स्कूल कॉलेज में हिजाब पहनकर प्रवेश को लेकर छिड़ा विवाद : भारत में क्यों मचा है बवाल? दुनिया के दूसरी तरफ सिर उठाकर चलने वाली महिलाएं पाबंदी मुक्त

नई दिल्ली: कर्नाटक में हिजाब पहनकर स्कूल कॉलेज में प्रवेश को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। कर्नाटक में ये विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ छात्र हिजाब पहनकर मुस्लिम लड़कियों के स्कूल कॉलेज में प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। कई जगहों पर कुछ छात्र भगवा कपड़ा गले में डालकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मुस्लिम छात्राएं हिजाब पहनकर कॉलेज आने की जिद कर रही हैं। वहीं, आपको बता दें कि दुनिया के दूसरी तरफ सिर उठाकर चलने वाली महिलाएं इन मजहबी पाबंदियों से आज़ादी पाने की मुहीम चलाती हैं।

वैसे दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां हिजाब, बुरका पहनना और अपना चेहरा ढंककर रखना वर्जित है। खास बात तो ये है कि हिजाब बैन करने वाले देश कोई रूढ़िवादी सोच रखने वाले नहीं बल्कि खुशहाल और विकसित देशों में गिने जाते हैं। सीरिया में मुस्लिम आबादी की तादाद करीब 70 फीसदी है, वहीं इजिप्ट में मुस्लिम आबादी करीब 90 फीसदी है। यहां की सरकारों ने विश्वविद्यालयों में क्रमश: 2010 और 2015 से पूरा चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगा रखा है।

इन देशों में बैन है हिजाब

वर्तमान में स्विट्ज़रलैंड, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, बुल्गेरिया, इटली, फ़्रांस, रूस जैसे देशों में हिजाब और चेहरा ढकना वर्जित है। स्विट्ज़रलैंड में हिजाब बैन का कोई धार्मिक कारण नहीं है। बल्कि यहां की  सरकार ने महिलाओं को आज़ादी से जीना का अधिकार देते हुए इसपर पाबन्दी लगाई है। स्विट्ज़रलैंड में एक परंपरा है जिसमे चेहरा दिखाया जाता है जो आज़ादी का प्रतीक है। जब स्विट्ज़रलैंड में बुरका पर बैन लगाया गया था तब वहां के पार्लियामेंट में यही कारण बताते हुए इसे बैन किया गया था। इसके अलावा नेशनल सिक्योरिटी और महिलाओं को स्वतंत्रता देने के लिए इस कानून को लागू किया गया था।

यूरोपीय यूनियन में 20 मिलियन से ज़्यादा मुस्लिम महिलाऐं रहती हैं, इन देशों ने मजहबी पाबंदियों से आज़ादी देने के लिए ऐसा निर्णय लिया है।

हिजाब को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं, मुस्लिम बाहुल्य सहित अन्य देशों में हिजाब को लेकर क्या नियम है?  

रूस- रूस के कई शहरों में साल 2012 में स्कूलों या कॉलेजों में हिजाब को लेकर प्रतिबंध लगाया गया था हालांकि, सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी लेकिन अदालन ने भी सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।

फ्रांस- फ्रांस की सरकार ने साल 2011 में पब्लिक प्लेस पर हिजाब पहनने या फिर चेहरे को ढकने को लेकर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। यहां हिजाब लगाने पर 13 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं चेहरा ढकने को लेकर किसी पर दबाव बनाने वाले पर भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

सऊदी अरब- सऊदी अरब में महिलाओं को अबाया पहचाना जाता है। यह एक तरह की ढीली-ढाली पोशाक है। यह परिधान महिलाओं के शरीर को सिर से लेकर पैर तक ढक देता है। यहां महिलाओं को उन सभी जगहों पर अबाया पहनना पड़ता है, जहां वे उन पुरुषों द्वारा देखे जा सकते हैं जो उनसे संबंधित नहीं हैं।

ईरान- 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से यहां पर हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा यहां पर महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर ढीले-ढाले कपड़े पहनने और सिर और गर्दन ढकने का आदेश है।

पाकिस्तान- पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल देश हैं। यहां पर बुर्का पहनने और अन्य परिधानों से चेहरे को ढकने पर जुर्म नहीं माना जाता है।

डेनमार्क और बुल्गारिया- बुल्गारिया में हिजाब पहनना गैरकानूनी माना जाता है। बुल्गारिया सरकार द्वारा आतंकी गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा के उद्देश्य से यह नियम बनाया गया है। वहीं डेनमार्क में भी चेहरा ढकने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। यहां पर अगर कोई भी महिला चेहरा ढकती है तो उसे 12000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा सिरिया में 2010 में कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई थी।

इटली और श्रीलंका- इटली और श्रीलंका में भी बुरका या हिजाब पहनने पर रोक है। इन देशों में अगर कोई भी महिला बुर्का पहनती है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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