MP : जबलपुर में बनेगा black fungus का इंजेक्शन : उमरिया-डुंगरिया स्थित रेवा क्योर लाइफ साइंसेज कंपनी को मिला लाइसेंस


कोरोना के बाद ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों और इलाज के लिए जरूरी एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की मारामारी के बीच राहत की खबर है। जबलपुर की रेवा क्योर लाइफ साइंसेज दवा कंपनी अब इसके इंजेक्शन बनाएगी। कंपनी काे सरकार की तरफ से उत्पादन संबंधी लाइसेंस मिल गया है। इंदौर की मॉडर्न लैबोरेटरी के बाद प्रदेश की यह दूसरी कंपनी है, जिसे इसकी अनुमति मिली है। जून तक कंपनी इंजेक्शन बनाने की तैयारी में है। यह कंपनी इंजेक्शन और पाउडर दोनों तरह का उत्पादन करेगी।

ब्लैक, व्हाइट, क्रीम सहित अन्य सभी फंगस के होने पर इंजेक्शन की कमी नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने कोविड के बाद इसे भी महामारी घोषित की है। जबलपुर में 200 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। महाकौशल और विध्य के 18 जिलों से मरीज जबलपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आ रहे हैं। अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 28 इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा इसके इंजेक्शन की कमी को बताया जा रहा है। सरकारी स्तर पर इसकी खरीदी कर मेडिकल कॉलेज को इंजेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

इमरजेंसी को देखते हुए रेवा क्योर लाइफ साइंसेज कंपनी आई सामने

उमरिया-डुंगरिया स्थित रेवा क्योर लाइफ साइंसेज कंपनी के एमडी रवि सक्सेना के मुताबिक ब्लैक फंगस के बढ़ते मामले और इसके इंजेक्शन की देश में भारी कमी को देखते हुए उन्हाेंने इमरजेंसी में इसके उत्पादन का निर्णय लिया। उनकी कंपनी एंटी कैंसर इंजेक्शन बनाती है। देश की कई बड़ी व नामी कंपनियों से उनका टाइअप है। प्रदेश सरकार से लाइसेंस मिलने के बाद वह रॉ-मटैरियल की व्यवस्था में जुटे हैं। कुछ कंपनियों से उनकी डील हो चुकी है। 10 जून तक उन्हें रॉ-मटैरियल मिलने की उम्मीद है। जबलपुर सांसद राकेश सिंह की तरफ से भी इसमें मदद की जा रही है। इसके बाद वह इंजेक्शन बनाना शुरू करेंगे।

सस्ते में मिलेगा इंजेक्शन

एमडी रवि सक्सेना के मुताबिक उनकी कंपनी WHO एंड यूरोपियन मेडीसिन एजेंसी से अप्रूव्ड है। अभी देश में एक ही कंपनी इंजेक्शन बना रही है। अभी इसके इंजेक्शन एमपी सरकार ही सप्लाई कर रही है। सरकार सप्लाई लेती है, तो उसके रेट काफी सस्ते हैं। जबलपुर वालों को ये इंजेक्शन सस्ते में मिलेगा। लागत को लेकर बताया कि उनकी एक बड़ी कंपनी से बात चल रही है। यह डील हुई तो मिलकर हम लाइपोजोमल इंजेक्शन बनाएंगे। इसके अलावा एक कंपनी के साथ टाइअप करके और खुद से भी इसका उत्पादन करेंगे। तीनों तरह का लाइसेंस मिल चुका है। कंपनी इंजेक्शन के अलावा नाॅर्मल पाउडर के रूप में भी इसे लाने की कोशिश में है। यह काफी प्रभावी मानी जाती है।

लाइसेंस के लिए डॉक्टर जितेंद्र जामदार ने उठाई थी आवाज

जिला क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में पिछले दिनों मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जामदार और सांसद राकेश सिंह ने इस कंपनी के आवेदन पर जल्द निर्णय लेने का अनुरोध प्रदेश सरकार से किया था। ब्लैक फंगस के इलाज में इससे बड़ी राहत मिलेगी। डॉक्टर जामदार ने बताया कि जबलपुर में ब्लैक फंगस इंजेक्शन का उत्पादन मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

फंगस के लिए एम्फोटेरिसिन-बी का इंजेक्शन जरूरी

फंगस से पीड़ित मरीजों के लिए एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन 70 से 80 एमएल रोज लगाने पड़ते हैं। एक मरीज को 30 से 40 इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। एक वायल 50 एमएल का होता है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में पदस्थ डॉक्टर सौम्या सैनी के मुताबिक मरीजों के इलाज में इस इंजेक्शन का कोई विकल्प नहीं है। जबलपुर में इसके तैयार होने से इस क्षेत्र के मरीजों को राहत मिलेगी।

ब्लैक फंगस के लक्षण

आंख-नाक के आसपास दर्द व लालपन

चेहरे के एक तरफ दर्द या सूजन

नाक, मुख व आंख से काले रंग का पानी आना

नाक के ऊपर काली पपड़ी जमना

तालू में पपड़ी जमना, खून की उल्टियां

आंखों में सूजन, दर्द या लाल होना

नाक के आसपास गालों की हड्डियों में दर्द

नाक बंद होना

सांस लेने में दिक्कत

दांत काले होना या दांत व जबड़े कमजोर होना

फंगस से बचने ये करें उपाय

धूल और प्रदूषण वाली जगह में जाने से बचें

हाथ अच्छे से धोकर ही कुछ खाएं।

कोरोना से ठीक होने के बाद भी बाहर निकलने पर मास्क लगाएं।

गुनगुने पानी को नाक से खींचे

कोरोना मरीज स्वस्थ्य होने भी घर पर 4-6 सप्ताह तक नमक-पानी के गरारे करें

शुगर लेवल 150-200 के बीच रहे।

डायबिटीज वाले नियमित शुगर लेवल की जांच कराएं।

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