MP में प्राइवेट जासूसी का बढ़ा ट्रेंड : पहले पति-पत्नी का अफेयर तो अब बच्चों का, बेटी बॉयफ्रेंड के साथ तो नहीं, बेटा ड्रग्स लेता है क्या?

फिल्मी दुनिया व कहानी-किस्सों से निकलकर अब प्राइवेट जासूसी का ट्रेंड एमपी में भी देखने को मिल रहा है। पहले पति-पत्नी के बाहरी अफेयर की जासूसी के मामले ज्यादातर सुनने मिलते थे, लेकिन अब पेरेंट्स अपने बच्चों के पीछे भी डिटेक्टिव लगा रहे हैं। ट्यूशन और कोचिंग के नाम पर निकला उनका बच्चा कहीं और तो नहीं जा रहा है, उसकी संगत कैसी है? ऐसे मामलों में ज्यादातर टीनएजर्स और कॉलेज स्टूडेंट के माता-पिता प्राइवेट डिटेक्टिव से नजर रखवा रहे हैं।

पेरेंट्स को आशंका है कि कहीं उनकी बेटी अपने बॉयफ्रेंड के साथ घूम तो नहीं रही है, उनका बेटा किसी तरह का ड्रग्स व नशा तो नहीं ले रहा है, इसका पता लगवा रहे हैं। उनके दोस्त कैसे हैं, इसकी जानकारी भी जुटा रहे हैं। इसके अलावा लड़की-पत्नी के मिसिंग मामलों और देश के बड़े शहरों व विदेशों में रहने वाले लोगों की जानकारी-सुराग भी प्राइवेट डिटेक्टिव के माध्यम से जुटाई जा रही है।

प्राइवेट जासूसी के ट्रेंड को ऐसे समझें

(यह जानकारी मप्र में काम करने वाले 3 बड़े प्राइवेट डिटेक्टिव फर्म के संचालकों के बताए अनुसार है।)

रियल केस 1: बच्चा कोचिंग से देरी से आने लगा, खाना नहीं खाता था, ड्र्ग्स लेते पकड़ाया

इंदौर में माता-पिता अपने कॉलेज में जाने वाले बेटे अविनाश दुबे (काल्पनिक नाम) के देरी से घर आने और रात को खाना नहीं खाने को लेकर परेशान हो गए थे। उन्होंने अविनाश से बात की, लेकिन वह कोई जवाब नहीं देता था। अलग-अलग बहाने बनाता था। इससे परेशान होकर पेरेंट्स ने प्राइवेट डिटेक्टिव पुष्पेंद्र पुष्प की मदद ली। इसके बाद उस बच्चे पर अगले कुछ दिनों तक नजर रखी गई। कोचिंग के नाम पर जाने वाला बच्चा क्लास खत्म करने के बाद अपने कुछ दोस्तों के साथ पब और ड्रग्स लेने जाता था। उसकी संगत नशा करने वाले दोस्तों से हो गई थी। जब पेरेंट्स को सबूत दिए गए तो डिटेक्टिव कंपनी के संचालक ने बच्चे को समझाने के साथ उसकी काउंसिलिंग की। इसके बाद उस बच्चे को ड्रग्स से दूर करने का प्रयास शुरू किया जा सका।

