MP : कोरोना टीकाकरण के नाम पर उज्जैन में फर्जीवाड़ा : मृत और बीमार को दूसरा डोज लगाए बगैर जारी किए जा रहे वैक्सीनेशन के सर्टिफिकेट

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कोरोना टीकाकरण के महाअभियान में उज्जैन में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। टारगेट पूरा करने के फेर में स्वास्थ्य अमला ऐसे लोगों को भी वैक्सीन का दूसरे डोज का सर्टिफिकेट जारी कर रहा है, जिन्हें डोज लगा ही नहीं है। हद तो यह है कि मृत लोगों को भी स्वास्थ्य अमला वैक्सीन का दूसरा डोज लगना बता रहा है। जबकि जिस दिन दूसरा डोज लगना बताया जा रहा है, उस तारीख से पहले ही संबंधित व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके अलावा उन बीमारों को भी दूसरा डोज लगाए बगैर टीकाकरण का फाइनल सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है, जिन्हें बीमार होने की अवस्था में टीका लगवाने पर डॉक्टरों ने ही रोक लगा रखी है।

भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि टीकाकरण का टारगेट पूरा करने की होड़ में स्वास्थ्यकर्मी वैक्सीनेशन के आंकड़ों से खेल रहे हैं। यह गंभीर लापरवाही है। क्योंकि ऐसे कई जीवित लाेग भी हैं, जिन्हें वैक्सीन का दूसरा डोज लगाए बगैर ही टीकाकरण के फाइनल सर्टिफिकेट जारी कर दिए हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति को दूसरा डोज नहीं लगा तो उससे संक्रमण का खतरा बरकरार रहेगा। इस तरह की लापरवाही टीकाकरण महाअभियान के औचित्य पर ही सवाल खड़े कर रही है। दो मामलों से समझते हैं देश के सबसे बड़े अभियान से किस तरह खिलवाड़ हो रहा है।

डॉक्टर ने फ्रीगंज की चंदा भम्भानी को दूसरा डोज लगाने से मना किया था। कारण वह बीमार है और उनका ऑक्सीजन लेवल भी कम है, 27 नवंबर को इन्हें बगैर टीका लगाए फाइनल सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया

25 को टीका लगाने चंदा के घर पहुंची टीम वापस लौटी, 27 को सर्टिफिकेट भेजा


59 वर्षीय चंदा भम्भानी फ्रीगंज स्थित ट्रेड स्क्वेयर अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 304 में रहती हैं। चंदा के बेटे सन्नी ने बताया पहला डोज 8 जुलाई को लगा था। दूसरा डोज लगाने के लिए 25 नवंबर को टीम उन्हें ढूंढते हुए घर पहुंची थी। मगर वृद्धा को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर देखकर लौट गई थी। बावजूद तीसरे दिन 27 नवंबर को इन्हें भी वैक्सीन का दूसरा डोज लगना बताकर फाइनल सर्टिफिकेट जारी कर दिया। सन्नी ने कहा कि देश में चल रहे इतने बड़े अभियान और सबसे ज्यादा बजट का खर्च बावजूद ऐसी लापरवाही समझ से परे है। मैं उच्च स्तर पर भी ऐसे फर्जीवाड़े की शिकायत करूंगा।

19 नवंबर को 66 वर्षीय बुजुर्ग की मौत, इसके सप्ताह भर बाद दूसरे डोज का सर्टिफिकेट कैसे जारी हो गया

66 वर्षीय नरेंद्र सिंह रावत सेवानिवृत्त टीसी थे। पुत्र चंद्रपाल सिंह रावत ने बताया कि पिता की मौत 19 नवंबर 2021 को हुई। पिता ने पहला डोज 7 अप्रैल को लगवाया था। इसके बाद वे बीमार रहने लगे तो डॉक्टरों ने दूसरा डोज लगवाने से मना कर दिया। हालांकि टीकाकरण टीम इस बीच कई बार दूसरा डोज लगाने के लिए आई, उन्हें पता था कि पिता बीमार हैं।

बावजूद उनकी मौत के हफ्तेभर बाद छोटे भाई के मोबाइल पर दूसरा डाेज लगने का सर्टिफिकेट मिला तो पूरा परिवार हैरान रह गया। इस तरह के अभियान में ऐसी लापरवाही भविष्य में भारी पड़ेगी। सवाल यह है भी है कि अफसर तकनीकी भूल कहकर पल्ला झाड़ लेते है मगर एक दिन पहले टीम जहां जाती है, बगैर डोज लगाए वापस आ जाती है। फिर सर्टिफिकेट कैसे जारी हो सकता है।

टीकाकरण आंकड़े पर कैसे करें भरोसा

जिले में कुल लक्ष्य 1563902

फर्स्ट डोज लगे 1472746

सेकंड डोज लगे 1204656

(आंकड़े व जानकारी 29 नवंबर 2021 की स्थिति में)

जिले में 2 लाख 68 हजार डोज पेडिंग

जिला प्रशासन के अनुसार फिलहाल जिले में 2 लाख 68 हजार लोगों को कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लगना शेष है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि दूसरे डोज का टारगेट पूरा करने में हो रहे फर्जीवाड़े में प्रशासन के इन आंकड़ों में कितना भरोसा किया जा सकता है।

जिले में 2 लाख 68 हजार डोज पेडिंग

जिला प्रशासन के अनुसार फिलहाल जिले में 2 लाख 68 हजार लोगों को कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लगना शेष है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि दूसरे डोज का टारगेट पूरा करने में हो रहे फर्जीवाड़े में प्रशासन के इन आंकड़ों में कितना भरोसा किया जा सकता है।

फोन उठाने से परहेज : मामले में निगमायुक्त अंशुल गुप्ता को कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने अटैंड नहीं किया। बाद में पीए ने कॉल कर बताया साहब व्यस्त है।

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