सावधान ! अगर ये है आपका पहला करवा चौथ का व्रत, तो भूलकर भी ना करें ये गलती, नहीं तो ...

करवा चौथ व्रत देश भर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। नई-नवेली दुल्हनें भी करवा चौथ का व्रत बड़ी खुशी और उत्साह से मनाती हैं। शादी के बाद का बहुत सी महिलाएं का पहला करवा चौथ होता है। पहला करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। पर इस बार नई दुल्हनों को करवा चौथ नहीं करना चाहिए। आखिर क्यों, इस बात का खुलासा हम अभी इस खबर में करेंगे।

क्यों न करें नई दुल्हनें करवा चौथ 

इस बार सुहाग का शुभ ग्रह शुक्र अस्त हैं। शुक्र अस्त होने की दशा में सुहाग के व्रत विपरीत फलदायक होते हैं। शुक्र ग्रह 1 नवंबर तक अस्त रहेंगे और उसके बाद उनका उदय होगा। हिंदू धर्म में सौर मंडल में शुक्र अस्त के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। करवाचौथ का व्रत शुरू करना और इसका उद्यापन करना भी शुभ कार्य माने जाते हैं। 

हालांकि इस बार उद्यापन का समय नहीं बच रहा है। इसके कारण पूजा पर कोई नहीं पड़ेगा, किंतु उद्यापन करना और व्रत का आरंभ करना शुभ नहीं माना जाएगा। शुक्र अस्त‍ के दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं। पंडितों ने करवाचौथ के व्रत वाले दिन पूजन से पहले श्री गणेश की विधिवत आराधना की राय दी है। इससे व्रत के अशुभ फल में कमी आएगी। भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। जो महिलाएं इस बार व्रत रख रही हैं वह गणेश भगवान का पूजन अवश्य करें।

विद्वानों के अनुसार जिन युवतियों की नई-नई शादी हुई है और जो पहली बार करवाचौथ का व्रत करने जा रही हैं, उनके लिए इस बार का व्रत शुभ नहीं रह सकता है। इस बार करवाचौथ का व्रत अस्त तिथि में आ रहा है, इसलिए नई दुल्हनों के लिए और उद्यापन के लिए इसे वर्जित माना जा रहा है।

बाकी स्त्रियां इस व्रत को करके अपने पति की दीर्घायु की कामना कर सकती हैं। पर अगर नई-नवेली महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत कर लिया है तो करवा माता की पूजा से पहले गणेश भगवान की आराधना कर अशुभ फल को कम करें। इसके बाद विधिवत पूजा कर व्रत समापन करें।

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