MP : देश का नया चाइना बना जबलपुर : यहां है नकली सामानों का हब, महाकौशल से विंध्य प्रदेश तक फैला है नकली कारोबार : पढ़िए पूरी कहानी...।

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( ग्राउंड एमपी 17 ऋतुराज द्विवेदी की रिपोर्ट ) मध्यप्रदेश में जबलपुर नकली सामान का गढ़ बन गया है। यहां पर चंद मुनाफे के लिए तेल-घी, चायपत्ती लेकर हर सामान नकली बनाते हैं। यहां हर सामान पर लागत और मुनाफे में 80% का खेल है। चलिए जानते हैं कैसे जबलपुर बना नकली सामानों का हब?

जबलपुर में क्यों बनते हैं नकली सामान?

जबलपुर होलसेल का बहुत बड़ा मार्केट है। यहां पर दूर-दूर से व्यापारी आते हैं। ऐसे में नकली सामान को मोटा मुनाफा देकर खपाना बहुत ही सरल है। कटनी में ब्रांडेड कंपनी से मिलते-जुलते नाम का नया उत्पाद बनता है, जबकि जबलपुर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर सब स्टैंडर्ड वाली सामग्री की पैकिंग होती है। इन नकली उत्पाद पर काफी मोटा मुनाफा होता है। यहां हर प्रोडक्ट पर लागत और मुनाफे में 80 प्रतिशत का खेल है। इसलिए अधिक मुनाफे के चक्कर में यहां पर मौत का सामान बनता है।

सबसे ज्यादा बनने वाले सामान

आम आदमी जिन सामानों का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी में करता है, सबसे ज्यादा उन्हीं के नकली सामान बनाए जाते हैं। इन प्रोडक्ट्स में साबुन, क्रीम, तल, घी, टीवी, गद्दे, स्पेयर पार्ट्स, नकली खाद, शहद, चाय पत्ती, सीमेंट, मसाले और सौंदर्य प्रसाधन शामिल हैं।

कहां पर बेचे जाते हैं यह नकली प्रोडक्ट?

जबलपुर में यह नकली सामान मध्यम और गरीब बस्तियों में बेचे जाते हैं। साथ ही यह सामान ग्रामीण इलाकों में भी बेचे जाते हैं। इसके अलावा इन नकली सामानों का कारोबार मंडला, डिंडौरी, नरसिंह, सिवनी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, सतना और नागपुर तक होता है।

नकली सामानों पर मुनाफे का गुणा-भाग

जबलपुर मे हर महीने 200 करोड़ से अधिक नकली सामानों का कारोबार होता है। इसमें नकली सामान बनाने वालों से लेकर उसे दुकानों पर बेचने वाले और खरीदने वाले ग्राहकों तक को फायदा दिया जाता है। इससे होने वाला मोटा मुनाफा दुकानदारों को आकर्षित करता है, वहीं किमतों पर छूट देकर ग्राहकों को लुभाने में मदद मिलती है।

इस धंधे में किस तरह के लोग शामिल?

इस गोरख धंधे में शहर में थोक कारोबार करने वाले और कम उम्र के व्यापारी शामिल हैं। यह लोग कम समय में अमीर बनने का सपना देखते हैं, जिसके लिए ये कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। यह लोग शहर के बायपास से लगे घनी बस्तियों में गोदाम बनाकर अवैध कारोबार करते हैं।

कैसे होता है करोबार?

कटनी का उल्लासनगर नकली कारोबार का अड्डा है। यहां पर ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में नकली सामान पैक किया जाता है। पैकजिंग पर कंपनी के नाम की स्पेलिंग में एक-दो अक्षरों का हेरफेर होता है। इसके अलावा यह प्रोडक्ट्स बकायदा रजिट्रेशन कराकर के बेचे जाते हैं। इस धंधे में सौदर्य प्रसाधन से लेकर मशीनरी तक के प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

कैसे खड़ा हुआ इतना बड़ा कारोबार?

2016 में नोटबंदी के बाद जबलपुर में कई व्यापारियों और कारोबारियों का जमा-जमाया कारोबार बर्बाद हो गया था। इस घाटे से उबरने के लिए और कुछलोग जल्दी अमीर बनने के चक्कर में इस घंघे में उतर आए। दिल्ली, राजस्थान और कटनी के कारोबरियों से धंधे का गुर सीखकर कई नए चेहरे इसमें आए। यह सब कुछ पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे होता रहा।

नकली कारोबार पर कैसे लगाई जा रही है लगाम?

साल 2020 में सत्ता बदलने पर फिर से शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के सीएम बने। जिसके बाद शिवराज सिंह ने मिलावटखोरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जबलपुर में 14 महीनों अंदर 60 से ज्यादा कार्रवाई हुई। शहर में एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने कमान संभालने के बाद क्राइम ब्रांच और लाइन की स्पेशल टीम बनाकर ऐसे कारोबारियों पर धड़ाधड़ कार्रवाई की।

नकली सामान की कैसे पहचान करें?

जबलपुर में बनाए जाने वाले नकली उत्पाद की पैकजिंग हूबहू असली ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की तरह होती। ऐसे में कौन-सा प्रोडक्ट असली है या नकली यह पहचानने में काफी मुश्किल होती है। इन नकली प्रोडक्ट्स को पहचानने आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा:

1. प्रोडक्ट की पैकजिंग पर लिखा कंपनी के नाम की स्पेलिंग और ग्रामर।

2. ट्रेडमार्क धुंधला दिखने पर वेबसाइट से मिलान करें।

3. ब्रांडेड सामान की कीमत चेक करें।

4. संदेह होने पर सैंपलिंग कराए।

5. क्यूआर(QR)कोड स्कैन करके प्रोडक्ट्स का डिटेल देखें।


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