SIDHI : बीजेपी विधायक और पुलिस के खिलाफ खबर चलाने वाले पत्रकार के पुलिस ने थाने में उतरवाए कपड़े : अर्धनग्न फोटो वायरल होने से हड़कंप

भोपाल. एक 36 वर्षीय पत्रकार ने गुरुवार को आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक थिएटर कलाकार की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे और सात अन्य लोगों के कपड़े उतार दिए गए और उनकी पिटाई कर दी गई।

कथित घटना 2 अप्रैल को हुई और गुरुवार को तब सामने आई जब आठ गिरफ्तार लोगों की अर्ध-नग्न तस्वीरें वायरल हुईं। एचटी तस्वीरों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका।

YouTube चैनल चलाने वाले पत्रकार कनिष्क तिवारी ने कहा कि उन्हें और कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य थिएटर कलाकारों को 2 अप्रैल को सीधी पुलिस स्टेशन में थिएटर कलाकार नीरज कुंदर की गिरफ्तारी के विरोध में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस के अनुसार, कुंदर को भारतीय जनता पार्टी (विधायक) केदारनाथ शुक्ला और उनके बेटे, गुरु दत्त के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से अश्लील टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

तिवारी ने आरोप लगाया कि थाने में उनके और अन्य लोगों के कपड़े उतारे गए और उनकी पिटाई की गई।

“पुलिस ने मेरे कपड़े उतारे और मेरी पिटाई की। उन्होंने तस्वीरें लीं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की कोशिश की …

पीड़ित कनिष्क की आपबीती

पत्रिका से बातचीत में पीड़ित कनिष्क तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल को रंगकर्मी नीरज कुंदेर को फेक आईडी बनाकर कथित तौर पर बीजेपी विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके बेटे गुरुदत्त के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिसे कुछ ही घंटे बाद ही जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद नीरज के परिजन व साथी रात करीब 8 बजे थाने के बाहर नारेबाजी कर रहे थे। जिसका कनिष्क तिवारी अपने कैमरामैन के साथ कवरेज कर रहे थे। इसी दौरान टीआई मनोज सोनी व थाने के अन्य पुलिसकर्मी आए और प्रदर्शन कर रहे सभी लोगों के साथ मुझे व मेरे कैमरामैन को घसीटते हुए थाने के अंदर ले जाया गया। जहां टीआई मनोज सोनी ने कहा कि तुम ही नेतागिरी कर रहे हो, इसके बाद हमारे साथ मारपीट करते हुए हमारे कपड़े उतरवाए गए। 

कनिष्क का आरोप है कि उन्हें बदनाम करने के लिए उनकी अर्धनग्न कर तस्वीरें खीचीं गईं जिन्हें बाद में सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। कनिष्क ने बताया कि कपड़े उतरवाने के बाद टीआई मनोज सोनी ने पीटने व गालियां देने के लिए उन्हें अपने केबिन में बुलाया जहां पहले से ही अमलिया थाना प्रभारी अभिषेक सिंह परिहार, टीआई शेषमणि मिश्रा और विधायक के करीबी व शराब कारोबारी अमर सिंह कल्लू बैठे हुए थे। इसी दौरान उनकी अर्धनग्न तस्वीरें खींची गईं और जिन्हें विधायक और उनके बेटे को भेजा गया। जिसके बाद बदनाम करने के लिए इन तस्वीरों को वायरल भी किया गया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

थाने के अंदर पत्रकार और अन्य लोगों के साथ हुए इस व्यवहार को लेकर अब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी नजर आ रही है। लोग इस घटना की निंदा करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल जो उठाया जा रहा है वो ये है कि पुलिस को इनके साथ इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार किसने दिया। इतना ही नहीं कुछ लोग तो इसे खाकी की गुंडागर्दी कह रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा विधायक को खुश करने के चक्कर में टीआई व उनके थाने के स्टाफ ने इन लोगों के साथ गलत व्यवहार किया है।

सोनी ने पत्रकार के इस आरोप को खारिज कर दिया कि गिरफ्तार किए गए सभी आठ लोगों को पुलिस ने पीटा। उन्होंने कहा, 'उनकी जांच के लिए उनके कपड़े उतार दिए गए और यह सामान्य है... थाने में उनकी पिटाई नहीं की गई।

सोनी ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि यह कहना गलत होगा कि आरोपी नग्न थे। न्यूज 24 चैनल द्वारा ट्वीट की गई एक क्लिप के अनुसार, "वे अपने अंडरवियर में थे," पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि उनके कपड़े हटा दिए गए ताकि वे आत्महत्या करने के लिए उनका इस्तेमाल न करें।

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