जॉनी क्रिप्टोकरेंसी कैसे काम करती है आप कैसे खरीद भेज सकते हैं....


इंदौर साइबर सेल ने क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड केस में सॉफ्टवेयर डेवलपर संदीप गौतम को पकड़ा है। संदीप ने जापानी कंपनी के क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट से 6.7 करोड़ की धोखाधड़ी की है। उसी ने जापानी क्लाइंट का सॉफ्टवेयर डेवलप किया था। क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन में एक्सपर्ट आरोपी ने क्लाइंट के डिजिटल अकाउंट को हैंडल करने के दौरान वॉलेट में फर्जी यूजर क्रिएट कर दिए थे। फिर 25 बीटीसी बिटकॉइन और 30 ईटीएच पत्नी, मां और अन्य परिजन के क्रिप्टो वॉलेट के जरिए खातों में जमा कराए।

अब आपके मन में कई तरह के सवाल आ रहे होंगे कि आखिर ये क्रिप्टोकरेंसी है क्या बला? इसका इस्तेमाल क्या है? भारत में कैसे खरीदा-बेचा जा सकता है? आइए, आपको बताते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी क्या होती है...

साइबर सेल के SP जितेंद्र सिंह से समझिए :-

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर हमारे देश में कोई गाइडलाइन या कानून नहीं है। जल्द इसे लेकर कानून लाने की बात जरूर चल रही है। कई देश जैसे- जापा और जर्मनी में इसे लीगल दर्जा प्राप्त है।

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी?

क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की वर्चुअल करेंसी होती है। इसे डिजिटल करेंसी भी कहा जाता है। डॉलर या रुपए जैसी करेंसी की तरह क्रिप्टोकरेंसी से भी लेन-देन किया जा सकता है। दुनिया में इस वक्त 4 हजार से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी चलन में हैं। बिटकॉइन इनमें सबसे पॉपुलर क्रिप्टोकरेंसी है। हर बिटकॉइन ट्रांजेक्शन ब्लॉकचेन के जरिए पब्लिक लिस्ट में रिकॉर्ड होता है। डॉलर या रुपए जैसी करेंसी की तरह क्रिप्टोकरेंसी से भी लेन-देन किया जा सकता है।

जानिए, ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी क्रिप्टोकरेंसी खरीदने-बेचने के लिए एक ब्लॉक इलेक्ट्रिक सिस्टम है। आसान शब्दों में कहा जाए तो यह एक प्लेटफॉर्म है, जहां न सिर्फ डिजिटल करेंसी बल्की किसी भी चीज को डिजिटल बनाकर उसका रिकॉर्ड रखा जा सकता है। ब्लॉक का मतलब ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी में बहुत सारे डेटा ब्लॉक से है। इन ब्लॉक्स में क्रिप्टोकरेंसी यानी डेटा रखा जाता है। डेटा की एक लंबी चैन बनते जाती है। जैसे ही नया डेटा आता है, उसे एक नए ब्लॉक में दर्ज किया जाता है। एक बार जब ब्लॉक डेटा से भर जाता है तो इसे पिछले ब्लॉक से जोड़ दिया जाता है। इसी तरह सारे ब्लॉक्स एक-दूसरे जुड़े रहते हैं।

100 रु. में भी खरीद सकते हैं क्रिप्टोकरेंसी का एक हिस्सा

प्लेस्टोर पर ऐसे कई ऐप हैं, जिनके जरिए आप क्रिप्टोकरेंसी खरीद-बेच सकते हैं। जैसे- क्वाईन डीसीएस, वजीर एक्स, क्वाईन सिक्योरेट, जेप पे, यूनोकॉइन ऐप। मान लीजिए, आपने वजीर एक्स ऐप इंस्टॉल किया है। अब करना ये होगा इसमें आपको अपना फोन-पे या पेटीएम है तो इसका नंबर एड करना होगा। नाम, उम्र भी। KYC (मतलब अपने ग्राहक को जानने का प्रपत्र) भी अपडेट करना होगा। इसके बाद आप इस ऐप पर ई-वॉलेट बना सकते हैं। इसके जरिए क्रिप्टोकरेंसी खरीद-बेच सकते हैं। खास बात यह है कि अगर आपके पास 100 रुपए भी हैं, तब भी आप क्रिप्टोकरेंसी का कुछ हिस्सा (जितना 100 रुपए के हिसाब से बनेगा) भी खरीद सकते हैं। बस, देश के नियम-कानून ध्यान में रखने होते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी में बिटकॉइन सबसे पॉपुलर

दुनिया में इस वक्त 4 हजार से ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी चलन में हैं। बिटकॉइन इनमें सबसे पॉपुलर क्रिप्टोकरेंसी है। इसकी इंटरनेशनल मार्केट में 42 लाख रुपए कीमत है। दूसरी क्रिप्टोकरेंसी टीथई है। इसकी अनुमानित कीमत में 3 लाख से अधिक है। इसके बाद मोनटेरा और यूएसडीटी हैं।

शेयर मार्केट से आसान प्रोसेस

यह जानकारी सामने आई है कि यूथ क्रिप्टोकरेंसी में पैसा बनाने के लिए आगे आ रहा है। इसके लिए किसी एडवाइजर की जरूरत नहीं होती है। ऐप पर ही क्रिप्टोकरेंसी की घटती-बढ़ती कीमतों की जारकारी मिल जाती है।

RBI करती है निगरानी

2018 में RBI ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें RBI ने सभी वित्तीय संस्थानों से क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी सेवा प्रदान करने पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल फरवरी में RBI की ओर से लगाए गए प्रतिबंध को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत में क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार हो रहा है। सरकार ने 2019 में भी क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने और इसको आपराधिक बनाने के लिए बिल तैयार किया था। हालांकि, यह बिल संसद में पेश नहीं हो पाया था।

2009 से आई प्रचलन में आई

क्रिप्टोकरेंसी 2009 से प्रचलन में आई। हांगकांग और यूरोप में यह वायदा बाजार के रूप में प्रचलन में है। यह वर्ल्डओवर में इन्हीं नामों से चल रही है। यहां बैंक खातों से भी इसे सीधे जोड़ा जा रहा है।

क्रिप्टोकरेंसी का इतिहास

1983 में सबसे पहले अमेरिकन क्रिप्टोग्राफर डेविड चाम ने ई-कैश (ecash) नाम से क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक मनी बनाई थी।

1995 में डिजिकैश के जरिए इसे लागू किया गया।

इस पहली क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक मनी को किसी बैंक से नोटों के रूप में विड्रॉल करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता थी।

यह सॉफ्टवेयर पूरी तरह से एनक्रिप्टेड था। सॉफ्टवेयर के जरिए क्रिप्टोग्राफिक इलेक्ट्रॉनिक मनी प्राप्त करने वाले को एनक्रिप्टेड-की यानी खास प्रकार की चाभी दी जाती थी।

इस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से पैसा जारी करने वाला बैंक, सरकार या अन्य थर्ड पार्टी ट्रांजेक्शन को ट्रैक नहीं कर पाते थे।

1996 में अमेरिका की नेशनल सिक्युरिटी एजेंसी ने क्रिप्टोकरेंसी सिस्टम के बारे में बताने वाला एक पेपर पब्लिश किया।

2009 में सातोशी नाकामोतो नाम के वर्चुअल निर्माता ने बिटकॉइन नाम की क्रिप्टोकरेंसी बनाई। इसके बाद ही क्रिप्टोकरेंसी को दुनियाभर में लोकप्रियता मिली।

Powered by Blogger.