कोरोना इफेक्ट : ठीक होने के बाद अब हेयर फॉल, फ्लैश बैक में जाने, शुगर बढ़ने, सूखी खांसी और वेट लॉस जैसी परेशानियां

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जिन्हें कोरोना हुआ था, अब वे नई परेशानियों से जूझ रहे हैं। इनमें बाल झड़ना, शुगर लेवल बढ़ना, लगातार खांसी चलना जैसी दिक्कतें हो रही हैं। इतना ही नहीं, 0.5 से 1% मरीजों का इलाज तो महीनों तक चल रहा है। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र दवे की मानें तो ज्यादातर मामलों में कोरोना से ठीक होने के बाद एक-दो महीने इलाज की जरूरत पड़ी। हमीदिया के मनोचिकित्सक डॉ. जेपी अग्रवाल ने बताया कि लोगों में पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है।

तीन केस... किसी का लंबे समय से चल रहा है इलाज तो किसी का बार-बार सूख रहा गला

1. तुलसी नगर निवासी पूनम मेहरा और उनके परिवार के पांच लोग अप्रैल में कोरोना पॉजिटिव हुए थे। 20 दिन इलाज चला और सभी ठीक हो गए, लेकिन इसके बाद से इन लोगों के बाल झड़ना शुरू हो गए हैं। यह बाल झड़ना रोकने कई जतन कर चुके हैं, लेकिन फायदा नहीं हुआ। पूनम के भाई दो बार बाल उतरवा चुके हैं, लेकिन जैसे ही उनके बाल बढ़ते हैं, फिर झड़ना शुरू हो जाते हैं।

2. शुगर लेवल लगातार बढ़ा रहता है

कोलार महाबली नगर की अर्चना चतुर्वेदी को अप्रैल में कोरोना हुआ था। 10 दिन जेके अस्पताल में भर्ती रहीं, लेकिन उनका शुगर लेवल लगातार बढ़ा रहता है। खांसी बार-बार हो जाती है। अब तक 13 किलो वजन कम हो गया है। डॉक्टर को दिखाया तो उनका कहना है कि लंग्स का संक्रमण पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ है। लंबे समय तक दवाएं खानी होंगी।

3. बाहर निकलने में लगता है डर

कोलार की अनीता टेकाम (52) को मई में कोरोना हुआ था। 28 दिन तक वे हमीदिया में भर्ती रहीं। अब इतनी दहशत में हैं कि घर से बाहर निकलने में डरती हैं। अस्पताल का वार्ड और मरीज सपने में दिखाई देते हैं। बार-बार गला सूखने और सांस रुकने का एहसास होता है। हमीदिया के मनोवैज्ञानिक विभाग में उनका इलाज चल रहा है।

अब नई दिक्कतें आ रहीं सामने

ये हो रहीं नई परेशानी

बाल झड़ना, फ्लैश बैक में जाना, व्यक्ति का एक्स्ट्रा अलर्ट होना, चीजों को अवॉइड करना, सूखी खांसी लगातार महीनों तक चलती रहना, तेजी से वजन कम होना और ज्वाइंट पेन रहना।

ये हैं पुरानी परेशानी

नींद नहीं आना, मन में बुरे ख्याल आना, नींद में डर जाना, भूख नहीं लगना, सांस नहीं आने का एहसास होना, पेट गड़बड़, गैस बनना, डिप्रेशन, एंजाइटी, सांस फूलना, मल्टीपल बॉडी पेन और कमजोरी।

रोज 4 मरीज बाल झड़ने की समस्या लेकर आ रहे

शासकीय होम्योपैथिक अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुनीता तोमर की मानें तो एक-दाे महीने में ऐसे मरीज बार-बार सामने आ रहे हैं, जिन्हें कोरोना से रिकवर होने के बाद बाल झड़ने की समस्या हो रही है। ऐसे मरीजों को होम्योपैथिक दवाइयों से काफी राहत मिली है। मैं रोज 2 से 4 मरीज अस्पताल में ही देख रही हूं।

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