MP : कल से शारदीय नवरात्रि शुरू : माता रानी के दर्शन करने पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु, मैहर वाली माता समेत पांच मंदिरों में ऐसी रहेगी व्यवस्था

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नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से हो रही है। कोरोनाकाल में दो साल भक्तों ने नवरात्रि पर मंदिर से दूर रहे और घर पर रहकर ही आराधना की। इस बार भी कोरोना गाइडलाइन के बीच ही माता के दर्शन होंगे। ऐसे में कई मंदिरों ने व्यवस्थाओं में बदलाव किया है।

दैनिक भास्कर बता रहा है मध्यप्रदेश के 6 बड़े माता मंदिरों में बदली व्यवस्था के बारे में। इनमें मैहर वाली माता, सलकनपुर माता मंदिर, मां बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा, देवास वाली माता, रतनगढ़ माता मंदिर और पीतांबरा पीठ मंदिर दतिया शामिल हैं। देवास वाली माता के 9 दिन 24 घंटे दर्शन होंगे। वहीं, सलकनपुर माता मंदिर 21 घंटे खुला रहेगा।

पीतांबरा माता मंदिर, दतिया

नवरात्रि पर भक्त पीतांबरा माता की 3 आरती में शामिल हाे सकते हैं। सुबह 7 बजे, शाम 7 बजे और रात 9 बजे श्रृंगार आरती में शामिल हो सकते हैं, हालांकि इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में भी एंट्री नहीं होगी। भक्तों को चार मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ेगा। सबसे पहले पश्चिम द्वार के मेन गेट, उसके बाद मंदिर प्रांगण, मंदिर के उत्तर द्वार और फिर मंदिर के भीतरी हिस्से में मेटल डिटेक्टर लगाया गया है।

मंदिर में सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक भक्तों को एंट्री मिलेगी, लेकिन प्रसाद भीतर लेकर जाने की मनाही रहेगी। सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर में 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। भक्तों को मोबाइल, पर्स, बेल्ट बाहर ही रखना होगा।

दीक्षार्थियों के लिए कोरोना टेस्ट और वैक्सीन सर्टिफिकेट जरूरी

दो सालों बाद आवासीय और भोजन व्यवस्थाएं मंत्र दीक्षार्थियों के लिए नवरात्रि से शुरू हो रही हैं। मंत्र दीक्षार्थी वे लोग होते हैं, जो एक प्रक्रिया के तहत मां पीतांबरा मंदिर के दीक्षार्थी बनते हैं। उन्हें कठिन परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है। देश- विदेश में बसे मंत्र दीक्षार्थी नवरात्रि के दिनों में यहां आकर दुर्गा शतचंडी पाठ व पूजन हवन करते हैं। नवरात्रि में यहां आकर तंत्र साधना करने वालों के लिए RT-PCR टेस्ट व वैक्सीन के दोनों डोज लगाए जाने का प्रमाण-पत्र जरूरी है।

मैहर वाली माता

भक्त प्रतिदिन 3 बार माता रानी की आरती में शामिल हो सकते हैं। तड़के सुबह 3.45 बजे, फिर दोपहर में 1 बजे और शाम को 7 बजे। भक्त आरती के बाद रात 10 बजे तक माता के दर्शन कर पाएंगे। माता के दर्शन बाहर लगी रेलिंग से ही कर सकते हैं। यहां प्रसाद तो ऊपर लेकर जा सकते हैं, लेकिन यहां नारियल फोड़ने की मनाही है। भंडारे में एक पंगत में 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है।

मैहर के त्रिकूट पर्वत पर स्थित शारदा वाली माता मंदिर में माता के दर्शन के साथ इस बार भक्त मेले का भी आनंद उठाएंगे। शारदीय नवरात्रि पर माता का श्रृंगार मंदिर समिति की ओर से नहीं किया जाएगा। यदि कोई माता के श्रृंगार की इच्छा जताता है, तो उसे इसकी अनुमति है। श्रद्धालु सीढ़ी, सड़क और रोप-वे के जरिए मंदिर तक पहुंच सकते हैं। माता मंदिर के अलावा मैहर में नीलकंठ आश्रम और आल्हा तलैया भी देखने लायक है।

सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर परिसर में 224 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। एक हजार जवानों के साथ 3 ASP, 12 DSP और SAF की दो कंपनी ड्यूटी में लगाई गई है। प्रतिदिन एक से दो लाख भक्तों के आने के चलते 9 दिनों में 20 लाख भक्तों के आने का अनुमान है। यहां मेटल डिटेक्टर के जरिए चेकिंग की व्यवस्था है। कोरोना जांच और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिहाज से मेडिकल बूथ बनाए गए हैं। डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की शिफ्ट वार ड्यूटी लगाई गई है। मौके पर ही दवाएं भी उपलब्ध रहेंगी। कोरोना जांच के लिए भी अलग से बूथ बनाए गए हैं।

मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा

नलखेड़ा में लखुंदर नदी के तट पर पूर्व दिशा में विराजित मां बगलामुखी में इस बार भक्तों को एंट्री मिलेगी। भक्त सुबह 6 बजे से 6.30 तक और शाम 7.30 से 8 बजे तक आरती में सामूहिक रूप से शामिल हो सकते हैं। सुबह 5 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद से रात 11 बजे तक दर्शन होंगे। भक्त माता को इस बार फूलों से श्रृंगारिक देख सकेंगे। स्वर्ण श्रृंगार के बाद माता को आकर्षक चुनरी चढ़ाई जाएगी।

भक्तों को मंदिर प्रांगण के बाहर लगाए गए बैरिकेड्स से होकर लाइन में गुजरना होगा। गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश निषेध रहेगा। सुरक्षा के लिए प्रवेश द्वार पर पुलिस बल तैनात रहेगा। इनके अलावा मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। इस बार मंदिर में भंडारा नहीं होगा। मंदिर में मास्क लगाना अनिवार्य है। मोबाइल आदि लेकर जाने पर छूट है। यहां पर मेडिकल टीम तैनात रहेगी।

मां बगलामुखी मंदिर के आसपास नलखेड़ा में श्रीनाथ मंदिर, पांडवकालीन बलडावदा हनुमान मंदिर प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा सर्वाधिक प्रसिद्ध जिला मुख्यालय पर इंदौर कोटा राजमार्ग पर स्थित बैजनाथ महादेव मंदिर भक्तों की मुख्य आस्था का केंद्र है।

देवास वाली माता

देवास टेकरी पर भक्तों को माता चामुंडा छोटी माता और मां तूलजा भवानी बड़ी माता के दर्शन होते हैं। भक्त माता के 9 दिन 24 घंटे दर्शन कर सकेंगे, हालांकि गर्भगृह में नो एंट्री है। नवरात्र के एक दिन पहले अमावस्या को माता चामुंडा का श्रृंगार किया गया। सुरक्षा की बात करें तो सीढ़ी द्वार, रपट मार्ग पर विशेष चेकिंग के बाद भक्तों की एंट्री मिलेगी। मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर शाम को पहले बड़ी माता की आरती होती है। सुबह छोटी माता मंदिर में पहले आरती होती है।

कोरोना महामारी को देखते हुए मंदिर पर कोई प्रसाद का आदान प्रदान नहीं होगा। माता टेकरी पर आने वाले दर्शनार्थियों के लिए किसी भी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं है। अधिक भीड़ रही तो कुछ जगह दर्शनार्थियों को भीड़ कंट्रोल करने के लिए रोका जा सकेगा। कोरोना का पालन अनिवार्य रहेगा। माता चामुण्डा व तुलजा भवानी मंदिर के अलावा शहर के मिश्रीलाल नगर में कैला माता मंदिर भी है, जहां दर्शनार्थी माता के दर्शन लाभ ले सकते हैं। टेकरी पर स्वास्थ्य विभाग की टीम की ड्यूटी लगाई जाएगी।

रतनगढ़ माता मंदिर दतिया

रतनगढ़ माता के दर्शन के लिए भक्तों को पहाड़ी पर चढ़ना होता है। यहां पर सुबह 7 बजे और रात 8 बजे आरती होती है। सुबह आरती के दौरान जो श्रृंगार होता है, माता भक्तों को उसी रूप में दर्शन देती हैं। यहां पर भक्तों की चेकिंग 2 मेटल डिटेक्टर के जरिए होती है। मंदिर में भंडारा इस बार भक्तों द्वारा किया जा सकता है, लेकिन मंदिर से परमिशन लेनी होगी।

मंदिर में मोबाइल पर्स बेल्ट इत्यादि की पर को रोक नहीं है। हालांकि माता का फोटो खींचने पर पूरी तरह से पाबंदी है। यहां पर पर मेडिकल टीम की तैनाती रहती है। इस बार रतनगढ़ माता मंदिर पर 700 पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। जिसमें अधिकारी भी शामिल है।

सलकनपुर माता मंदिर

सलकनपुर माता मंदिर में भक्त 9 दिनों तक अलग-अलग श्रृंगारित दर्शन कर पाएंगे। यहां पर लगातार 21 घंटे तक दर्शन होंगे। सिर्फ रात 12 से सुबह 3 बजे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। इस बार भक्तों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना होगा। यहां 300 पुलिस बल तैनात किए गए हैं। यहां पर सुबह 4 बजे दोपहर 12 बजे और शाम 7 बजे आरती होगी। भक्त माता को प्रसाद चढ़ा सकते हैं। यहां पर इस बार भंडारे चलेंगे। मंदिर में किसी प्रकार की अन्य कोई पाबंदी नहीं है। मंदिर में इस बार मेडिकल टीम तैनात रहेगी।

मंदिर में यह रहेगी व्यवस्था

देवीधाम पर्वत पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने के बैंच और विश्राम के लिए धर्मशाला है। भवनों का रंगरोगन किया जा रहा है। मंदिर परिसर में भी श्रद्धालु दर्शन के बाद बैठ सकेंगे। मंदिर के नीचे पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। वाहनों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऊपर पीछे तरफ मंदिर परिसर में पार्किंग रहेगी। सीढ़ियों से लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व्यवस्था रहेगी। मंदिर के गेट के पास सार्वजनिक नल भी लगे हैं। इससे शीतल पेयजल दरबार आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा।

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