SATNA : 7 देशों की चोटियों पर चढ़ने वाले रत्नेश फाउंडेशन को मिला वर्ल्ड बुक ऑफ का रिकॉर्ड्स : माउंट एवरेस्ट पर फतेह कर गया था जन-गण-मन राष्ट्रगान


मध्य प्रदेश के पहले आधिकारिक पर्वतारोही रत्नेश पांडेय के फाउंडेशन को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स मिला है। उनका फाउंडेशन कोरोनाकाल में रोजाना 500 मवेशियों को भोजन करा रहा था। बता दें, 2015 में रत्नेश पांडेय को प्रदेश सरकार ने प्रथम आधिकारिक पर्वतारोही घोषित किया था। इसके बाद उन्होंने सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतेह कर जन-गण-मन राष्ट्रगान गाया था।

नाले के किनारे बैठकर रिश्तेदारों ने की शराबखोरी फिर युवक की गला रेतकर कर दी हत्या : सुबह लहूलुहान हालत में मिला शव

अब तक वह 7 देशों में भारत, नेपाल, रूस, ईरान, किर्गिस्तान, इटली, स्विटजरलैंड की चोटियों पर फतह पा चुके हैं। इसमें एवरेस्ट के अलावा माउंट एवरेस्ट, पीक 6265 मीटर, दमावंड, सबलन, लाबूचे, स्टोक कांगरी, फ्रेंडशिप पीक समेत दूसरे पर्वतों की सफलता पूर्वक चढ़ाई पूरी की थी। वह दुनिया के पहले किन्नरों के दल को पर्वता रोहण कराकर हिमालय की चोटी फतेह कराने का श्रेय भी लिया था।

तीन अवाॅर्ड हासिल कर चुके रत्नेश

रत्नेश पांडेय ने बताया कि उनका शौक सिर्फ ट्रैकिंग करना ही नहीं है। उनकी झोली में बाइक राइडिंग के विश्व स्तरीय खिताब भी है। रत्नेश ने 32.3 किलोमीटर दोनों हाथ छोड़कर मोटर चलाई। दूसरी बार, उन्होंने बाइक के जरिए बगैर रुके175 सर्किल बनाए। तीसरा कमाल उन्होंने पीछे की ओर मुंह करके 14 किलोमीटर मोटर साइकिल चलाई है। तीन करतब दिखाकर तीन विश्व रिकार्ड अपने नाम कर चुके है।

दोबारा प्रयास में हुए कामयाब

रत्नेश पांडेय भारत, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, फ्रांस, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में गठित व एशियन ट्रेकिंग कंपनी नेपाल की संरक्षण में नेपाल के माउंट एवरेस्ट में ट्रैकिंग करने के इरादे से काठमांडू पहुंचे थे। 2015 में नेपाल में भूकंप आने की वजह से एवरेस्ट चढ़ने का सपना पूरा नहीं हुआ था।

तूफान में फंसने से उसका दल से संपर्क टूट गया। यहां घर-परिवार वाले भी चिंतित थे। उस दौरान हुए हादसे में 21 विदेशी पर्वतारोहियों ने जान गंवाई थी। तीन दिन बाद नेपाल सेना का हेलीकॉप्टर रत्नेश को सुरक्षित बेस कैंप ले आया था। बावजूद इसके रत्नेश ने अपना हौसला नहीं खोया। दोबारा प्रयास के बाद फतह हासिल ही कर ली।

बेजुबानों को दिया नया जीवन

रत्नेश ने बताया कि लंदन की संस्था वर्ल्ड बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स द्वारा कोरोना काल में कार्यों की सराहना करते हुए ये सर्टिफिकेट तीन दिन पहले मिला है। इसमें मैंने संस्था रत्नेश पाण्डेय फाउंडेशन के साथ पशु-पक्षियों की सेवा की। रोजाना जानवरों समेत 500 से अधिक आवारा मवेशियों व कुत्तों को भोजन कराकर भूख से मरने से रोकने का प्रयास इंदौर शहर व मालवा क्षेत्र में किया गया था।

Powered by Blogger.