Gandhi Jayanti Special : विंध्य की पावन धरती रीवा से था बाबू का खास लगाओ, रीवा में गूंजी थी बापू के लाठी की ठनक : अस्थि कलश के दर्शन को उमड़ पड़ी थी लाखों की भीड़

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रीवा. वैसे तो बापू के डग जिस मग में चले उधर कोटि पग चल पड़े। लेकिन विंध्य के लोगों के लिए गर्व की बात है कि उन करोड़ों पगों में कुछ ऐसे भी पग शामिल रहे, जो यहां की धरती से जुड़े रहे। उन्हें बापू से हमेशा ऊर्जा मिलती रही। भारत छोड़ो आंदोलन में विंध्य क्षेत्र के हजारों लोगों ने अपनी ऊर्जामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उनमें से एक रीवा के पं. चन्द्रकांत शुक्ल, आज भी उन पलों को याद कर ऊर्जावान हो उठते हैं। 14 साल की उम्र में आंदोलन में भागीदारी देकर जेल जाने वाले लगभग 90 वर्षीय पं. शुक्ल बताते हैं कि ... बात 1939 की है। मौका जबलपुर में त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन का था। चाचा पं. शंभूनाथ शुक्ला (पूर्व मुख्यमंत्री विंध्य प्रदेश) के साथ अधिवेशन में शामिल होने गया।

चाचा बापू के बगल में थे और मैं उनके सामने। लाखों की भीड़ थी। उनकी मुझ पर नजर भी नहीं गई।लेकिन मैं उन्हें एकटक निहारता रहा। मुझे उनसे एक ऊर्जा सी मिलती महसूस हुई। उनसे ऐसी प्रेरणा मिली कि मैं उसी पल देश भक्ति से सराबोर हो गया। 

नतीजा तीन साल बाद ही 1942 में जब बापू ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का बिगुल बजाया तो मैं अपने कुछ साथियों के साथ आंदोलन में कूद गया। आंदोलन में भागीदारी के लिए जेल भी जाना पड़ा।बापू के एक दर्शन मात्र से मुझे इतनी प्रेरणा मिली कि आज भी देश के लिए दिल में मर मिटने का जज्बा बरकरार है। यह बात और है कि इन बूढ़ी हड्डियों में अब कुछ करने का दम नहीं रहा। चाचा के मुख्यमंत्रित्व काल में और उसके बाद देश व राज्य की जनता के लिए जो करते बना किया।

रीवा से जुड़ी है बापू की याद

बापू के इशारे में आंदोलन में भागीदारी करने वाले स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि यहां का लक्ष्मण बाग भी बापू की यादों को ताजा करने का काम करता है। लक्ष्मण बाग में बापू का अस्थि कलश रखा गया था। यह स्थान हमेशा के लिए विंध्य क्षेत्र को बापू से जोड़ कर रखने वाला है। जिसके लिए यहां के लोग खुद को गर्वान्वित महसूस करते हैं। याद में यहां वर्ष 1972 में एक शिलापट भी लगाया गया है। प्रशासन के देखरेख में इस स्थान को और भी विकसित करने और दर्शनीय स्थल बनाने की योजना है। इसके लिए विंध्यवासियों की ओर से भी कोशिश जारी है।

बापू को दें सच्ची श्रद्धांजलि

बापू के पंचतत्व में विलीन होने के बाद विश्व स्तर के वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि 'आने वाली पीढ़ी शायद ही इस बात को विश्ववास कर पाएगी कि ऐसा भी कोई हाड़ मांस का पुतला इस धरती पर चला होगा। यह अल्बर्ट की बापू के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। इस बात को दुहराते टीआरएस कॉलेज के प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. पीके सरकार कहते हैं कि समूचे विंध्य क्षेत्र में बापू के जयंती पूरे श्रद्धाभाव से बड़े स्तर पर मनाई जाती है। हमें इस बात को याद रखना होगा कि इस धरती पर बापू जैसे सपूतों ने जन्म लिया है। यही विंध्य क्षेत्र के लोगों का उनके प्रति विंध्य क्षेत्र की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लक्ष्मणबाग का बापू भवन दिलाता है राष्ट्रपिता की याद

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित कवि सोहनलाल द्विवेदी की कविता 'चल पड़े जिधर दो डग मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर वर्षों पहले उस समय यहां रीवा में चरितार्थ हो गई थी, जब बापू का अस्थि कलश यहां दर्शन के लिए रखा गया। बापू के दो डग यहां रीवा में भले ही नहीं पड़े हों। लेकिन शहर में स्थित लक्ष्मण बाग मंदिर परिसर में स्थित बापू भवन रीवा के युवाओं को न केवल बापू की याद दिलाता है बल्कि उन्हें बापू के बताए रास्तों पर चलने को प्रेरित भी करता है। इस बापू भवन में लिखा हे राम यहां के लोगों को बापू से जोड़े रखता है।

अस्थि कलश ले जा रहे थे संगम

बताते हैं कि बापू का अस्थिकलश प्रयाग नगरी संगम में विसर्जन के लिए ले जाते समय लक्षमण बाग संस्थान में लोगों के दर्शनार्थ रखा गया था। बापू के अस्थिकलश के पहुंचने की खबर लगते ही शहरवासियों के साथ आस-पास के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। लोगों के दर्शन के बाद अस्थिकलश प्रयागनगरी के लिए ले जाया गया।

याद में लगाया गया शिलापट्

बापू का अस्थिकलश यहां दर्शनार्थ रखा गया था कि याद हमेशा ताजा रहे। इसको लेकर बापू भवन में वर्ष 1972 में एक शिलापट भी लगाया। प्रशासन द्वारा इसे दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। जिसको लेकर प्रयास भी शुरू कर दिए गए हैं। एक वर्ष पहले खंडहर में तब्दील हो चुके बापू भवन का पुनर्निमाण कराया जा चुका है।

अब बना पुलिस कैम्प

लक्ष्मणबाग मंदिर परिसर में महात्मा गांधी की याद में बनाया गया बापू भवन वर्तमान में पुलिस कैम्प बन गया है। जानकारी दी गई है कि लक्ष्मणबाग मंदिर में चोरी होने के कारण प्रशासन ने यहां पर पुलिस की ड्यूटी लगा दी थी। यहां मंदिर की सुरक्षा में रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए यह कक्ष अब निवास बना है। पुलिसकर्मी मंदिर की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं।

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