MP : मां सीता को लंका से लाने के लिए बनाए गए रामसेतु पत्थरों पर होगी रिसर्च : अगर यह रिसर्च सफल रही तो पानी में तैरने वाले पत्थर, पुल-पुलिया और मकान बनेंगे

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भगवान श्रीराम ने मां सीता को लंका से लाने के लिए बनाए गए रामसेतु पर उज्जैन की विक्रम विश्वविद्यालय और शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज इस पर रिसर्च की जाएगी। इसमें पता लगाया जाएगा कि रामसेतु में लगा पत्थर किस पदार्थ का बना है। अगर यह रिसर्च सफल रही तो हल्के पुल-पुलिया और मकान बनेंगे।

भारत के दक्षिण-पूर्व में रामेश्वरम् से श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच चट्‌टानों की चेन है। इसे रामसेतु बताया जाता है। हालांकि आधुनिक इतिहासकार इसे एडम्स ब्रिज कहते हैं। इसकी लंबाई करीब 48 किमी है। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार और नए पाठ्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। अभी हमने राम चरित मानस में डिग्री पाठ्यक्रम शुरू किया है, लेकिन हम रामायण काल में बने रामसेतु का भी अध्ययन करना चाहते हैं।

इसके पीछे उद्देश्य उस पत्थर के बारे में जानना है, जिससे पत्थर तैयार हुआ है। इसरो, नासा, आईआईटी सहित अन्य कई एजेंसियों ने यह तो पता लगा लिया है कि यह पत्थर प्यूबिक मटेरियल से बना है। रिसर्च में समझने की कोशिश की जाएगी कि पत्थर का स्ट्रक्चर क्या है। वह कितना भार सह सकता है। यदि हम उस स्ट्रक्चर को लैब में बना सके, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। इसे भूकंप वाले क्षेत्रों में प्रयोग करना प्रासंगिक होगा।

दरअसल, यदि इसमें कामयाब हो जाते हैं, तो ऐस मटेरियल प्रयोग कर देश में कम वजन वाले पुल-पुलिया और बिल्डिंग बना सकेंगे। हम इसकी लागत पर भी रिसर्च करेंगे। जरूरत पड़ी तो हम छात्रों को रामेश्वरम् टूर भी भेजेंगे, ताकि छात्र हकीकत पता कर सकें, जबकि शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. गणेश अहिरवार ने कहा कि हम इस विषय में रिसर्च भी करेंगे, पेपर भी पब्लिश कराएंगे। इसके परिणाम आने में एक साल का समय लगेगा।

सभी संसाधनों का उपयोग करेंगे

विक्रम विश्वविद्यालय ने रामचरित मानस पर पाठ्यक्रम इसी वर्ष शुरू किया है, यह थ्योरिटिकल है, लेकिन रामसेतु पर हम प्रैक्टिकल करना चाहते हैं। विश्वविद्यालय व इंजीनियरिंग कॉलेज के संसाधनों का इस्तेमाल कर हम इसे पूरा करने की कोशिश करेंगे।

प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय, विक्रम विवि, उज्जैन

विवि के साथ एक्सचेंज प्रोग्राम चलाएंगे -

हम पत्थर का मटेरियल चैक करेंगे। इसके लिए हमें संसाधनों की जरूरत होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय से एमओयू साइन किया है। इसमें इंजीनियरिंग कॉलेज और विक्रम विश्वविद्यालय के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम चलेगा।

डॉ. गणपत अहिरवार, डायरेक्टर, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन।

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