MP : प्रदेश के हाईकोर्ट में वर्तमान में लंबित मामलों की संख्‍या चार लाख के पार, 25 साल से भी पुराने 96 सिविल व 359 क्रिमनल मामले लंबित

जबलपुर । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 25 साल से भी पुराने कुल 96 सिविल व 359 क्रिमनल मामले लंबित हैं। इस संख्या में से महज चार सिविल मामलों का संबंध हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच से है। हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में 25 साल से भी पुराने लंबित क्रिमनल मामलों की संख्या शून्य है। इसी तरह हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में 25 साल से भी पुराने लंबित सिविल मामलों की संख्या 16 व क्रिमनल मामलों की संख्या महज दो है। वहीं दूसरी ओर हाई कोर्ट की ग्वालियर व इंदौर खंडपीठ के मुकाबले हाई कोर्ट की मुख्यपीठ, जबलपुर में 25 साल से भी पुराने लंबित सिविल मामलों की संख्या 76 व क्रिमनल मामलों की संख्या 357 है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन सभी प्रकृति के कुल लंबित मामलों की संख्या चार लाख पार कर चुकी है। यह बेहद चिंता का विषय है। इस सूरतेहाल में हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत 53 पदों को अविलंब भरकर अपेक्षाकृत द्रुतगति से लंबित मामलों के निराकरण की दिशा में सफलता अर्जित की जा सकती है।

वर्तमान में हाई कोर्ट में पदस्थ जजों की संख्या 35 है, इस दृष्टि से अब भी 18 जजों के पद रिक्त हैं। यदि ये रिक्त पद भर लिए जाएं तो जाहिरतौर पर अधिक तेजी से 25 साल से भी पुराने ही नहीं अन्य प्रकृति के लंबित चार लाख से अधिक मामलों के चुनौतीपूर्ण बोझ को कम करने में सहायता मिलेगा।

वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पिछले दो साल से नियमित सुनवाई के स्थान पर अधिक समय तक वर्चुअल व हाइब्रिड सुनवाई से काम चलाया गया था। इस वजह से भी लंबित मामलों की संख्या में इजाफा हुआ है। काफी सारे वकील व पक्षकार अपने मामलों का नंबर न आने की समस्या से भी जूझ रहे हैं।

बार और बेंच न्यायरथ के दो समानांतर पहिये हैं। मप्र का बार यानी अधिवक्ता समुदाय राज्य न्यायपालिका के सिर पर चार लाख से अधिक लंबित मामलों के बोझ को लेकर समान रूप से चिंतित है। साथ ही भरोसा दिलाता है कि 25 वर्ष से भी पुराने सिविल व क्रिमनल ही नहीं सभी तरह के लंबित नए-पुराने मामलों का द्रुतगति से निराकरण किए जाने संबंधी प्रत्येक अभिनव योजना में सोत्साह साथ देगा।

आरके सिंह सैनी, कार्यकारी अध्यक्ष एमपी स्टेट बार

25 वर्ष से भी पुराने लंबित सिविल व क्रिमनल मामलोंं को विशेष रूप से सूचीबद्ध करके मैराथन सुनवाई के जरिये निराकृत किया जा सकता है। यही नहीं जिन मामलों में अहम कानूनी बिंदु का निर्धारण होना है, उन्हें भी इसी प्रक्रिया से विशेष ध्यान देकर एक अभियान के तहत निर्णीत किया जाना चाहिए।

-परितोष त्रिवेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हाई कोर्ट बार

मप्र हाई कोर्ट : लंबित सिविल-क्रिमनल मामलों की सूची

वर्ष : सिविल : क्रिमनल

10 वर्ष पुराने : 193049 : 110488

25 वर्ष पुराने : 63631 : 42064

25 वर्ष से पुराने: 96 : 359

कुल : 256776 : 152911

मप्र हाई कोर्ट : खंडपीठ इंदौर

वर्ष : सिविल : क्रिमनल

10 वर्ष पुराने : 41541 : 26669

25 वर्ष पुराने : 11846 : 7641

25 वर्ष से पुराने: 16 : 2

कुल : 53403 : 34312

मप्र हाई कोर्ट : खंडपीठ ग्वालियर

वर्ष : सिविल : क्रिमनल

10 वर्ष पुराने : 35337 : 21315

25 वर्ष पुराने : 11316 : 6123

25 वर्ष से पुराने: 4 : 0

कुल : 46657 : 27438

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