REWA EXCLUSIVE : जल बंटवारे में कटौती : MP को 50 % तो यूपी-बिहार को दिया जाता है 25-25 % जल : पढ़िए पूरी खबर

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इस साल पिछले साल की तुलना में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार को बाणसागर का कम जल मिलेगा। वजह है, विंध्य क्षेत्र में कम बारिश। क्षेत्र में चालू वर्ष 2021 में जल का बंटवारा हो गया है। अफसरों की मानें तो हर साल 1 नवंबर की स्थिति में पानी का बंटवारा तीनों राज्यों के बीच हो जाता है। इसके अनुसार इस साल प्रदेश को बाणसागर से 1885.83 एमसीएम (मिलियन घन मीटर) और यूपी-बिहार को 992.915-992.915 एमसीएम पानी ​दिया जाएगा।

बता दें कि अंतरराज्यीय बाणसागर परियोजना के पानी में 3 राज्यों का हिस्सा है। बांध के अंदर भरे पानी में 50% मध्यप्रदेश व 25%-25% पानी उत्तर प्रदेश और बिहार को दिया जाता है। 15 अक्टूबर तक मानसून सत्र रहने के बाद 1 नवंबर को 3 राज्यों के मध्य पानी का बंटवारा किया जाता है। 1 नवंबर को बाणसागर का जलस्तर 339.97 मीटर था। जिसमें कुल 4417.24 एमसीएम पानी भरा था।

एक मीटर नीचे से होता है पानी का बंटवारा

गौरतलब है कि 1 नवंबर की स्थिति में बाणसागर का जो जलस्तर रहता है। उसस, 1 मीटर नीचे से बंटवारा किया जाता है। ऐसे में 339.97 मीटर जलस्तर होने पर 338.97 मीटर भरे पानी का विभाजन ​किया गया। जल स्तर के अनुसार बांध में 4417.24 एमसीएम की जगह 3971.66 एमसीएम पानी आया है, जबकि 446 एमसीएम पानी साल भर वाष्प से उड़ने के लिए छोड़ दिया गया। अंतत: 3971.66 एमसीएम बचे पानी का तीनों राज्यों में विभाजन कर दिया गया। इसमें एमपी को 1850.53 एमसीएम और यूपी-बिहार को 992.915-992.915 एमसीएम पानी मिला।

2020 में एमपी को मिला था 1950 एमसीएम पानी

पिछले साल मध्य प्रदेश को बाणसागर से करीब 1950 एमसीएम पानी मिला था, लेकिन इस साल रीवा, सतना, शहडोल और उमरिया जिले में औसत वर्षा कम होने की वजह से एमपी के पानी में 100 एमसीएम की कटौती होगी। दरअसल, बारिश कम होने से इस साल बाणसागर बांध पूरी तरह से नहीं भर पाया है।

फुल भराव पर मिलता 2250 एमसीएम पानी

अधिकारियों का दावा है कि जब बाणसागर में फुल जल भराव रहता है, तो मध्यप्रदेश को 2250 एमसीएम पानी दिया जाता है, जबकि इसी स्थिति में यूपी-बिहार को 1125-1125 एमसीएम पानी मिलता है। लेकिन बारिश की वजह से तीनों राज्यों को सामान्य से कम पानी मिलेगा।

एमपी के हिस्से के 32 % पानी से बनती है बिजली

मध्यप्रदेश के हिस्से में बाणसागर से मिलने वाले जल से 32 प्रतिशत पानी से बिजली का उत्पादन किया जाता है। जिम्मेदारों की मानें तो ​इस वर्ष एमपी को जितना पानी मिल रहा है। उसमे विद्युत परियोजनाओं को 603 एमसीएम पानी दिया जाएगा। हालांकि अगर बेमौसम बारिश हुई, तो थोड़ा बहुत इसकी भरपाई हो सकती है।

68 % पानी दिया जाता है किसानों को

विद्युत उत्पादन से बचने वाले 68 फीसदी बाणसागर का पानी किसानों के लिए आरक्षित रहता है। जो रीवा संभाग के सतना, रीवा और सीधी सहित शहडोल संभाग के किसानों के खेतों की सिंचाई नहरों के माध्यम से की जाती है। साथ ही, कई जगहों पर पीने के लिए पानी दिया जाता है।

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