REWA : सरकारी और प्रायवेट कालेजों के प्राचार्यों को निर्देश : नशा करते पाए जाने वालों पर 200 रुपए का लगाए जुर्माना

रीवा। शैक्षणिक संस्थानों को नशामुक्त बनाने के लिए सरकार के स्तर पर एक बार फिर से पहल शुरू की गई है। इस बार सभी कालेजों में तंबाकू के उत्पादों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है और सभी कालेज प्रबंधनों से कहा गया है कि वह अपने परिसर के आसपास किसी तरह के तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध लगाएं। इसके लिए सूचना बोर्ड लगाना होगा कि उनका परिसर पूरी तरह से तंबाकू मुक्त क्षेत्र है। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और प्रायवेट कालेजों को पत्र लिखकर कहा है कि वह तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सख्ती के साथ प्रयास शुरू करें। परिसर के आसपास किसी तरह से इन उत्पादों के विज्ञापन प्रदर्शित नहीं किए जाएं, क्योंकि युवाओं खासकर कालेजों में पढऩे वाले छात्रों पर इसका असर पड़ता है। उनमें इसी की वजह से नशे की लत पैदा होती है। तंबाकू के उत्पादों का यदि कोई सेवन करते हुए पाया जाए तो उसके विरुद्ध २०० रुपए का जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू करने के लिए भी कहा गया है। कालेजों को दिए गए इस निर्देश पर पहला पालन तो यहां पर काम करने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों को करना पड़ेगा। क्योंकि अधिकांश जगह पान-सिंगरेट, गुटखा, तंबाकू आदि का सेवन करते लोग नजर आते हैं।

100 गज के दायरे में दुकानें भी प्रतिबंधित

तंबाकू उपयोग प्रतिबंधित करने के लिए बनाए गए नियमों के मुताबिक शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू से जुड़े उत्पादों की बिक्री करने वाले दुकानों को प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही सभी तरह के तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन के प्रदर्शन पर रोक है।

इन स्थानों पर प्रतिबंधित हैं तंबाकू उत्पाद

भारत सरकार ने तंबाकू आपदा से लोगों को बचाने के लिए सिंगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 बनाया है। जिसके धारा ४ के तहत सार्वजनिक स्थलों सरकारी कार्यालय, शिक्षण संस्थान, मनोरंजन केन्द्र, पुस्तकालय, अस्पताल, स्टेडियम, होटल, शॉपिंग माल, काफी हाउस, निजी कार्यालय, न्यायालय परिसर, रेलवे स्टेशन, सिनेमा हाल, रेस्टोरेंट, सभागृह, एअरपोर्ट, प्रतिक्षालय, बस स्टाप, लोक परिवहन, टी-स्टाल, मिष्ठान भंडार, ढाबा एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर तंबाकू उत्पाद का उपयोग करते पाए जाने पर 200 रुपए जुर्माने का प्रावधान कर रखा है।

शैक्षणिक संस्थानों में जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक सभी सरकारी और प्रायवेट शैक्षणिक संस्थानों को अपने यहां नियमित रूप से नशामुक्ति से जुड़े अभियान चलाना है। इसमें छात्रों के साथ संगोष्ठी और नुक्कड़ सभाएं एवं रैलियां निकाली जाएंगी और दूसरों के भी यह संदेश दिया जाएगा कि तंबाकू के उत्पादों के सेवन से सेहत को नुकसान पहुंचता है। इसके लिए सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लेने के लिए कहा गया है। जिससे छात्रों का आकर्षण भी इस अभियान के प्रति बढ़े।

स्कूलों में दिए निर्देश का पालन नहीं

शासन द्वारा समय-समय पर छात्रों को नशे की लत से बचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश जारी किए जाते हैं। इन निर्देशों का पालन कहीं पर भी होता दिखाई नहीं देता है। कुछ समय पहले ही स्कूलों को भी इसी तरह का निर्देश प्राप्त हुआ था कि यदि उनके परिसर के आसपास कोई तंबाकू-गुटखा बेचने वाली दुकान है तो स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उसे तत्काल हटवाएं ताकि छात्रों को इससे दूर रखा जा सके। स्कूल का अभियान पूरी तरह से फ्लाप साबित रहा है, अब कालेजों को दिए गए निर्देश को लेकर उम्मीदें हैं कि इस पर काम होगा।

शासन का निर्देश सभी सरकारी और प्रायवेट कालेजों को जारी हुआ है। छात्रों को तंबाकू उत्पादों से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देने का जागरुकता अभियान भी चलाया जाना है।

डॉ. प्रभात पाण्डेय, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा

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