REWA : बारिश का मौसम शुरू, इन स्थानों पर शैलानियों की आवाजाही शुरू, कई पिकनिक स्पाट सुरक्षा कारणों से किए गए बंद, लाखों खर्च के बाद भी इंतजाम नहीं

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रीवा। जल प्रपातों और अन्य प्राकृतिक स्थलों को जिले में पिकनिक स्पाट के रूप में चिन्हित किया गया है। इन स्थानों में प्रदेश के दूसरे हिस्सों के साथ ही उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के लोग भी आते हैं। हाल के वर्षों में लाखों रुपए खर्च कर पर्यटकों के आकर्षण के इंतजाम किए गए थे लेकिन यहां पर देखरेख की व्यवस्थाएं नहीं की जा सकी। यह स्थल वीरान होते जा रहे हैं।

अब बारिश का मौसम शुरू हो गया है, इन स्थानों पर शैलानियों की आवाजाही शुरू हो गई है। कई जगहों पर तो लोगों के प्रवेश की अनुमति ही नहीं दी गई है। पिकनिक स्पॉट तक पहुंचने के रास्ते रोके गए हैं। रीवा जिले में आधा दर्जन सेेेे अधिक संख्या में प्रमुख जलप्रपात हैं जहां पर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं।

प्रशासन द्वारा इन स्थानों पर लोगों की सुविधा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए जाने से पर्यटकों का आकर्षण घटने लगा है। सिरमौर क्षेत्र के कई स्थलों में लाखों रुपए खर्च कर विकसित करने का कार्य हुआ था लेकिन वह इनदिनों पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए हैं। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग मायूस होकर वापस लौट रहे हैं।

प्राकृतिक जलप्रपातों के सबसे अधिक स्थल सिरमौर क्षेत्र में हैं। जहां पर एक साथ कई जगह का भ्रमण पर्यटक कर सकते हैं लेकिन प्रमुख स्थलों को बंद किए जाने की वजह से हजारों की संख्या में शैलानी वापस लौट रहे हैं।

बड़ी संख्या में आते हैं शैलानी

जिले में स्थित पुरवा जलप्रपात, क्योंटी जलप्रपात, बहुती जलप्रपात, चचाई, टोंस वाटर फाल, पावन घिनौचीधाम, आल्हाघाट, खंधो मंदिर परिसर, गोविंदगढ़ तालाब सहित अन्य कई प्रमुख स्थल हैं जहां लोग प्राकृतिक सौंदर्य को देखने पहुंचते हैं। बरसात के दिनों में इन स्थलों का आकषर्ण अधिक होता है। रीवा जिले के लोग तो यहां पहुंचते ही हैं, साथ ही आसपास के जिलों के भी बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र से लोग भी यहां आकर पूरे परिवार के साथ आनंद उठाते हैं। प्रयागराज से बड़ी संख्या में छात्रों की टीमें हर साल यहां पहुंचती हैं।

ऐसी है स्थिति पिकनिक स्पाटों की 

क्योंटी- यह प्राकृतिक एवं पुरातात्विक महत्व का स्थल है। यहां पर वाटरफाल, किला, घाटी, भैरव मंदिर आदि देखने आते हैं। यहां पर पुरातत्व विभाग ने कुछ समय पहले ही 50 लाख रुपए खर्च किया था। वर्तमान में पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, इसलिए यह आत्महत्या का केन्द्र भी बन रहा है। उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में लोग आते हैं। पर्यटकों की जरूरत के अनुसार इसमें इंतजाम नहीं हैं।

घिनौची धाम- यहां पर धरती से करीब 200 फीट नीचे दो जल प्रपातों का संगम देखने को मिलता है। प्राचीन शिवलिंग है जहां पर जलप्रपात से स्नान होता है। यहां 35.50 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। पर्यटकों के लिए यह बंद है। तीन साल से रखरखाव के इंतजाम नहीं, सुरक्षा गार्ड दिन में दो रहते हैं।

टोंस वाटर फाल - यहां पर जलप्रपातों की श्रृंखला है, दो वर्ष पहले 36.50 लाख रुपए की लागत से विकसित किया गया। 20 अक्टूबर 2020 से अब तक मरम्मत के नाम पर बंद है। सप्ताह भर का काम था लेकिन वन विभाग की उदासीनता से अब तक बंद है। बड़ी संख्या में लोग आते हैं प्रवेश नहीं मिलने पर वापस लौट रहे हैं।

योगिना माता- सिरमौर क्षेत्र में यह भी स्थित है। शैलचित्रोंंंंं की श्रृंखला है, यह पर्यटकों के लिए खुला है। यहां और सुविधाएं पर्यटक चाहते हैं।

आल्हाघाट- यहां पर लोकदेव आल्हा की तपोस्थली रही है। पुरातत्वविद अलेक्जेंटर कनिंघम ने इस स्थान को प्रकाश में लाया था। 1883 में शिलालेख देखकर इसे प्रकाशित कराया था। तीन शिलालेख हैं, महाराजा नर्सिंगदेव का संवत 1216 ईसवी का उल्लेख है। गणेश और आल्हा की प्रतिमा आकर्षक रूप से उकेरी गई है। यहां डेढ़ सौ फीट लंबी गुफा है। 28.50 लाख की लागत से विकसित किया गया है। यह खुला है, लोग पहुंच रहे हैं।

चचाई वाटर फाल- जब तक बीहर नदी का ओवरफ्लो पानी जाता है, तब तक यह प्रपात आकर्षण का केन्द्र रहता है और भीड़ आती है। बाद में कम संख्या में लोग आते हैं।

पुरवा वाटर फाल- रीवा-सेमरिया मार्ग स्थित है। यह हमेशा खुला रहता है। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। रेस्ट हाउस पर्यटकों के लिए नहीं बल्कि नेताओं-अफसरों के लिए है। गेस्टहाउस की मांग यहां पर हो रही है। यहां पर बड़ी संख्या में हर दिन पर्यटक आते हैं।

खंधो माता मंदिर--गोविंदगढ़ के नजदीक यह धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने की वजह से दुर्घटनाएं भी हो रही है। इसके विकास का प्रस्ताव प्रशासनक की ओर से ब तक नहीं भेजा गया है. 

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