MP : छतरपुर में खाद की मारामारी : बोली- खाद नहीं मिली तो फीस कैसे भरेंगे, दो माह से परेशान है किसान

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महाराजा कॉलेज में पढ़ती हूं। खाद लेने के लिए दो घंटे से लाइन में लगी हूं। आखिर पापा कई दिनों से लाइन में लगते रहे, लेकिन खाद नहीं मिली। इस कारण पढ़ाई छोड़कर मैं भूखे-प्यासे यहां खड़ी हूं। 1200 रुपए वाली खाद की बोरी 1400 में मिल रही है, उसके लिए भी परेशान हो रहे हैं। ये कहना है रीना अहिरवार का। वह क्लास छोड़कर खाद के लिए लाइन में लगी थी। यह किसी एक रीना की कहानी नहीं है, दतिया में भी एक छात्रा रात 11 बजे खाद लेने पहुंची थी। ऐसे हालात इन दिनों प्रदेश के हर जिले में देखे जा सकते हैं।

रीना छतरपुर के सटई रोड स्थित सेवा सरकारी समिति बगौता वेयर हाउस में कॉलेज छोड़कर खाद लेने आई थी। उसका कहना है कि पिता की मजबूरी देखकर खाद के लिए लाइन में लगना पड़ा। अगर किसानी नहीं हुई, तो पढ़ाई के लिए पैसे कहां से आएंगे। किसानी से परिवार का गुजर बसर होता है। खाने को कहां से लाएंगे, इसलिए मजबूर होकर लाइन में लगना पड़ा। मेरे पिता कई बार खाद के लिए लाइन में लगे, लेकिन भीड़ होने के कारण उन्हें खाद नहीं मिली, इसलिए मुझे क्लास छोड़कर आना पड़ा।

बता दें कि छतरपुर में खाद और डीएपी को लेकर किसानों की जद्दोजहद खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दो महीने से खाद को लेकर यह मशक्कत जारी है। किसान खाद और डीएपी की आस में सुबह से ही सरकारी वेयरहाउस या समिति व्यवसायों में चक्कर लगाने लगते हैं।

दतिया में रात 11 बजे छात्रा ने खरीदी खाद

रात 11 बजे 20 साल की युवती चित्रांशी पुत्री नरेंद्र निवासी वानोली गांव खाद लेने पहुंची थी। उसने बताया कि उसके घर परिवार में अन्य कोई पुरुष सदस्य नहीं है। खेत बंटाई पर दे रखा है। वह बीकॉम के द्वितीय वर्ष की छात्रा है। ऐसे में उसे खुद खाद लेने आना पड़ा।

वितरण संघ व कृषि विभाग के अधिकारियों ने उसको बैठाकर आधार कार्ड नंबर लेकर खाद आवंटित कर दिया। इसी तरह एक अन्य महिला किरण देवी पति सियाशरण निवासी खिरिया गांव खाद लेने पहुंची थी। उसका कहना था कि घर के पुरुषों को समय पर खाद नहीं मिल पाता है, इसलिए वह खुद ही खाद लेने आ गई।

महिलाओं काे खाद लेने भेज रहे

उप संचालक कृषि कल्याण विभाग डीके सिद्धार्थ का कहना है कि किसान अपने परिवार की महिलाओं को खाद के लिए भेज रहे हैं। ऐसे में हमें भी देर रात तक खाद वितरण करना पड़ रहा है। महिलाओं के लिए हमने विशेष व्यवस्था की है। उन्हें लाइन में न लगाते हुए सीधे कार्यालय में बुलाकर ही खाद की पर्ची आवंटित कर दी जाती है।

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