रियल केस 2: कनाडा में सीनियर मैनेजर बता शादी की बात की, प्यून ग्रेड का निकला

भोपाल के एक केस में लड़की वालों ने एक प्राइवेट जासूसी फर्म से शादी के लिए आए लड़के के बैकग्राउंड और करियर पर संदेह होने पर जांच कराई। भोपाल की 25 साल की निशा (काल्पनिक नाम) के परिवार के पास कनाडा में रहने वाले लड़के निशांत कुमार (काल्पनिक नाम) का रिश्ता आया, निशांत ने अपने आप को कनाडा की एक बड़ी कंपनी में सीनियर मैनेजर बताकर 5 लाख रुपए महीने सैलरी मिलने का दावा किया। रिश्ते की बात कुछ आगे बढ़ी, इस दौरान निशा के परिवारवालों को निशांत के बैकग्राउंड और कनाडा की नौकरी-वेतन पर संदेह हुआ है। इसके लिए इंदौर की प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनी की मदद ली गई। उन्होंने अपने महीनेभर की पड़ताल और अपने कनाडा के सोर्स से यह जानकारी निकाली कि वह लड़का जिस कंपनी में सीनियर मैनेजर होने का दावा कर रहा है, वह झूठ है। बल्कि वह उस कंपनी में प्यून ग्रेड पर निचले वर्ग का कर्मचारी है, जिसका वेतन एक लाख रुपए से भी बहुत कम है। इस मामले में जासूसी फर्म ने निशांत की नौकरी और वेतन से जुड़े दस्तावेज भी निशा के परिवारवालों को उपलब्ध कराए गए। इसके बाद लड़की वालों को सच्चाई पता चली और उन्होंने उससे रिश्ता तोड़ दिया।

रियल केस 3: ग्वालियर

दो बच्चों की मां से सोशल मीडिया पर दोस्ती की, 5 लाख ऐंठे, कानपुर से पकड़ा

ग्वालियर की प्राइवेट जासूसी एजेंसी के पास शहर के एक कारोबारी का केस आया। इसमें दो बच्चों की मां 40 साल की महिला नेहा (काल्पनिक नाम) की दोस्ती सोशल मीडिया पर राहुल नाम के एक युवक से हो गई। राहुल 25 साल का था, उसने नेहा से धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई और उससे प्यार करने का दावा करने लगा। नेहा को भी राहुल पर विश्वास हो गया और जुड़ाव बढ़ने लगा। राहुल ने इमोशनली नेहा से अपनी मां की बीमारी और कभी कॉलेज की फीस भरने के नाम पर करीब 5 लाख रुपए ऐंठ लिए। इसके बाद उसने सोशल मीडिया और फोन पर नेहा से बात करना बंद कर दिया। 5 लाख रुपए ऐंठने की जानकारी जब नेहा के पति को लगी तो उसने पुलिस में शिकायत की, लेकिन राहुल का नाम, नंबर और पता सब फर्जी निकला। ग्वालियर के प्राइवेट डिटेक्टिव प्रवीण विजय के पास यह केस आया। उसने एक महीने तक पड़ताल की, राहुल ने जो अपना पता बताया था, उस जगह पर जानकारी मिली कि दो साल पहले एक कॉलेज छात्र रहता था, वह अब कानपुर से आया था। वह यहां क्या पढ़ाई कर रहा था, इसकी जानकारी तलाशी गई। इसके बाद कानपुर के एक विवि में 15-20 दिन की पड़ताल के बाद फर्जी नाम राहुल वाले छात्र को पकड़ा गया, पता चला कि वह ऐसे ही कुछ शादीशुदा महिलाओं को फंसाकर पैसे ठग चुका है।

5 साल में बदलाव, अब एम्पलाय बैकग्राउंड और फैमिली पर नजर

मप्र में भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत बड़े शहरों-कस्बों में 3-4 बड़े प्राइवेट डिटेक्टिव सर्विस ही काम कर रहे हैं, छोटे स्तर पर इन्वेस्टिगेशन को लेकर इनकी संख्या 10 से ऊपर है। भास्कर डिजिटल ने इंदौर, ग्वालियर और भोपाल में इस सर्विस से जुड़े बड़े प्राइवेट डिटेक्टिव से बात कर पड़ताल की। 4-5 साल पहले तक प्राइवेट जासूसों के पास 90-95 फीसदी केस तलाक और पति-पत्नी के बाहरी अफेयर के ही आते थे। इससे जुड़े मामलों में सबूत तलाशा जाता था। इसके अलावा शादी के इच्छुक लड़के-लड़कियों की बैकग्राउंड और उनके परिवार की जानकारी भी जुटाई जाती है। लेकिन अब इस ट्रेंड में कुछ बदलाव आने लगा है। अब लोग प्राइवेट जासूस की मदद से अपने बच्चों पर नजर रखने के साथ ही बड़ी कंपनियों में बड़े पद पर एम्पलाय रखने के पहले उसके फाइनेंशियल फ्रॉड और करियर बैकग्राउंड की जांच करा रही हैं। इसके अलावा फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन या डिजिटल फ्रॉड के मामलों में भी लोग व फर्म व बैंक वाले मदद ले रहे हैं।

