भारी बढ़ोतरी के बीच बिकने जा रहे Ambuja और ACC सीमेंट की कंपनियां : जानिए क्या है वज़ह

सीमेंट में तेजी को देखते हुए अब होलसिम ग्रुप (Holcim Group), जो कि सीमेंट सेक्टर (Cement Sector) में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है, अब भारत से निकलने का मन बना चुकी है। भारत में अडानी ग्रुप और जेएसडब्ल्यू इसकी सीमेंट कंपनियों को खरीदने की रेस में सबसे आगे हैं। माना जा रहा है कि अब एवेन्यू सुपरमार्ट के मालिक राधाकिशन दमानी भी इसमें रुचि ले रहे हैं। आखिर क्यों बिक रही हैं अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) और एसीसी लिमिटेड (ACC Ltd) कंपनियाँ?

दामों में भारी बढ़ोतरी के बीच बिकने जा रहे अंबुजा और एसीसी सीमेंट (ACC Cement) की कंपनियां

प्रीमियम वैल्यूशन को देखते हुए भारत से निकालने की फिराक में है Holcim Group

प्रदूषणकारी यूनिटों को बेचकर अपनी कार्बन फुट प्रिंट बैलेंसशीट को सुधारने की फिराक में कंपनी

अडानी ग्रुप और जेएसडब्ल्यू भी इन कंपनियों को खरीदने की रेस में

इन्फ्रास्ट्रक्टर पर सरकार के जोर से सीमेंट की मांग बढ़ने की उम्मीद

जानी-मानी सीमेंट कंपनियों अंबूजा और एसीसी को खरीदने की होड़ में दमानी भी कूदे

जयपुर। सीमेंट की एक बोरी के दाम 400 रुपए से ज्यादा हो चुके हैं। ऐसे में देश के सीमेंट सेक्टर (Cement Sector) में अचानक अरबपतियों की दिलचस्पी बढ़ गई है। भारत के सबसे मूल्यवान बन चुके अडानी ग्रुप (Adani Group) और जेएसडब्ल्यू (JSW) ग्रुप का भी इसमें भारी इंटरेस्ट देखा जा रहा है। इतना ही नहीं दिग्गज निवेशक और रिटेल चेन एवेन्यू सुपरमार्ट के मालिक राधाकिशन दमानी (Radhakishan Damani) भी इस सेक्टर में अब बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। कार्बन फुट प्रिंट (Carbon Foot Print) की बढ़ती हुई लायेबिलिटी के चलते दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी होलसिम (Holcim Group) भारत से अपना कारोबार समेटने की तैयारी में है। स्विटजरलैंड की इस कंपनी ने 17 साल पहले भारत में एंट्री की थी। यही Holcim Group अब भारत में अपनी दोनों लिस्टेड कंपनियों अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) और एसीसी लिमिटेड (ACC Ltd) को बेचने जा रही है। इस कंपनियों को खरीदने की होड़ में अडानी ग्रुप, जेएसडब्ल्यू के साथ अब दमानी भी शामिल हो गए हैं। अडानी ग्रुप (Adani Group) और जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) पहले से ही इस होड़ में हैं।

दामानी ग्रुप ने भी दिखाया इंटरेस्ट

खबरों के मुताबिक दमानी इसके लिए अन्य संभावित बोलीदाताओं के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए दमानी 10 हजार करोड़ रुपये तक का दांव लगा सकते हैं। वह अडानी और जेएसडब्ल्यू ग्रुप के साथ मिलकर निवेश कर सकते हैं। गौर करने की बात ये है कि दमानी पहली बार सीमेंट बिजनस में नहीं उतर रहे हैं। उनकी पहले से ही दक्षिण भारत की सीमेंट कंपनी इंडिया सीमेंट्स (India Cements) में 23 फीसदी हिस्सेदारी है। अब अगर अंबुजा सीमेंट और एसीसी लिमिटेड उनकी झोली में आ जाती हैं तो सीमेंट कारोबार में उनका दबदबा जबर्दस्त बढ़ जाएगा।

अडानी है कंपनियों को खरीदने की रेस में सबसे आगे

इन कंपनियों को खरीदने की रेस में भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस गौतम अडानी (Gautam Adani) को सबसे आगे माना जा रहा है। अडानी ग्रुप ने हाल में सीमेंट सेक्टर में एंट्री मारी है। इसी तरह जेएसडब्ल्यू ने भी हाल में सीमेंट बिजनस में हाथ आजमाया है। मांग और दाम दोनों में तेजी को देखते हुए दोनों ही ग्रुप पूरी आक्रामकता के साथ सीमेंट बिजनस को बढ़ा रहे हैं। फिलहाल भारतीय सीमेंट बाजार में आदित्य बिड़ला समूह की अल्ट्राटेक सबसे बड़ी कंपनी है। अल्ट्राटेक की सालाना क्षमता 117 मिलियन टन है। अंबुजा सीमेंट और एसीसी लिमिटेड की संयुक्त क्षमता 66 मिलियन टन सालाना है। यानी जो भी इन दो कंपनियों को खरीदेगा वह सीमेंट मार्केट में सीधे दूसरे नंबर पर आएगा।

क्यों बढ़ी सीमेंट सेक्टर में दिग्गजों की रुचि

सवाल यह है कि अचानक सीमेंट सेक्टर में इन दिग्गज कारोबारियों की दिलचस्पी क्यों बढ़ी है। इसकी वजह यह है कि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर और गरीबों के लिए सस्ते घर बनाने पर जोर दे रही है। इससे सीमेंट की मांग बढ़ने की संभावना है। लॉकडाउन और फिर युद्ध के बाद से सीमेंट के भावों में वैसे ही जबर्दस्ते तेजी देखी जा रही है। पिछले साल खबर आई थी कि दमानी इंडिया सीमेंट्स में मैज्योरिटी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। हालांकि कंपनी ने इसे खारिज किया था। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स से मुताबिक दमानी $20.7 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 69वें नंबर पर हैं।

इसलिए स्विस कंपनी चाहती है भारत से निकलना

ट्रेड स्विफ्ट के फाउंडर और जाने-माने शेयर बाजार एक्सपर्ट संदीप जैन ने बताया कि होलसिल एक स्विस कंपनी है, जिस पर टैक्सेशन को लेकर स्विस कानून लागू होते हैं। संदीप ने बताया कि सीमेंट जैसे बिजनेस प्रदूषणकारी बिजनेस माने जाते हैं और इन पर अधिक कार्बन इमिशन के चलते कार्बन फूटप्रिंट को कम करने का दबाव है। अन्यथा इस कंपनियों को स्विस कानूनों के हिसाब से भारी टैक्स की जवाबदेही बनती है। संदीप ने बताया कि ऐसे समय में जबकि सीमेंट कंपनियों को अच्छी वैल्यूशन मिल रही है, तो होलसिम ग्रुप इन प्रदूषणकारी बिजनेस यूनिटों को बेचकर अपनी बैलेंसशीट को कार्बन फुट प्रिंट और कैश दोनों के लिहाज से बेहतर बनाने का मौका चूकना नहीं चाहता। संदीप ने बताया कि अगर होलसिम ग्रुप इन यूनिटों को नहीं बेचता है तो उस पर इस यूनिटों को अपग्रेड करने के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर का दबाव रहेगा।

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