EID special : रीवा में मौजूद है दुनिया की सबसे छोटी कुरान : 7 पीढ़ियों से सहेजकर रखा, लेंस के जरिए पढ़ी जाती है यह कुरान


रीवा के तरहटी मोहल्ले में स्थित मन्नान मस्जिद के चारों तरफ चर्चे हैं। हाजी मोहम्म अली अंसारी के पुराने मकान के आंगन में बनी इस मस्जिद के अंदर एक कुरान शरीफ रखी है, जो दुनिया की सबसे छोटी कुरान में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में मन्नान मस्जिद के मुतव्वली मोहम्मद अली ने बताया कि, 7 पीढ़ियों से इसे सहेजकर रखा है।

मोहम्मद अली के पास जो कुरान है वह ढाई सेंटीमीटर लंबी, डेढ़ सेंटीमीटर चौड़ी और एक सेंटीमीटर मोटी है। माचिस की डिब्बी से भी छोटी कुरान की सारी आयतें अरबी भाषा में लिखी हुई हैं। इसकी नक्काशी कुरान-ए-शरीफ से मिलती जुलती है।

22 साल 5 माह में तैयार हुई थी यह कुरान

अंसारी का दावा है कि सदियों पहले यह कुरान शरीफ हाथों से लिखी गई थी। हालांकि सात पीढ़ियों से इसे सहेजकर रखने वाले परिवार को भी नहीं पता कि इसे कब लिखा गया था। चमड़े के जिल्द में सोने की नक्काशी वाले पन्ने हैं। इसको मुकम्मल होने में 22 साल 5 महीने लगे थे। माचिस की डिब्बी से भी छोटी कुरान में 86,450 शब्द है। वहीं उसके अंदर 3,23,760 अक्षर लिखे गए हैं।

लेंस के जरिए पढ़ी जाती है कुरान

पाक कुरान शरीफ को पढ़ने के लिए बाहर लेंस लगाया गया है। दावा है कि बिना लेंस के कुरान को पढ़ना संभव नहीं है। तीस पारे की कुरान शरीफ में सारी आयतें लिखी हैं। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग रीवा आते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि यह विश्व की सबसे छोटी और दुर्लभ कुरानों में से एक है।

चार आसमानी किताबों में कुरान शामिल

हाजी मोहम्मद अली अंसारी ने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग मानते हैं कि इसकी पहली और आखिरी आयत रमजान के महीने में मुकम्मल हुई थी। तब चार आसमानी किताबें तौरात, जुबूर, इंजील और कुरान धरती पर आई थीं। इसी कुरान की बदौलत मुस्लिम धर्म टिका हुआ है।

एतिहासिक है मन्नान मस्जिद

सन् 1906 में रीवा शहर में भीषण अकाल पड़ा था। तब लोग भूख से बचने के लिए पलायन करने लगे। अंसारी ने दावा करते हुए बताया कि ऐसे हालात में तरहटी मोहल्ले में रहने वाले उनके पूर्वज आगे आए। उन्होंने लोगों को रोजगार और भोजन देने के लिए अपने घर के आंगन में पहली मस्जिद तामील कराई। दूसरी मस्जिद मनगवां और तीसरी मस्जिद गुढ़ में तामील हुई। उस समय दिन में मजदूर व्यंकट भवन में कार्य करते थे और रात में ​मस्जिद का। तब सैकड़ों लोगों ने परिवार का भरण-पोषण कर भूख से जंग जीती थी।

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