पैरेंटल इन्वेस्टिगेशन की डिमांड बढ़ी, नशे व गलत कदम उठाते पकड़ाए

इंदौर में 20 साल से जासूसी की सर्विस दे रहे डिटेक्टिव ग्रुप के पुष्पेंद्र पुष्प ने बताया कि अभी भी सबसे ज्यादा केस पति-पत्नी पर शक को लेकर जासूसी, तलाक मामले में सबूत व साक्ष्य लाकर देना और पति-पत्नी के बाहरी अफेयर के बारे में पता लगाने के ही आ रहे हैं। यह जरूर है कि पहले इनकी संख्या 90 फीसदी से ज्यादा होती थी, जो अब पिछले 5 सालों के दौरान 50 फीसदी तक आ गई है। इसके साथ ही शादी के रिश्तों में दोनों पक्षों के बैकग्राउंड और लड़का नशा करता है कि नहीं, उसकी नौकरी क्या है, इसकी पड़ताल करवाई जाती है। प्रदेश के बड़े शहरों में पिछले कुछ सालों के दौरन पैरेंटल इन्वेस्टिगेशन में प्राइवेट डिटेक्टिव की डिमांड बढ़ी है। इसमें टीनएजर्स और कॉलेज स्टूडेंट के ही अधिकतर मामले आ रहे हैं, जिसमें पेरेंट्स को उनके बच्चे की फ्रेंड सर्कल, नशे-ड्रग्स की आदत या बायफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के साथ कहीं बाहर जाने को लेकर जानना होता है। इस मामले में कुछ केस में नशा करते हुए भी बच्चों को पकड़ा गया और उनके माता-पिता को सबूत दिए गए। मप्र के अलावा दूसरों शहरों और यहां तक की विदेशों में भी जानकारी पता लगाने के केस ले रहे हैं।

रिश्तों में चीटिंग के साथ मर्डर केस में ले रहे हैं सर्विस

ग्वालियर में डिटेक्टिव कंपनी चलाने वाले प्रवीण विजय ने बताया कि वे इस फील्ड में करीब 4 साल से हैं। इस दौरान अभी जिस तरह के मामले में आ रहे हैं, उसमें सबसे ज्यादा केस तो पति-पत्नी के रिश्तों में चीटिंग को लेकर ही आ रहे हैं। तलाक केस में पति या पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ सबूत चाहते हैं, वे डिजिटल फोन, ईमेल के साथ फिजिकली क्लू लेना चाहते हैं। 50-60 फीसदी इसके ही मामले हैं। इसके अलावा नए में लोग पुलिस के साथ मर्डर इन्वेस्टिगेशन या एक्सीडेंट केस में भी मदद ले रहे हैं। यह जरूर है कि 100 केस में अब 10-12 पैरेंटल इन्वेस्टिगेशन के होते हैं, जिसमें माता-पिता अपने बच्चों की रुटीन और किससे मिलते हैं और किस तरह की संगत रहते हैं, यह जानना चाहते हैं। बच्चा कहीं गलत रास्ते में तो नहीं जा रहा है। प्राइवेट फर्म केस में जुटाई जाने वाली जानकारी और लगने वाले दिन के अनुसार अपना फीस चार्ज करते हैं। 2 हजार रुपए में केस मीटिंग से शुरू होकर 5 हजार में एक दिन की जानकारी जुटाने के साथ 2 लाख रुपए तक के इन्वेस्टिगेशन चार्ज कर रहे हैं।

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