MP LIVE : स्कूल में एडमिशन को लेकर बदले नियम : पढ़ लीजिए यह काम की खबर

मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने एक से दूसरे स्कूल में एडमिशन (admission) के नियम बदले हैं। पहली से 8वीं क्लास के लिए एडमिशन (admission) के समय TC (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जमा करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। स्टूडेंट्स को दूसरे स्कूल में एडमिशन (admission) लेने के बाद सेशन खत्म होने से पहले ट्रांसफर सर्टिफिकेट जमा करना होगा। संचालक लोक शिक्षण केके द्विवेदी ने नए आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि पहली से 8वीं क्लास में एडमिशन RTE (राइट टू एजुकेशन) नियम के तहत ही होंगे।

9वीं-12वीं में पहले की तरह नियम

9वीं से लेकर 12वीं तक की क्लास में एडमिशन (admission) के लिए पहले की तरह ही नियम रहेंगे। इसमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। अब तक कई स्कूलों ने 9वीं से लेकर 12वीं तक की क्लास के बच्चों की तिमाही परीक्षा के ऑनलाइन (online)  अंक नहीं भरे हैं। विभाग ने स्कूलों को तिमाही और छह माही परीक्षा के अंकों को 15 जनवरी तक हर हाल में भरने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी स्कूलों को उनके आईडी पासवर्ड भी दे दिए हैं।

स्कूल खोले रखने पर सरकार का वेट एंड वॉच

संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। भोपाल में 10 दिन में 136 तो 11 अन्य शहरों में 78 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। बड़ी कक्षाओं में 50% बच्चे अभी भी स्कूल जा रहे हैं। सोमवार को कोरोना समीक्षा बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने पहली से 8वीं तक के स्कूल बंद करने का मामला उठाया तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभी ये चिंता का विषय नहीं है। इस बारे में तीन-चार दिन बाद फैसला लेंगे। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी स्थिति गंभीर होने पर ही कोई फैसला लेने की बात कर चुके हैं।

पेरेंट्स का मानना- ऑनलाइन होना चाहिए क्लास

पेरेंट्स का मानना है कि क्लासेस ऑनलाइन ही लगना चाहिए। बच्चों को खतरे में डालना गलत है। पेरेंट्स की मन की बात दैनिक भास्कर के सर्वे में सामने आई। मीडिया ने पोल कराया और 4 ऑप्शन दिए-

पहला- सभी कक्षाएं ऑनलाइन हों, बच्चों को खतरे में न डालें। 71% पेरेंट्स ऑनलाइन क्लास के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि बढ़ते संक्रमण के बीच बच्चों को खतरे में नहीं डालना नहीं चाहिए।

दूसरा- स्कूलों के दबाव में ऑनलाइन क्लास का फैसला नहीं हो रहा। 7% लोगों का यही मानना है।

तीसरा- पेरेंट्स बच्चों को स्कूल न भेजें, घर में पढ़ाएं। 7% पेरेंट्स यही चाहते हैं।

चौथा ऑप्शन- 9वीं-12वीं क्लास छोड़कर सभी ऑनलाइन करना चाहिए। 15% ने 10-12वीं को छोड़कर सभी कक्षाएं ऑनलाइन करने की बात कही है।

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