सिक्कों को लेकर मनमानी : गांव हो या शहर नहीं दे रहा सिक्कों पर कोई ध्यान; 1, 2,5 और 10 के सिक्के बंद : क्या कहती है जनता ?

जयपुर. किराना व्यापारी की दुकान हो, दूध डेयरी हो, ठेले वाले हों या फिर सरकारी कार्यालय, इन सभी जगहों पर पिछले कई महीनों से सिक्कों का चलन अघोषित रूप से बंद हो गया है। एक ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपनी मर्जी के मुताबिक सिक्के चलाते हैं। ये सिक्के 1, 2, 5 और 10 रुपए के हैं। इससे पहले 50 पैसे का सिक्का भी चलन से बाहर हो गया है। हालात ये हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इन्हें बंद नहीं किया है, लोगों ने अपने हिसाब से ही और खुल्ले के चक्कर में इन सिक्कों को लेना बंद कर दिया है। ये स्थिति किसी एक शहर या गांव की नहीं बल्कि पूरे देश की है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

आज के समय में एक, दो, 5 और 10 रुपए के सिक्के के लिए के लिए दुकानदार से लेकर सरकारी कार्यालय तक में सब आनाकानी करते हैं। इसका मुख्य कारण है कि उत्पादन की बिक्री पर मुनाफा कम होना, साथ ही इनके गिनने में परेशानी होना।

यहां नहीं चलते सिक्के

जयपुर शहर में 1, 2 और 5 रुपए के छोटे सिक्के कई इलाकों में नहीं चलते हैं, जिसमें चारदीवारी क्षेत्र, झालाना, विद्याधर नगर, सोडाला, जगतपुरा, वैशाली, झोटवाड़ा, मुरलीपुरा, विद्याधरनगर, सांगानेर आदि क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा जयपुर के आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों में 10 रुपए का सिक्का भी नहीं चलता है। दौसा, बांदीकुई, महुआ, करौली, अलवर, शाहपुरा, विराटनगर, सीकर आदि जगहों पर 10 रुपए का सिक्का लेने से भी दुकानदार मना कर देते हैं। सबसे अधिक परेशानी एक रुपए के छोटे सिक्के को लेकर होती है।

नोमिनेशन करने वाले करते हैं इस्तेमाल

कई चुनाव लडऩे वाले लोग नामांकन करने जाते समय चर्चा में बने रहने के लिए हजारों रुपए के सिक्के ले जाते हैं, जिन्हें गिनने में जिला प्रशासन के लोगों का काफी समय लगता है। इसके साथ ही लोग अब सिक्कों को मंदिर या अन्य धार्मिक स्थानों पर ही चढ़ाने के काम लेते हैं।

ऐसे होती है परेशानी

दुकानदारों द्वारा सिक्के नहीं लेने से आमजन परेशान होता है। कई बार सिक्के नहीं लेने के कारण लोगों में आपसी झगड़ा तक हो जाता है। शहर के एक हिस्से में सिक्के चलन में होते हैं तो दूसरे हिस्से में नहीं। लोगों का कहना है कि उनके पास हजारों रुपए के सिक्के जमा हैं, लेकिन अघोषित रूप से लोगों ने उन्हें चलन से बाहर कर दिया है।

छोटे सिक्कों के चलन में परेशानी ज्यादा

एक रुपए, दो रुपए और 5 रुपए के छोटे सिक्कों को लेकर परेशानी अधिक होती है। इसके साथ ही 10 रुपए के सिक्के भी कई जगह चलन से बाहर हो गए हैं।

इस वजह से नहीं लेते सिक्के

- सिक्कों को गिनने में परेशानी होती है

- सिक्कों को गिनने की मशीन नहीं है

- सिक्कों में वजन अधिक होता है

- लोग सिक्कों को जेब में रखना पसंद नहीं करते

- महंगाई अधिक होने से 1,2 और 5 रुपए की कीमत का सामान कम मिलता है

हो सकती है कार्रवाई

कानूनन नोट या सिक्कों का जाली मुद्रण, जाली नोट या सिक्के चलाना, सिक्कों को लेने से मना करना अपराध है। ऐसा करने पर जुर्माना, कैद या दोनों का प्रावधान है। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

ये हैं हालात

टोल पर सिक्के नहीं लेने पर डॉक्टर से विवाद

चंदवाजी स्टेट हाईवे पर बांसा कुशलपुरा टोल पर 15 दिसम्बर देर शाम टोल कर्मचारियों ने मानपुरा माचेड़ी निवासी डॉ. जितेंद्र यादव के साथ मारपीट की। वे अपनी पत्नी के साथ चौमूं जा रहे थे। टोल कर्मचारियों ने टोल शुल्क के लिए सिक्के देने पर मना कर दिया और डॉक्टर से कहासुनी करने लगे। इस दौरान दौरान टोल कर्मचारियों ने उसके साथ मारपीट की। मामले में दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज करवाया गया है।

उन्होंने टोल शुल्क के लिए 10-10 रुपए के 2 सिक्के और 5-5 रुपए के 2 सिक्के दिए। इस पर टोल कर्मचारी ने सिक्के लेने से मना कर दिया।

यहां भी पुलिस तक पहुंचा मामला

कुछ दिन पूर्व सवाई माधोपुर में एक छोटे दुकानदार से एक बच्चे ने 12 रुपए की खाद्य सामग्री खरीदी, बच्चे ने उसे सिक्के देना चाहा तो दुकानदार ने सामान देने से मना कर दिया था। इस पर बच्चे के अभिभावक ने पुलिस चौकी सवाई माधोपुर शहर में शिकायत लिख कर दी।

लेने चाहिए सिक्के

जब तक रिजर्व बैंक सिक्कों को बंद नहीं करती, तब तक सभी व्यापारियों को इन्हें लेना चाहिए। यदि कोई नहीं लेता है तो वह गलत है। बैंकों को भी व्यापारियों से सिक्के लेने चाहिए।

रामप्रसाद कारोडिय़ा, महामंत्री, हल्दियों का रास्ता व्यापार मंडल

नहीं चलते सिक्के

1 , 2 और 5 रुपए के छोटे सिक्के बाजार में नहीं चल रहे हैं। ग्राहक से ले लेते हैं तो उन्हें आगे चलाने में परेशानी होती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

संतोष अग्रवाल, ठेला व्यवसायी

आमजन परेशान

बस चालक ने टिकट के साथ 1-1 रुपए के पांच सिक्के दिए, लेकिन अब उन्हें कोई दुकानदार नहीं ले रहा है। ऐसे में आमजन को परेशानी होती है। सरकार को इस ओर कोई कदम उठाना चाहिए।

पुलकित, यात्री

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