REWA : रेवांचल बस स्टैंड की सुधरी व्यवस्था : वर्षों से चल रही मनमानी पर लगा विराम, कलेक्टर का अल्टीमेटम; 30 मिनट से ज्यादा बसें खड़ी दिखीं तो होगी कार्यवाही

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रीवा कलेक्टर इलैयाराजा टी के निरीक्षण से बस स्टैंड की व्यवस्थाओं में बदलाव दिखा है। बताया गया कि शहर का सबसे पुराना बस स्टैंड विंध्य क्षेत्र में रेवांचल बस स्टैंड के नाम से मशहूर था। लेकिन वर्षों से यहां की व्यवस्थाएं मनमाने ढंग से चल रही थी।

जिसको बेहतर बनाने के लिए शहर के गणमान्य नागरिकों ने कलेक्टर से शिकायत की थी। ऐसे में बुधवार को रीवा कलेक्टर इलैयाराजा टी ने निरीक्षण किया था। जिसके पहले दिन और दूसरे दिन से ही व्यवस्थाओं में कसावट दिखी है। अव्यवस्थित रूप से अक्सर खड़ी रहने वाली बसें व्यवस्थित नजर आई है।

गौरतलब है कि कलेक्टर के निरीक्षण के समय याताताय पुलिस ने बस संचालकों को निर्देश दिए थे। कहा था कि रवानगी समय से सिर्फ 30 मिनट पहले ही बसें स्टैंड में खड़ी होंगी। अगर पहले से बसें दिखी तो सीधे कार्रवाई होगी। साथ ही यह भी कहा था कि बस स्टैंड के अंदर अब बसें नहीं धुलेंगी। साथ ही बसों की सर्विसिंग नहीं कराएंगे।

नजर आई चौकी पुलिस

कलेक्टर ने बस स्टैंड की व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाने के लिए निरीक्षण किया था। निरीक्षण के समय अव्यवस्थित रूप से खड़ी होने वाली बसों को लेकर कलेक्टर ने नाराजगी दिखाई थी। साथ ही कहा था कि इसे जल्द व्यवस्थित करें। इसके साथ ही सूत्र सेवा संचालन को लेकर भी ​निर्देश दिए थे। ऐसे में चौकी प्रभारी प्रधान आरक्षक सुशील शुक्ला शुक्रवार की सुबह से ही व्यवस्था बनाने में जुटे रहे है।

निकास द्वार से भरी जाती थी सवारियां

बता दें कि रीवा बस स्टैंड में सतना की ओर जाने वाली बसें तो निकास द्वार पर ही सवारियां भरने लगती थी। जिसके कारण जाम ​की स्थितियां निर्मित होती थी। साथ ही बस स्टैंड से बाहर निकलने के बाद सड़क पर भी सवारियों को इंतजार करने की परंपरा बन गई थी। ऐसे में शुक्रवार को बस स्टैंड की ​व्यवस्थाओं को दुरस्त रखने के लिए पुलिस सक्रिय नजर आई। इस सख्ती के ​चलते पहले और दूसरे दिन का नजारा बेहतर रहा। यह बात जरूर है कि यह व्यवस्था कब तक कायम रहती है। कुछ नहीं कहा जा सकता है।

घंटों पहले बस खड़ा करने की रही है परंपरा

बस स्टैंड के जानकारों ने बताया कि अभी तक ग्वालियर, जबलपुर और सतना मार्ग की बसें कई घंटे पहले ही बस स्टैंड के अंदर आकर खड़ी हो जाती थी। ज​बकि नियम के अनुसार यहां पर अधिकतम 30 मिनट ही खड़ी होनी चाहिए। पहले से बने खांचों में इन बसों को खड़े होने से अन्य बसों के लिए स्थान नहीं मिलता था। इसलिए वे इधर उधर खड़ी होती थी।

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