रचना आपकी, मंच हमारा : भोपाल की माधवी रावत; अपनों को दुख, गम परायों को दिए ऐसे भी जिए तो क्या जिए .....

 


घबराना नहीं मुश्किलों को सुलझाना चाहिए

हो कोई भी गम बस मुस्कुराना चाहिए।

रुको मत और चलते रहो

मंजिल है दूर, बस बढ़ते रहो।

माना रास्ते में कांटे बहुत मिलेंगे

होंगे सफल वही जो कांटों की चुभन सहेंगे।

दुखों से घबराना कायरता है

जो डर जाता है, जीते जी मर जाता है।

घबराना नहीं मुश्किलों को सुलझाना चाहिए

हो कोई भी गम बस मुस्कुराना चाहिए।

नहीं ऐसी जिंदगी गम नहीं जिस में

हजारों वादे और कसमे है इसमें।

अपनों को दुख, गम परायों को दिए

ऐसे भी जिए तो क्या जिए।

चाहते हुए भी खुद का मान

मत करो किसी का अपमान।

जिंदगी बहुत हसीन है, गवाना नहीं चाहिए

गम नहीं खुशियां है, इसमें बस जीना आना चाहिए।

घबराना नहीं मुश्किलों को सुलझाना चाहिए

हो कोई भी गम बस मुस्कुराना चाहिए

बस मुस्कुराना चाहिए।।


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