REWA : अब हार्ट अटैक आने पर अस्पताल पहुंचने से पहले इंजेक्शन से बचेगी जान : अब प्रदेश में पहला और देश का 13वां स्टेमी प्रोजेक्ट रीवा में होगा लागू

ख़बरों के बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए डाउनलोड करें Rewa News Media ऐप, क्लिक करें

रीवा। हार्ट की समस्या अब हर उम्र के लोगों को हो रही है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने की वजह से मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस पर नियंत्रण के लिए केन्द्र सरकार का एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है, जिसमें रास्ते में ही विशेषज्ञों की देखरेख में इंजेक्शन दिया जाएगा ताकि अस्पताल पहुंचने तक मरीज की हालत 

को स्थिर रखा जा सके। इसके लिए स्टेमी प्रोजेक्ट(एसटी एलीवेशन मायोकार्डियल इंफ्रक्शन) लागू किया जा रहा है। इसका फायदा शहर के बाहर के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। अभी हार्ट अटैक होने की स्थिति में अस्पताल पहुंचने में कई बार तीन से चार घंटे तक का समय भी लग जाता है। पहले लोग अपने आसपास के स्थानीय अस्पताल में लेकर पहुंचते हैं जहां पर कुछ समय के बाद रेफर किया जाता है तो मेडिकल कालेज लेकर आते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक हार्ट अटैक के मरीजों के लिए आधे घंटे का समय गोल्डन आवर माना जाता है। इस आधे से एक घंटे के बीच यदि मरीज को इलाज मिल जाए तो करीब 90 प्रतिशत मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से सरकार देश के कई प्रमुख क्षेत्रों में स्टेमी केयर प्रोजेक्ट लागू किया है।

प्रदेश में रीवा से शुरुआत

मध्यप्रदेश में बहु विषयक अनुसंधान इकाई(एमडीआरयू) श्यामशाह मेडिकल कालेज रीवा के संजयगांधी अस्पताल में स्थित है। यहां पर रिसर्च के लिए विशेषज्ञ भी तैनात हैं। देश के जिन राज्यों में एमडीआरयू है, वहां पर स्टेमी केयर प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसी वजह से रीवा को भी यह उपलब्धि मिली है। प्रदेश का पहला और देश का १३वां स्थान रीवा होगा जहां पर इसे लागू किया जा रहा है। यहां के अलावा दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हिमांचल प्रदेश आदि प्रमुख राज्यों में संचालित है। मध्यप्रदेश के रीवा को दूसरे चरण में शामिल किया गया है।

सामुदायिक अस्पतालों में उपलब्ध कराए जाएंगे संसाधन

श्यामशाह मेडिकल कालेज रीवा के सुपर स्पेशलिटी में हार्ट रोग का इलाज होता है। यहां पर जिले भर से लोग लाए जाते हैं। स्टेमी प्रोजेक्ट के तहत जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में हार्ट अटैक के दौरान प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। जिसके लिए संसाधन मुहैया कराए जाएंगे। जैसे ही किसी व्यक्ति को सीने में दर्द या हार्ट अटैक के लक्षणों का पता चलेगा। वह 108 एंबुलेंस को फोन करेगा। एंबुलेंस में ही मरीज की इसीजी की जाएगी। इसके लिए एंबुलेंस में भी स्टेमी किट लगाए जाएंगे। शुरुआती दौर में ही इस प्रोजेक्ट में करीब ढाई करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों की देखरेख में दिए जाएंगे इंजेक्शन

जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सरकारी एंबुलेंस में इसीजी की व्यवस्था रहेगी। वहां पर जांच होते ही उसकी रिपोर्ट सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टर्स के पास पहुंच जाएगी। इसीजी देखने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सक अविलंब उसकी पहचान कर एंबुलेंस या सीएचसी में मौजूद स्टाफ को उपचार के लिए निर्देश देंगे। मरीजों को टेनेक्टा प्लेज नाम का इंजेक्शन दिया जाएगा। मरीज की हालत यदि अधिक खराब होगी तो विशेषज्ञों के निर्देश के आधार पर मरीज को थ्रंबोलिसिस के माध्यम से स्टेबलाइज किया जाएगा, ताकि वह रीवा तक पहुंच सकें। प्रोजेक्ट की शुरुआत में दूसरा इंजेक्शन दिया जा रहा था, इसके परिणाम सही नहीं होने की वजह से नया इंजेक्शन सरकार ने स्वीकृत किया है। इसकी कीमत करीब २५ हजार बताई जा रही है, जिसका खर्च सरकार देगी।

इन चिकित्सकों की देखरेख में संचालित होगा प्रोजेक्ट

रीवा में शुरू होने जा रहे स्टेमी प्रोजेक्ट की निगरानी एमडीआरयू के प्रमुख डॉ. सुधाकर द्विवेदी, हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. वीडी त्रिपाठी, डॉ. केडी सिंह, डॉ. एसके त्रिपाठी, वैज्ञानिक डॉ. संजय पाण्डेय, विनीत शाह शामिल रहेंगे। इसके अलावा सामुदायिक अस्पतालों में डॉ. रामचंद्र पटेल नईगढ़ी, डॉ. अग्निवेश मिश्रा जवा, डॉ. सीएम मिश्रा गंगेव, डॉ. श्याम बिहारी त्योंथर, डॉ. हरीश सोनी हनुमना, डॉ. विवेक पटेल रायपुर कर्चुलियान, डॉ. आरके ओझा सिरमौर, डॉ. सुधाकर पाण्डेय गोविंदगढ़, डॉ. पंकज पाण्डेय मऊगंज आदि को शामिल किया गया है।

स्टेमी प्रोजेक्ट देश के चिन्हित मेडिकल संस्थानों के माध्यम से शुरू किया गया है। दूसरे चरण में रीवा को भी शामिल किया गया है। जल्द ही इस पर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। हार्ट अटैक के दौरान मरीजों को त्वरित सुविधा मिलेगी।

डॉ. मनोज इंदुरकर, डीन एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा

Powered by Blogger.