं का आक्सीजन स्तर तेजी से कम हो जाता है,क्योकि गर्भ में पल रहा बच्चा भी आक्सीजन लेता है। ऐसे में दोनों की सेहत पर असर पड़ता है। पिछले दिनों एमटीएच अस्पताल में एक महिला का उनकी सहमति से गर्भपात कराया गया। उसके बाद महिला की जान बच सकी। अब वह स्वस्थ है।

इन बातों का रखें ध्यान

- गर्भवती को कई बार जांच के लिए सोनोग्राफी सेंटर, अस्पतालों में जाना होता है। वहां पूरी सर्तकता रखे,क्योकि संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।

-यदि कोरोना के लक्षण है तो तत्काल डाक्टर से संपर्क करे, ताकि इलाज जल्दी ठीक हो सके। कई गर्भवती होम आइसोलेट संक्रामती  में रहकर भी ठीक हुई है।

-संक्रमण होने पर अपने गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर तनाव न ले।

- बार-बार आक्सीजन स्तर जांचे

( डा.सुमित्रा यादव,स्त्री रोग विशेषज्ञ, एमवायएच के अनुसार)

देरी पड़ रही है भारी

इस बार का संक्रमण कम समय में फेफड़ों तक पहुंच रहा है, इसलिए इलाज में देरी नहीं होना चाहिए। एमटीएच में गर्भवतियों के इलाज की व्यवस्था है। ज्यादातर महिलाएं ठीक हो रही है।- डॉ. अनुपमा दवे, एमटीएच अस्पताल

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