REWA : जेल में नहीं थम रहा भ्रष्टाचार का सिलसिला : दिनदहाड़े बेख़ौफ युवक दीवारों के पार पहुचाते है नशे का सामान, वीडियो वायरल

रीवा (REWA NEWS)  केंद्रीय जेल रीवा में व्याप्त भ्रष्टाचार का सिलसिला अनवरत रूप से चल रहा है जेल मुख्यालय भोपाल के कड़े निर्देशों के बावजूद अनियमितताओं का दौर थमा नहीं है. एक सबसे सनसनीखेज वीडियो यह वायरल हो रहा है जिसमें जेल की ऊंची त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार के ऊपर से कोरेक्स और नशीली पदार्थ अंदर फेंके जा रहे हैं जो कि कैदियों के पास पहुंचते हैं. यहां जेल के अंदर चक्कर अफसर के खास प्रहरी और कैदी अंदर से उठाकर कैदियों को सप्लाई करते हैं. आश्चर्य की बात यह है कि सभी नियम और कायदों की खुलकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. जाहिर है कि जेल के अंदर कोई भी गतिविधि चलती है तो उसकी निश्चित तौर पर अधिकारियों को जानकारी रहती है .

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जेल रीवा पहले से ही अपने अवांछित गतिविधियों के लिए कुख्यात है.

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय जेल की सबसे बड़ी गतिविधि लगभग 20 फीट ऊंची दीवार से प्लास्टिक की थैलियों में भरकर जो चीजें भेजी जा रही हैं उससे व्यवस्था की पोल खुल रही है .

कैसे होता है खेल

आपको बता दे की जो यहां खेल खेला जा रहा है उसके अंतर्गत पीटीएस के रास्ते से कैदियों के पास जो सामग्री  भेजी जाती है उसे अंदर से उठाने का भी काफी दिलचस्प तरीका प्रकाश में आया है. 

जिसके अंतर्गत कैदी के परिजनों द्वारा दी गई सामग्री चक्कर अफसर के खास सिपाही कुछ इस तरीके से भेजते  हैं कि वह अंदर मैदान में अथवा वहां लगे पेड़ पौधे या फूलों के बगीचे में जाकर गिरती हैं और उसे फेंकने का समय सुबह 8:00 बजे और शाम को अंधेरा होने के समय 5:30 या 6:00 बजे रहता है

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इसका सबसे बड़ा तरीका यह बताया जाता है कि चक्कर का कार्य देखने वाले कैदियों को इस बात का अंदाजा रहता है कि वह कहां के फूल के बगीचे अथवा पेड़ों पर कोई भी सामग्री अटकी हुई है. उसे सुबह या रात में निकालकर कैदियों को सप्लाई कर दी जाती है. इस तरह के मामले पहले भी प्रकाश में आ चुके हैं परंतु कार्यवाही के नाम पर इस सिपाहियों को बलि का बकरा बना दिया जाता है जबकि कोई भी सिपाही बिना अपने अधिकारी की जानकारी के अथवा मिलीभगत से ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर सकता है .

अकेले निकलते हैं कैदी

केंद्रीय जेल रीवा में चल रहे और लंबे खेल में एक और बड़ा वीडियो वायरल हो रहा है जिसके अंतर्गत कैदी अफसरों के बंगलों में अकेले जाते और आते हैं उनके साथ कोई भी सुरक्षा प्रहरी और कर्मचारी नहीं रहता है. 

यह किस नियम के अंतर्गत होता है यह तो जेल के अधिकारी ही जाने परंतु इसका भी एक बड़ा वीडियो वायरल हो रहा है इसमें एक कैदी चक्कर अफसर के घर से जेल के अंदर वापस जाता हुआ दिख रहा है,आखिर जेल का कोई भी कैदी जो कितना भी विश्वसनीय हो वह अकेले कैसे जा और आ सकता है फिर अकेले जाने और आने वाले कैदी की तलाशी के लिए कोई नियम है अथवा नहीं इसकी जानकारी जेल के अधिकारियों को हो सकती है. 

क्या अकेले आने जाने वाला कैदी जेल के आमद रजिस्टर में इस बात का उल्लेख करके जाता है कि वह अकेले जा रहा है l और इस बात की गारंटी है कि वह कोई भी अप्रिय घटना को अंजाम नहीं देगा. 

मुलाकात के लिए लगते हैं 500

केंद्रीय जेल में मुलाकात के लिए 500 देने का भी एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति अपने पिताजी से मुलाकात करने के लिए 500 सिपाही को दिए जाने का  दावा कर रहा है. 

वायरल वीडियो में यह बताया जा रहा है कि मैं अपने पिता से मुलाकात करने के लिए जेल परिसर आया था और वहां मुलाकात करने के लिए सिपाही को 500 देने पड़े। अब इससे साफ साफ जाहिर हो रहा है कि यहां मुलाकात के लिए शासन के नियमों का नहीं अतिरिक्त 500 का हरा नोट सबसे बड़ा मायने रखता है, जिस तरह से यहां वर्तमान व्यवस्था चल रही है उससे यह स्पष्ट है कि है कि यहां सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा अतिरिक्त कमाई का है जबकि केंद्रीय और मध्यप्रदेश शासन द्वारा जेल के कैदियों और अधिकारियों को पर्याप्त सुविधाएं और इतना वेतन प्रदान करती है कि वह एक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकें परम पद रिक्त लालच के शिकार अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ अपना एक ही उद्देश्य मानते हैं कि उन्हें किसी भी तरह से अतिरिक्त कमाई करनी है. 

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