REWA : आनलाइन माध्यम के जरिए रीवा से की गई शुरुआत में आठ प्रदेशों के छात्र एवं वकील ले रहे ज्ञान : अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा

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रीवा। आधुनिक संसाधन का उपयोग करते हुए शिक्षा का एक ऐसा उदाहरण कुछ लोगों ने पेश किया है, जिसमें करीब डेढ़ हजार से अधिक लोगों को इसका फायदा मिल रहा है। जिस जानकारी के लिए कोचिंग क्लास ज्वाइन करनी पड़ती थी, वह अब घर बैठे उपलब्ध हो रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले, विधि छात्र और नए अधिवक्ताओं के लिए यह आनलाइन क्लास काफी लाभदायक साबित हो रही है। पूरी तरह से नि:शुल्क दी जा रही इस शिक्षा में कानून से जुड़े कई बड़े नाम भी शामिल हो रहे हैं।

रीवा से इसकी शुुरुआत की गई थी। हाईकोर्ट में अधिवक्ता रीवा निवासी नित्यानंद मिश्रा ने विधि से जुड़े छात्रों को कानून की बारीकियां बताने के लिए वर्चुअल क्लास की शुरुआत की थी। जिसमें धीरे-धीरे दूसरे जिलों के छात्र भी जुडऩे लगे और अधिकांश कानून जो पूरे देश में एक समान हैं उनकी जानकारी के लिए दूसरे प्रदेशों के लोग भी शामिल होने लगे। वर्तमान में करीब 14 से 15 सौ की संख्या हर दिन वर्चुअल क्लास में लोग जुड़ रहे हैं। जिसमें हिन्दीभाषी प्रांतों के अधिक लोग शामिल होते हैं। मध्यप्रदेश के साथ उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ आदि से लोग जुड़ते हैं।

ये दिखा रहे शिक्षा के नए माध्यम की राह

बिना किसी लागत के छात्रों को ज्ञान देने की शुरुआत करने वाले लोगों ने शिक्षा लेने और देने वालों के लिए नई राह दिखाई है। कानून के अलावा दूसरे विशेषज्ञ अलग वर्चुअल क्लास लेने की शुरआत कर रहे हैं। इसमें प्रमुख भूमिका वाले अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, इंजीनियरिंग कालेज रीवा के प्रो. उत्तम द्विवेदी, एडीपीओ सचिन द्विवेदी, मनोज तिवारी, उमरिया के जिला विधिक सहायता अधिकारी बीडी दीक्षित, विधि कालेज रीवा के प्राचार्य योगेन्द्र तिवारी, रवीन्द्र तिवारी, वीके सिंह, अभिषेक दीक्षित एडीपीओ जबलपुर, नीतेश कृष्णन मंदसौर सहित अन्य कई ऐसे हैं जो नियमित कक्षाएं ले रहे हैं। वहीं हाईकोर्ट के जज, जिलों के पूर्व जज, अधिवक्ता एवं अन्य विशेषज्ञों की भी बीच-बीच में क्लास होती हैं। जस्टिस राजीवलोचन मेहरोत्रा, सिविल जज प्रकाश उइके छिंदवाड़ा, उत्तराखंड के एडीजे अविनाश श्रीवास्तव आदि भी कानून की जानकारी दे रहे।

लॉकडाउन के दिनों से हुई शुरुआत

इस वर्चुअल कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले नित्यानंद मिश्रा ने बताया कि लॉकडाउन के दिनों में लोग अपने घरों में थे, इसलिए समय का उपयोग करने के लिए २० लोगों से इसकी शुरुआत हुई थी। इसमें जुडऩे वालों की संख्या बढ़ी तो कई विधि विशेषज्ञों ने भी पढ़ाने की इच्छा जाहिर की। जिसके चलते अब करीब दर्जन भर लोग पढ़ाने वाले हैं और डेढ़ हजार पढऩे वाले। यह नि:शुल्क शिक्षा है इसलिए कोचिंग का खर्च भी लोगों का बच रहा है।

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